नईदिल्ली (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से इस मुद्दे पर बहस छेड़ दी है कि क्या कानूनी रूप से विवाहित महिला सहमति से बनाए गए संबंध को रेप कह सकती है। मुख्य न्यायाधीश की बेंच एक मामले पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी ने जमानत की मांग की थी। दरअसल, दूसरी महिला से शादी करने पर दो साल से भी ज्यादा समय से लिव इन संबंधों में रही महिला ने उस पर रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2019 में आरोपी के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी। आरोपी ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पति क्रूर हो सकता है, लेकिन यदि कपल पति और पत्नी की तरह रह रहे हैं तो क्या आप कानूनी रूप से विवाहित पुरुष और महिला के बीच सेक्स को रेप कह सकते हैं?
2014 में हिडिंबा मंदिर में विवाह किया था
शिकायतकर्ता के अनुसार, वे दोनों प्रेम प्रसंग में थे, लेकिन उसने बताया कि उसने सेक्स से मना कर दिया और कहा कि यह तब तक नहीं हो सकता, जब तक उनकी वैधानिक रूप से शादी नहीं हो जाती। इसके बाद दोनों मनाली गए और वहां हिडिंबा मंदिर में 2014 में विवाह कर लिया। आरोपी पक्ष के वकील ने कहा कि उन्होंने कभी विवाह नहीं किया, वे लिव इन रिलेशन में थे। यह संबंध सहमति के साथ था।
महिला बोली, धोखा देकर सहमति ली
वहीं, महिला का कहना था कि उसने सेक्स के लिए सहमति धोखा देकर ली, क्योंकि उसने मान लिया था कि मंदिर में असल विवाह होता है। इसके अलावा वह उससे क्रूर तरीके से व्यवहार करता था। उसके निजी अंगों पर चोटें आई थीं, जिसके लिए उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
विवाह के लिए झूठे वादे करना गलत
कोर्ट ने कहा कि विवाह के लिए झूठे वादे करना गलत है। किसी को भी झूठे वादे करके शादी नहीं करनी चाहिए, लेकिन इस मामले में यह कहना गलत होगा कि सेक्स संबंध रेप था। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को हम पहले ही कई मामलों में सेटल कर चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि आप वैवाहिक क्रूरता का मामला दायर कीजिए, रेप का क्यों किया। क्या क्रूरता को रेप कहा जा सकता है। कोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तारी से चार हफ्ते की छूट दी और कहा कि वह एफआईआर रद्द करने के लिए उचित कोर्ट में आवेदन कर सकता है।















