जामुल। स्वामी विवेकानंद विचार मंच के द्वारा जामुल में विवेकानंद जी की 160वी जयंती एवं युवा महोत्सव का कार्यक्रम शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामुल में संपन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं पूजा अर्चना कर माल्यार्पण किया गया शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं सरस्वती शिशु मंदिर जामुल देवनगर विद्यार्थियों के द्वारा भाषण गीत निबंध चित्रकला आदि प्रस्तुत किया गया। वही सरस्वती शिशु मंदिर विद्यार्थियों के द्वारा विवेकानंद जी की झांकी एवं बहनों द्वारा कलश यात्रा निकाली गई।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष ईश्वर ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करें एवं उनके विचारों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य करें। दिलेश्वर उमरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने दीन दुखियों की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया. विवेकानंद ने अपने साथियों और शिष्यों से कहा कि अगर वे ईश्वर की सेवा करना चाहते हैं तो गरीबों और जरुरतमंदों की सेवा करें।
विवेकानंद का मानना था कि निर्धन और जरुरतमंदों के अंदर ही ईश्वर वास करता है ।उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। “ स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रवर्तित यह उत्प्रेरक मंत्र युवा जागरण का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया तथा उनमें राष्ट्र के प्रति समर्पण और स्वाभिमान भाव भरने का संकल्प लिया। “उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। कार्यक्रम के समापन में स्कूली विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार वितरण किया गया।
इस दौरान कार्यक्रम में रेखराम बछोर , दीपक गुप्ता, हेमंत देवांगन, जोगेश्वर सोनी, नेतराम साहू, राजेश सिन्हा, संजय शर्मा, प्रवीण शर्मा, नागेन्द्र निर्मलकर, शत्रुहन साहू, राकेश वर्मा, मेघनाथ साहू, ओमप्रकाश साहू,हरीश चन्द्राकर, सोनसाय यादव, प्रशांत गुप्ता, अनूप राय, नागेंद्र निर्मल, तिलक यादव, अरुण गायकवाड़, सुभाष पांचाल, कृष्णा यादव, ओ एस चंद्राकर, डी एस साहू, रामचंद साहू , विनय बघेल एवं समस्त सरस्वती शिशु मंदिर व प्राथमिक शाला के सभी स्टाफ एवं स्कूल के बच्चे उपस्थित रहे । कार्यक्रम संचालन जितेन्द्र साहू एवं आभार यशवंत राजपूत ने किया l















