दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। पढ़ाई के दौरान जब बालाघाट में जिस किराए के बाड़े में रहता था वहां पर सिंचाई विभाग के दो उप अभियंता भी रहते थे, उनके जलवे और जीवन शैली देखकर मन मे शासकीय नौकरी और वो भी इंजीनियर बनने की इच्छा थी। अपने लक्ष्य को पाने के लिए मैंने मेहनत की और आज इस मुकाम पर पहुंचा हूँ। यह सब बातें दुर्ग पीडब्ल्यूडी में कार्यपालन अभियंता के पद पर पदस्थ अशोक कुमार श्रीवास ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
ईई अशोक श्रीवास की प्रारंभिक शिक्षा क्लास पहली से चौथी तक रेल्वे स्कूल डोंगरगढ़, पांचवी से सातवी तक रेल्वे स्कूल, बिलासपुर में हुई। कक्षा आठवी की शिक्षा शासकीय स्कूल, सेक्टर -7 भिलाई तथा नवमीं की शिक्षा बीएसपी स्कूल सेक्टर-8 भिलाई से प्राप्त की। हाई स्कूल तथा हायरसेकंडरी की शिक्षा इन्होंने शासकीय बहुद्देश्यीय स्कूल, दुर्ग से प्राप्त की। वर्ष 1980 में इन्होंने साइंस कॉलेज, दुर्ग से बीएससी फस्र्ट ईयर पास कर अपने इंजीनियर बनने के सपने को साकार करने के लिए बालाघाट (मप्र), पॉलीटेक्निक करने वर्ष 1981 में चले गए और वर्ष 1984 में पॉलीटेक्निक की डिग्री हासिल कर इसी वर्ष पीडब्ल्यूडी में उप-अभियंता के पद पर चयनित हुए।
इन्होंने पार्ट टाइम शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, रायपुर से बीई तथा बीआईटी कॉलेज दुर्ग से एमई (स्ट्रक्चर) में किया है। इनकी पहली पोस्टिंग महासमुंद में हुई उसके बाद इन्होंने छुरा (गरियाबंद), चंद्रपुर (बिलासपुर), महासमुंद, रायपुर में अपनी सेवाएं दी। इन्हें वर्ष 2006 में प्रमोट कर अंबागढ़ चौकी में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) बनाया गया उसके बाद इन्हें दुर्ग अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद इन्हें एसडीओ पंडरिया (कवर्धा) की जिम्मेदारी दी गई। इन्होंने बोरला उप संभाग को ओपन किया फिर एसडीओ (पीडब्ल्यूडी) रायपुर तथा दुर्ग उप-संभाग क्रमांक-2 में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2011 में इनका प्रमोशन कार्यपालन अभियंता के पद पर हुआ। जुलाई 2014 से विधानसभा संभाग, रायपुर में कार्यालय प्रमुख अभियंता, निविदा प्रकोष्ठ के पद इन्होंने जून 2020 तक अपनी सेवाएं दी। जून 2020 में सरकार ने इन्हें दुर्ग पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता की अहम जिम्मेदारी दी है जिसे यह पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे है।
क्रिकेट, फुटबाल, बैडमिंटन, चेस के खेलों में और गाना सुनने और गाने में विशेष रुचि रखने वाले ईई अशोक श्रीवास डॉ. विश्वविरैय्या तथा स्वामी विवेकानंद के विचारों से बहुत प्रभावित रहे और इन्हें अपना आदर्श मानते है। यह मूलत: महासमुंद से है तथा इनके पिताजी पुलिस विभाग में निरीक्षक थे। उनकी जगह-जगह पोस्टिंग होती रहती थी, जिसके कारण इनकी पढ़ाई राज्य के विभिन्न शहरों में हुई। खिलाड़ी के साथ-साथ छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासकीय स्नातक अभियंता संघ के प्रांताध्यक्ष भी है।
विधानसभा फोरलेन मार्ग निर्माण में सराहनीय कार्य के लिए राज्य सरकार ने इन्हें बेस्ट इंजीनियर अवार्ड और इनकी टीम के छह सदस्यों को सम्मानित कर चुकी है।
ईई श्रीवास ने बताया कि कार्य करने का यही उद्देश्य रहा है कि सरकार द्वारा जो पद दिया गया है जनता की सेवा के लिए, जनता की समस्याओं को सुलझाने के लिए सार्थक प्रयास करता हू, मूल मंत्र यही है कि “कर भला तो हो भला” शासन द्वारा दिये गए सभी दायित्वों का ईमानदारी पूर्वक शासन के हितों को संवर्धन करते हुए नौकरी करते आ रहा हूँ।
प्राकृतिक के साथ तालमेल बैठाने की प्रवृत्ति रही है, जिसके तहत भविष्य में ऑर्गेनिक खेती की तैयारी की ओर अग्रसर हूँ। अभी के तनाव भरे माहौल में अपने आप को खुश करने के लिए अपने शौक से अपने आप को शांत और प्रसन्न रहने का प्रयास करता हू और हर व्यक्ति को करना चाहिए। यह चार भाई है, इनके बड़े भाई बीएसपी में इंजीनियर थे। छोटा भाई डॉक्टर है तथा उनकी पत्नी नर्स है। सबसे छोटा भाई रेल्वे में इंजीनियर है तथा कटनी में पदस्थ है। ईई श्रीवास की दो पुत्री है जो कि सिविल इंजीनियर है तथा दोनों पुत्री वर्तमान में एमटेक कर रही है। इनकी पत्नी शासकीय नरहदा विद्यालय में प्राचार्या के पद पर पदस्थ है।














