गोरखपुर में मंगलवार को आसमान से रंगों की बारिश हुई। हवा में इस कदर अबीर गुलाल उड़ा कि हवा अबीर- गुलाल के रंग में रंग गई, सड़कें छतों से बरस रहे रंगों के रंग में सराबोर हो गईं, गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने भी खेली होली…
हिंदू धर्म में होली का बहुत महत्व है और पूरा भारत इस त्योहार को मनाता है। यह रंगों का त्योहार है। आपको बता दें कि इसे पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भारत में होली 2023 की तारीख 8 तारीख को होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होली मनाई जाती है। साल 2023 में रंगों का त्योहार होली 8 मार्च 2023 को पड़ रहा है।
एक दिन पहले 7 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जिसे छोटी होली भी कहा जाता है। भारत में होली 2023 तिथि के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें होली के लिए सभी स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहेगा। आप सभी जानते हैं कि होली भारत का एक बहुत बड़ा त्योहार है, जिसे पूरा देश मनाता है, इसलिए पूरे देश में छुट्टी रहेगी।
भारत में होली 2023 तिथि के बारे में जानकर आपको बता दें कि इस बार होली 8 मार्च 2023 को मनाई जा रही है। आपको बता दें कि हम होली इसलिए मनाते हैं क्योंकि इसकी कथा के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक राक्षस राजा था। वह घमंड में चूर होकर अपने को भगवान मानने लगा था।
हिरण्यकश्यप ने अपने राज्य में केवल भगवान का नाम लेने पर प्रतिबंध लगा दिया था और खुद को भगवान मानने लगा था। लेकिन हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान का भक्त था। और उसी हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि में भस्म न होने का वरदान प्राप्त था। एक बार हिरण्यकश्यप ने होलिका को प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का आदेश दिया। लेकिन होलिका आग में बैठते ही जल गई और प्रह्लाद बच गया। तभी से भगवान के भक्त प्रह्लाद की याद में होलिका दहन की शुरुआत की जाने लगी।
गोरखपुर में धूमधाम से होली मनाया जा रहा गोरक्षापीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ छह से सात किलोमीटर तक रथ में सवार होकर निकलते थे। पर अब सीएम बनने के बाद पूरी यात्रा में शामिल नहीं होते। लेकिन शुभारंभ उन्हीं की अगुआई में होता है।गोरखपुर की इस होली का नाम है, ‘भगवान नरसिंह की रंगभरी शोभायात्रा’। परंपरा के अनुसार होली के दिन रथ पर सवार होकर इस शोभायात्रा का नेतृत्व गोरक्षपीठाधीश्वर करते हैं। पीठाधीश्वर के रूप में योगी आदित्यनाथ वर्षों से इसकी अगुवाई करते रहे हैं।
वैश्विक महामारी कोरोना के दो साल को अपवाद मान लें तो मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी इस परंपरा को निभाते रहे हैं। रथ को लोग खींचते हैं और रथ के आगे-पीछे हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं।


जिस रास्ते से ये रथ गुजरता है। वहां छत से महिलाएं और बच्चे गोरक्षपीठाधीश्वर और यात्रा में शामिल लोगों पर रंग-गुलाल फेंकते हैं। बदले में इधर से भी उन पर भी रंग-गुलाल फेंका जाता है।अनूठी होली की यह परंपरा करीब सात दशक पहले नानाजी देशमुख ने डाली थी। बाद में ‘नरसिंह शोभायात्रा’ की अगुवाई गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर या पीठ के उत्तराधकारी करने लगे। लोगों के मुताबिक कारोबार के लिहाज से गोरखपुर का दिल माने जाने वाले साहबगंज से इसकी शुरुआत 1944 में हुई थी।
उल्लास और उमंग के पर्व होली की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
स्नेह और भाईचारे का यह त्योहार हमारे विविधतापूर्ण समाज के जीवंत रंगों और सौहार्द का प्रतीक है।
मेरी मंगल कामना है कि रंगों का यह महापर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि व नई ऊर्जा का संचार करे।
— President of India (@rashtrapatibhvn) March 8, 2023















