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नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा, जानिए पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त और पूजाविधि?

नवरात्रि का पावन पर्व में माता के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. बता दें कि सप्तमी का विशेष महत्व है. माता कालरात्रि ने असुरों का वध करने के लिए यह रूप धारण किया था. ऐसी मान्यता है कि सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना करने से भूत, प्रेत और बुरी शक्तियों से छुटकारा मिलता है…

 

नईदिल्ली (ए)। शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप, मां कालरात्रि, की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। इस दिन देवी की आराधना से भक्तों को साहस, शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है। मान्यता है कि सही मुहूर्त में पूजा करने से मां कालरात्रि की विशेष कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती है और जीवन से नकारात्मकता, भय और संकट दूर होते है।

मां कालरात्रि नवरात्रि के सातवें दिन पूजी जाती हैं और वे मां दुर्गा का सबसे उग्र रूप है।उनका स्वरूप भयंकर और शक्तिशाली है, लेकिन उनके भक्तों के लिए वे अत्यंत शुभ और कृपालु है। मां कालरात्रि को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों और भय को दूर करने वाली देवी माना जाता है।

इस दिन पूजा करने के शुभ समय में ब्रह्म मुहूर्त (लगभग सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक) और अभिजीत मुहूर्त (लगभग दोपहर 11:56 बजे से 12:46 बजे तक) शामिल है।

अन्य शुभ समय में अमृत काल (लगभग सुबह 9:32 बजे से 11:12 बजे तक) आता है, जो आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम माना जाता है, और घोडुली मुहूर्त (लगभग शाम 6:51 बजे से 7:14 बजे तक) भी पूजा के लिए अनुकूल समय है।

नवरात्र महापर्व के सप्तमी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-ध्यान करें। और पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से छिड़काव करें। फिर मां को फूल, सिंदूर, कुमकुम, रोली, अक्षत इत्यादि अर्पित करें।

माता कालरात्रि को नींबू से बनी माला अर्पित करें और गुड़ से बनें पकवान का भोग लगाएं। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और मंत्रों का जाप करें। फिर मां कालरात्रि की आरती उतारें।

आरती से पहले दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बिलकुल ना भूलें। आरती के बाद माता से अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

जरूर करें इन मंत्रों का जाप

– ॐ कालरात्र्यै नम:।
– एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
– जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तुते॥
– ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी।
एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ।।

मां कालरात्रि पूजन मंत्र

मां कालरात्रि की पूजा के लिए कई मंत्र हैं

‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:’ बीज मंत्र.

‘या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:’ स्तोत्र मंत्र.

‘ॐ कालरात्र्यै नम:’ और ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’

मां कालरात्रि भोग

मां कालरात्रि को आप गुड़ से बने मालपुए का भोग लगा सकते हैं. मान्यता है कि इससे मां प्रसन्न होती हैं और हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।

सामग्री

  • मालपुआ का बैटर बनाने के लिए
  • 1 कप मैदा
  • 1 कप खोया, कद्दूकस
  • 1/2-1 कप पानी

मालपुआ बनाने के लिए

  • 10 टुकड़े पिस्ता, बारीक कटा हुआ
  • 8 टुकड़े बादाम, बारीक कटा हुआ
  • एक चुटकी केसर
  • 6 टेबल स्पून घी
  • 4 कप गुड़

विधि 

  • मालपुआ बनाने के लिए सबसे पहले मैदे में पानी डालकर बैटर तैयार करें. अब इसमें खोया और पानी डालकर अच्छे से मिक्स कर लें.
  • अब पैन में घी डालें और इसमें मालपुआ वाला बैटर डालकर पकाएं. मालपुआ को दोनों तरफ से अच्छे से पकाएं.
  • अब गुड़ का सीरप तैयार करें और उसमें मालपुआ को भिगोएं.
  • ऐसे ही कई और मालपुआ तैयार करें। प्लेट में मालपुआ को चाश्नी से निकाल कर एक के ऊपर एक रखें.ऊपर से बादाम, पिस्ता और केसर डालकर सर्व करें.

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