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नारी सशक्त है लेकिन क्या सभी हैं? : संयुक्त कलेक्टर दिव्या वैष्णव

नारी के लिए प्रत्येक दिवस, प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण होता है, यह केवल एक दिन (अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस) के लिए विशेष नहीं है….नारी हमेशा से सशक्त रही है केवल आवश्यकता है उसे जागृत और जागरूक करने की…जिस तरह भगवान हनुमान जी शक्तिशाली थे परन्तु श्राप के कारण अपनी असीम शक्ति और क्षमता को भूल गए थे,लंका गमन के पूर्व उन्हें जामवंत जी ने उनकी शक्ति और क्षमता का स्मरण करवाया,उसी तरह नारी को केवल स्मरण दिलाने की आवश्यकता है कि उनमें कितनी शक्ति है,कितनी संभावनाएं हैं,हर कार्य को करने में दक्ष हैं….

पुरुष और महिला की तुलना करना औचित्यपूर्ण नहीं है,क्योंकि ना कोई उच्चतर है ना कोई निम्नतर..दोनो का अस्तित्व स्वयं में पूर्ण है,और जब दोनों एक दूसरे के पूरक बनते हैं तो एकदूसरे को संपूर्ण करते हैं।

-नारी सहनशील है,इसीलिए हर परिस्थिति का सामना करते हुए और सशक्त बनती है।
-नारी निःस्वार्थ समर्पण के लिए हमेशा तत्पर रहती है इसीलिए उसका हर अमूल्य योगदान उसे सशक्त बनाता है।
-नारी समानांतर प्रबंधन कर सकती है इसीलिए सीमित संसाधनों में भी ,विभिन्न भूमिकाओं में उसका प्रदर्शन उसे सशक्त बनाता है।
-नारी समझदारी की मिसाल होती है इसीलिए हर रिश्ते की उसकी समझ और उसका आत्मविश्वास उसे सशक्त बनाती है।
-नारी प्रेम के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करती है इसीलिए उसकी ये प्रेम भावना उसे सशक्त बनाती है।
-नारी तन और मन से शक्ति से परिपूर्ण होती है इसीलिए विपरीत परिस्थिति में उसकी ये शक्ति उसे और सशक्त बनाती है।

-नारी में सकारात्मक आशा का पुंज है इसीलिए उसकी हर सोच उसे सशक्त बनाती है।
-नारी में सीखने की असीम चाह होती है इसीलिए नवाचार और क्रियात्मकता उसे सशक्त बनाती है।
-नारी के लिए उसका परिवार उसकी धुरी होती है इसीलिए उसके रिश्ते उसे सशक्त बनाते हैं।
-नारी आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है इसीलिए उसका आत्मबल उसे सशक्त बनाता है।
-नारी संस्कारों की धरोहर है इसीलिए उसका यह प्रसार उसे सशक्त बनाता है।

संवैधानिक और सांविधिक प्रावधानों,अधिनियम,नियम,कानून सब नारी शक्ति को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं परन्तु……..

सावधान नारी और पुरुष !! स्वतंत्रता और स्वछंदता की भी सीमा होती है,आज के बदलते परिवेश में ,नैतिक पतन की ओर जाता समाज,बिखरते-टूटते रिश्ते,मानसिक अशांति और ना जाने क्या क्या विडंबनाएं…ये सभी संकेत है कि अभी भी सुधर जाओ,अभी भी सबकुछ व्यवस्थित कर लो……कही ना कहीं दोष आनुपातिक रूप से महिलाओं पर आरोपित होता है,और आज के परिवेश में इस सत्यता के कई उदाहरण भी हैं।

हे नारी!! स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की परिभाषा को गहराई से समझना जरूरी है… अपने अस्तित्व को पहचानो,अपनी क्षमता,अपनी ऊर्जा को सही दिशा और समाज को सही दशा प्रदान करने में लगाना जरूरी है।
समाज केवल उन्हें “मानवी” की तरह सम्मान और सहयोग देकर तो देखे….

लेख: दिव्या वैष्णव (संयुक्त कलेक्टर)
अवर सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, रायपुर (छग)

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