BREAKING

छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाईफीचर्डसाक्षात्कार

जंगल सुरक्षित हो और वनवासी सुखी और समृद्ध हो यही मेरी प्राथमिकता: भानू प्रताप सिंह

 

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। जब मैं पढ़ाई करता था तब उस समय इतने संसाधन नही हुए करते थे, मैं ग्रामीण परिवेश में पला-बढ़ा हूँ और ग्रामीण परिवेश में हु पूरी पढ़ाई की है। मेरे पिता जी डॉक्टर थे और वही मेरे लाइफ के रोल मॉडल है। बड़े भाई भी फारेस्ट विभाग में थे जो अब रिटायर्ड हो चुके है। यह सब बातें दुर्ग वृत्त के नव पदस्थ मुख्य वन संरक्षक भानु प्रताप सिंह ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया और आगे की कार्य योजना बताई।

दुर्ग वृत्त के मुख्य वन संरक्षक बीपी सिंह मूलतः उत्तर प्रदेश राज्य के जौनपुर जिला के पृथ्वीपुर गांव से है। इनकी पांचवीं तक की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही शासकीय विद्यालय में पूरी हुई। कक्षा छठवी से दसवीं तक कि शिक्षा इन्होंने वाराणसी जिला (अब भदोही) के शासकीय विद्यालय में की। हायरसेकंडरी की शिक्षा इन्होंने वाराणसी जिला के गवर्मेंट इंटर कॉलेज, बसनी से पूरी की। वर्ष 1982 में इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान विषय मे स्नातक की और सन 1984 में यही से विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया।
स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के साथ ही इन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी और अपने पहले की प्रयास में इन्हेंने वर्ष 1989 के मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के परीक्षा में उत्तीर्ण होते हुए राज्य वन सेवा के लिए चयनित हुए।

इनकी पहली पोस्टिंग सरगुजा जिले में उप वनमंडला अधिकारी के पद पर हुआ। इसके बाद इन्होंने राजनांदगांव, बिलासपुर (सीएएफ ऑफ़िस) में अपनी सेवाएं दी। इसके उपरांत इन्होंने मरवाही डिवीजन, कोटा, अचानकमार, कटघोरा में एसडीओ के पद पर अपनी सेवाएं दी। इनके बाद इन्हें तेंदूपत्ता (डिप्टी एमडी) की जिम्मदारी सौपी गई। वर्ष 2012 में इनका प्रमोशन हुआ और इन्हें भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के पद पदोन्नति मिली। इन्होंने जिला वनमंडला अधिकारी (डीएसओ) अमरकंटक (वायु स्पेयर), आचानकमार, बलरामपुर, सूरजपुर, राजनांदगांव के पद पर अपनी सेवा दी। इसके बाद इन्होंने वन विभाग, मुख्यालय में अपनी सेवाएं जारी रखी। राज्य सरकार ने अप्रैल में आदेश जारी कर इन्हें दुर्ग वृत्त का मुख्य वन संरक्षण अधिकारी की बड़ी जिम्मदारी सौपी है जिसे यह 25 अप्रैल से जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है।

योग, प्राणायाम और किताब पढ़ने में विशेष रुचि रखने वाले सीसीएफ बीपी सिंह अपने पिताजी और स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते है। इन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने मुझे जो जिम्मदारी दी है उसे मैं पूरी निष्ठा और लगन से का पूरा प्रयास करूंगा। पूर्व में पदस्थ रहते हुए वृक्षारोपण और जल संरक्षण पर बहुत कार्य किए है उसके अनुभव का लाभ लेते हुए दुर्ग वृत्त में भी इन पर बेहतर कार्य करने की योजना है। शासन द्वारा चलाये जा रहे नरवा योजना मेरा बहुत ही फेवरेट विषय रहा है, राजनांदगांव में चल रहे नरवा विकास पर बेहतर कार्य किया जाएगा।

कार्य करने का उद्देश्य हमेशा से यही रहा कि जंगल सुरक्षित हो, जंगल के आस पास रहने वाले लोग सुखी और समृद्ध हो यही मेरी प्राथमिकता रही है। मैं जहां भी पदस्थ रहा वहां नई नई एक्टिविटी करता हूँ ताकि वहां के रहने वाले लोगो की इनकम जरनेट किया जा सके। वनवासियों के इनकम जनरेट पर पूरा फ़ोकस रहेगा। अपने बलरामपुर और सूरजपुर पदस्थापना के दौरान इन्होंने हाथी प्रबन्धन पर भी बेहतर कार्य किया।

Related Posts