रायपुर। विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के रूप पहचान स्थापित करने वाला जशपुर जिले का प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत की प्रतिकृति अब घरों के ड्राइंग रूम से निकलकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जगह बनाने लगा है। यह सड्कों में दौड़ने वाले एक ट्रक में भी देखने मिला।
छत्तीसगढ़ के अमर रोडवेज के मालिक जीवन खलखो ने अपने ट्रक में मधेश्वर पर्वत का आकर्षक चित्र बनाया है। श्री खलखो की यह पहल हमारे प्रदेश की गौरवशाली धरोहर और कला को सड़कों पर प्रदर्शित करने के लिए सभी के लिए प्रेरणादायक है।
ज्ञात हो कि जशपुर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूरी पर राजकीय हाइवे 78 पर चरई डांड के समीप मयाली गांव स्थित है, यहां मधेश्वर पहाड़ है, जिसकी आकृति शिवलिंग के समान दिखाई देती है. ग्रामीण लोग इस पहाड़ की पूजा करते है और विश्व का बड़ा शिवलिंग होने का गौरव प्राप्त है।
मधेश्वर पहाड़ को शिव भगवान का प्रतिरूप माना जाता है तथा प्रतिवर्ष यहां मेले का भी आयोजन होता है और इससे पहले शिव भगवान की पूजा भी की जाती है. यह पर्वत आकार में शिवलिंग के समान ही है।
मधेश्वर पहाड़ एक बहुत ही विशाल चट्टान से बना हुआ है जो भूमि से सीधे 300 मीटर ऊंचा उठा हुआ है. इसका आकार एक शिवलिंग के समान है जो. वर्षा ऋतु में इसके ऊपर बरसने वाली बारिश जलधारा बनकर नीचे चली आती हैं और इस प्रकार बहती हुई धाराएं इस शिवलिंग रूपी चट्टान में एक चौड़ी और लम्बवत निशान बना देती हैं जो बिल्कुल मंदिर के पुजारी द्वारा शिवलिंग पर लगाए गए लम्बे टीके की तरह दिखाई देती हैं।
इस वर्ष शिवरात्रि के मौके पर भी मधेश्वर पहाड़ में श्रद्धालु सुबह से पहुंच रहे हैं और मधेश्वर पहाड़ पर बने शिव मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे हैं. बता दें कि यह पहाड़ इतना बड़ा है कि आसपास के 40 से ज्यादा गांव से नजर आता है. इस पहाड़ में हजारों ग्रामीणों की आस्था है, यही वजह है कि अब मधेश्वर पहाड़ की प्रसिद्धि प्रदेशस्तर तक पहुंच चुकी है।
















