अदालत ने कहा कि महिला पर हमला या दुष्कर्म के ज्यादातर मामलों में सामान्य प्रथा यह है कि अगर पुरुष पति है और दूसरे पुरुष के समान कृत्य करता है तो उसे छूट दी जाती है। हमारे विचार से इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है…
गुजरात (ए)। उच्च न्यायालय ने महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा पर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि दुष्कर्म एक दुष्कर्म होता है, भले ही वह किसी पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ किया गया हो। देश में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा पर चुप्पी तोड़ने की जरूरत है। हाल ही में पारित एक आदेश में न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वास्तविक घटनाएं शायद आंकड़ों की तुलना में अधिक हैं। न्यायाधीश जोशी ने कहा कि महिलाएं ऐसे माहौल में रह रही हैं, जहां वे हिंसा के अधीन हैं।














