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छोटे उद्योगों की हालत ख़स्ता, छोटे उद्योगों के लिए बहुत तकलीफ़ का समय है : अरविन्दर सिंह खुराना

भिलाई। उद्योगपति एवं अध्यक्ष बीएसपी ऐन्सिलेरी इंडुस्ट्रीज़ एशोसिएशन अरविन्दर सिंह खुराना ने बताया की
पहले कोविड-19 से जूझने के बाद उद्योग वैसे ही खत्म हो रहे थे, उस पर थोड़ा सा उद्योग अपने आप को सम्भाल रहे थे पर पिछले दो महीने में लोहे प्लेट, ऐंगल, चैनल, पिग आइरन और कई रॉ मटेरियल के रेट एक दम से 11 से 12 रुपय के बढ़ने से कई उद्योगों की हालत ख़स्ता हो गयी है। आज से दो महीने पहले प्राइम प्लेट्स का रेट जो 37 से 38 रुपये था वो आज 51 रुपय हो गया, पिंग आइरन 26 रुपय था वो आज 34 से 35 रुपय हो गया। इस कारण उद्योगपतियों को उद्योग चलाने की इच्छा खत्म हो गयी है। कई उद्योगों ने अपने मज़दूरों को बिठा दिया है।
कारण है कि रॉ मटेरियल के रेट तो बढ़ जाते है पर उद्योग जिस किसी का भी वर्क ऑर्डर लेते है चाहे वो सरकारी प्लांट हो, चाहे प्राइवेट प्लांट हो वह अपने वर्क ऑर्डर में रेट नहीं बढ़ाते।
ये आज पहली बार नहीं हुआ पहले भी कई बार हुआ है की रॉ मटेरियल के रेट अनचाहे तरीक़े से बढ़ जाते है पर उद्योगों को उनके प्लांट जिनसे वर्क ऑडर मिलता है वह प्लांट रेट बढ़ाते नहीं जिसके कारण उद्योगपति बहुत परेशान होते है और उनके पास कोई तरीक़ा या रास्ता नहीं रहता या तो वो उन प्लांट के ऑर्डर को पूरा करें और लॉस सहे या उद्योग बंद कर दें या जो उनके ऊपर जो बैंक के क़र्ज़ है उससे हाथ उठा दे। अपने आप को दिवालिया घोषित कर दे क्योंकि वो क़र्ज़ भरने के काबिल ही नहीं रह पाते।
ये सरकार को समझना होगा और इन नितियो पे ध्यान देना चाहिए की रॉ मटेरियल के रेट जो बढ़ते है उनके नियंत्रण रखना चाहिए। क्या कारण है की प्लेट्स, ऐंगल चैनल, जो खुद बीएसपी बनाती है वो एकदम से 12 रुपय रेट्स बढ़ाने पड़ते है। यह कारण आज तक छोटे उद्योगपतियों को समझ नहीं आया। ये समझ आता है की इस तरीक़े जान बूझ कर बड़े उद्योगपतियों जैसे जिंदल, मित्तल, जैसी बड़ी कम्पनियों को बढ़ावा दिया जाता है। जिनको अपना रॉ मटेरियल बेचना होता है और उन्हें मुनाफ़ा भी कई ज्यादा होता है पर इस दौड़ में छोटे उद्योगों को खत्म किया जाता है।
राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार ने MSME को हमेशा बढ़ावा देने की बात कही है पर इन नीतियों पे ध्यान नहीं दिया गया तो MSME या छोटे उद्योग खत्म हो जाएँगे।
अरविन्दर सिंह खुराना ने राज्य एवं केंद्र सरकार से माँग रखी की इन नीतियों पे ध्यान दे और अगर रॉ मटेरियल के रेट बढ़ाए जाते है तो सरकारी प्लांट एवं प्राइवेट प्लांट्स को ये निर्देश दिए जाए की जितना रेट रॉ मटेरियल के बढ़ाए जाते है उतना उनके वर्क ऑर्डर के रेट पे भी ध्यान रखे एवं बढ़ाया जाए ताकी वह उद्योग बंद ना हो या ऐसा कोई तरीक़ा निकाला जाए जिससे उद्योगों को ये मार ना सहनी पड़े।

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