भिलाई। छोटे उद्योग को हर समय संकट का सामना करना पढ़ता है और बदक़िस्मती की बात है कि उनकी पुकार या फ़रियाद कोई नहीं सुनता चाहे वो राज्य सरकार हो या फिर केंद्र सरकार।
एक साल पहले कोविड आया था तो छोटे उद्योगी को कोविड लोन दे के एक और लोन के नीचे दबा दिया गया और आज फिर कोविड ने अपने पैर बहुत जम के पसारे तो भी छोटे उद्योगी बंद की कगार में आ गए क्योंकि अब पुराने कोविड लोन को चुकाने का वक़्त आया तो फिर कोविड आ गया और लाक्डाउन के करण सब उद्योगपति अपनी क्षमता से आधी प्रडक्शन कर पा रहे है जिसके कारण वो अपने क़र्ज़ नहीं पटा पा रहे।
उसके ऊपर रॉ मटीरीयल के दामों में अनचाही मनमानी बढ़त जिससे उसने और छोटे उद्योगपतियों की कमर तोड़ दी है। उद्योगपति समझ नहीं पा रहे है की ये मनमानी और अनचाही जो लोहे के रॉ मटीरीयल जैसे प्लेट, ऐंगल, चैनल, पिंग आइरन के दामों में वृद्धि क्यों की जा रही है क्योंकी ना मटीरीयल में उठाव है ना प्रोडक्शन में तो क्या ये बड़े उद्योगपतियों को या बड़े प्राइवट प्लांट के मालिकों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए किया जा रहा है।
पिछले एक साल में ना ना करते करते 16 से 18 रुपय की वृद्धि रा मटीरीयल के दामों में हुई है और आज भी दामों में वृद्धि रुक नहीं रही है जो की छोटे उद्योगों के लिए बहुत ही भयानक संकेत है।
रा मटीरीयल के दामों में वृद्धि तो होती है पर उद्योगपति जिन प्लांट के ऑर्डर लेते है चाहे वो सरकारी प्लांट हो चाहे प्राइवट वो ऑर्डर देने के बाद अपने दिए हुए ऑर्डर में रेट बढ़ाते नहीं चाहे वो देखते है की रा मटीरीयल के दामों के वृद्धि होते जा रही है और इसपे ना केंद्र सरकार कोई कदम उठाती ना राज्य सरकार।
हमारे प्रधानमंत्री का हमेशा ये कहना रहता है की MSME को बढ़ावा दिया जाए पर अगर यही हाल रहा तो MSME का नामों निशान मिट जाएगा।
अरविन्दर सिंह खुराना ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से MSME को बचाने के लिए उचित कदम उठाने का अनुरोध किया है।
अरविन्दर सिंह ने कहा की जो ये अनचाहे रा मटीरीयल के दामों की वृद्धि हो रही है उसे तत्काल रोका जाए और जो वृद्धि हुई है उसके लिए हर प्लांट को निर्देशित किया जाए की जो ऑर्डर उद्योगपतियों को MSME को दिए गए है और रा मटीरीयल के दाम के वृद्धि के कारण जो नुक़सान हो रहा है उसमें सभी स्टील प्लांट अपने वेंडर्ज़ की मदद करें और उनके ऑर्डर में रेट में वृद्धि दें।
अरविन्दर सिंह खुराना ने केंद्र सरकार से इस कोविड में MSME को राहत के पैकिज भी देने को कहा जैसे 2 महीने की बैंक के क़र्ज़ में ब्याज की छूट, बिजली बिल में छूट और पिछले कोविड लोन को पटाने की अवधि को बढ़ाया जाए। इससे काफ़ी हद तक MSME उद्योग बच पाएँगे।
MSME हर प्लांट के लिए एक रीड की हड्डी की तरह होती है उसे बचाने का केंद्रीय सरकार एवं राज्य सरकार को हर कदम उठाने चाहिए।














