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पार्षद संतोष मौर्या ने पेवर ब्लॉक लगाने के नाम पर ₹12.66 करोड़ भ्रष्टाचार लगाया आरोप: उच्च स्तरीय जांच की मांग, कहा- पार्षद पद को समाप्त कर दिया जाये…

भिलाई। नगर पालिका निगम भिलाई के परियोजना शाखा अंतर्गत पेवर ब्लॉक से संबंधित कार्यों की उच्च स्तरीय जांच का विषय इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। भाजपा भिलाई जिला मंत्री और भिलाई निगम के वार्ड 15 अम्बेडकर नगर पार्षद संतोष मौर्या द्वारा भिलाई निगम आयुक्त को शिकायत और शपथ पत्र देकर लगभग ₹12 करोड़ 66 लाख के पेवर ब्लॉक संबंधित उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, शपथ पत्र ने पार्षद ने उल्लेख किया है कि अगर उनके द्वारा जो भी भष्टाचार अनियमितता की बात कही जा रही है अगर वो जांच उपरांत  असत्य पायी जाती है तो जिले के कलेक्टर के द्वारा उनकी पार्षद पद को समाप्त कर दिया जाये।

पार्षद संतोष मौर्या द्वारा दिए गए शिकायत और शपथ पत्र में उल्लेख किया गया है कि…

नगर पालिका निगम भिलाई के परियोजना शाखा अंतर्गत दिनांक 13.02.2023 से 08.04.2025 तक पेवर ब्लॉक कार्य से संबंधित लगभग 20 निविदाएँ आमंत्रित की गईं, जिनका कार्यादेश भी जारी किया गया। कार्यादेश पंजी के अनुसार इन कार्यों की कुल स्वीकृत राशि लगभग ₹10 करोड़ 44 लाख है।

इसके अतिरिक्त परियोजना शाखां द्वारा वेंडिंग जोन निर्माण, प्लेटफॉर्म निर्माण, मार्ग चौड़ीकरण एवं फुटपाथ निर्माण जैसे कार्यों के लिए भी लगभग 13 कार्यादेश जारी किए गए, जिनमें पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य सम्मिलित है। इन कार्यों की कुल स्वीकृत राशि लगभग ₹2 करोड़ 24 लाख है। अर्थात परियोजना शाखा द्वारा कुल मिलाकर लगभग ₹12 करोड़ 66 लाख के पेवर ब्लॉक संबंधित कार्य 28 माह की अवधि में संपादित किए गए हैं। इसी प्रकार के कुछ कार्य नगर निगम के विभिन्न जोन कार्यालयों के माध्यम से भी किए गए हैं।

परियोजना शाखा अंतर्गत कराए गए इन कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार की संभावनाएँ परिलक्षित होती हैं। अतः मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि निम्न बिंदुओं पर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

पार्षद द्वारा शपथ पत्र में उल्लेख किया गया है कि…

आयुक्त, नगर पालिक निगम भिलाई को परियोजना शाखा अंतर्गत पेवर ब्लॉक से संबंधित कार्यों की उच्चस्तरीय जांच हेतु आवेदन पत्र दिनांक 17.10.2025 को दिया गया है। इस पत्र के माध्यम से मेरे द्वारा पेवर ब्लॉक के कार्यों में बडे पैमाने पर अनियमितता एवं भष्टाचार परियोजना शाखा में हुआ है। यह कि मेरे द्वारा जांच के बिन्दु आवेदन पत्र के माध्यम से आयुक्त महोदय को अवगत कराया गया है। अगर मेरे द्वारा जो भी भष्टाचार अनियमितता की बात कही जा रही है। जांच उपरांत अगर वह असत्य पायी जाती है तो जिले के कलेक्टर महोदय के द्वारा मेरे पार्षद पद को समाप्त कर दिया जाये।

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