जाने कब है आंवला नवमीं? बेटों से जुड़ी है आंवला नवमी की कहानी, यहां पढ़ें
नईदिल्ली (ए)। कार्तिक मास में अनेक पर्व आते हैं और प्रत्येक पर्व का अपना एक विशेष महत्व होता है। दीपावली के बाद आंवला नवमी का पर्व मनाया जाता है। आंवला नवमी शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। इस खास दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। स्वस्थ रहने की कामना के साथ आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवला नवमी में आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा अर्चना कर ही भोजन किया जाता है. इस दिन आंवला को प्रसाद के रूप में भी खाया जाता है।
आपको बता दें, आंवला नवमी को अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किए गए कार्य को शुभ और अटूट माना जाता है। बता दें कि इस बार आंवला नवमी 12 नवंबर 2021 शुक्रवार को है।
जानिए क्या है कहानी
आंवला नवमी कई फल देने वाली है। इस दिन ब्राह्मणों को आंवले के पेड़ के नीचे खाना खिलाना शुभ माना जाता है और पहले उन्हें सोने का दान दिया जाता था। एक बार व्यापारियों ने इस दिन ब्राह्मणों को सम्मान दिया, तो उनके पुत्रों को यह सब पसंद नहीं आया, इसलिए उन्होंने अपने पिता के साथ युद्ध किया। झगड़े से परेशान कारोबारी घर छोड़कर दूसरे गांव चले गए। उन्होंने वहां रहने के लिए एक दुकान स्थापित की। यहां उन्होंने दुकान के सामने आंवला का पेड़ लगाया। भगवान प्रसन्न हुए और उनकी दुकान को बहुत लाभ होने लगा।
वही खास बात यह थी कि परिवार से दूर रहते हुए भी उन्होंने यहां आंवला नवमी की पूजा कर ब्राह्मणों को अन्नदान करना शुरू कर दिया था। वहीं दूसरी ओर बेटों का धंधा पूरी तरह ठप हो गया और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। वह समझ गया कि हमने अपने पिता के भाग्य से खाया है। तब बेटा अपने पिता के पास गया और अपनी गलती के लिए माफी मांगी। फिर अपने पिता के कहने पर उन्होंने आंवले के पेड़ की भी पूजा की, जिससे उन्हें अपने घर में पहले जैसा ही सुख मिलता था।
पूजा विधि-
1. आंवला नवमी के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा की जाती है।
2. हल्दी, कुमकुम आदि से पूजा करने के बाद जल और कच्चा दूध वृक्ष पर अर्पित करें।
3. इसके बाद आंवले के पेड़ की परिक्रमा करें।
4. तने में कच्चा सूत या मौली आठ बार लपेटें।
5. पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ी या सुनी जाती है।
इन शुभ मुहूर्तों में करें पूजा- अर्चना-
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:56 ए एम से 05:49 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:44 ए एम से 12:27 पी एम
- विजय मुहूर्त- 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 05:18 पी एम से 05:42 पी एम
- रवि योग- 02:54 पी एम से 06:42 ए एम, नवम्बर 13
- निशिता मुहूर्त- 11:39 पी एम से 12:32 ए एम, नवम्बर 13
नियम- इस दिन वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन किया जाता है और प्रसाद के रूप में भी आंवला खाया जाता है।
सामग्री- आंवले का पौधा पत्ते एवं फल, तुलसी के पत्ते. पौधा, कलश. जल. कुमकुम, हल्दी, सिंदूर, अबीर, गुलाल, चावल, नारियल, सूत का धागा. धूप, दीप, माचिस. श्रृंगार का सामान, साड़ी ब्लाउज.दान के लिए अनाज
















