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चैत्र नवरात्रि पहला दिवस: आज ब्रह्म मुहूर्त में करें घट स्थापना, सौभाग्य की देवी मां शैलपुत्री की पुजा से सभी सुख प्राप्त होते हैं

चैत्र नवरात्रि के लिए घटस्थापना 13 अप्रैल को होगी। इसके लिए शुभ मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त) सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक है। हिंदी पंचांग के अनुसार, भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी चैत्र प्रतिपदा से होती है। इसके अलावा चैत्र महीनेसे ही नव संवत्सर की भी शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक अश्विनी नक्षत्र रहेगा, उसके बाद भरणी।

घटस्थापना के दिन शुभ मुहूर्त-

अमृतसिद्धि योग – 13 अप्रैल की सुबह 06 बजकर 11 मिनट से दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक।
सर्वार्थसिद्धि योग – 13 अप्रैल की सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 13 अप्रैल की दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से  दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक।
अमृत काल – सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 08 बजकर 03 मिनट तक।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 35 मिनट से सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन अशुभ मुहूर्त-

राहुकाल – 3:35 PM – 5:09 PM
यम गण्ड – 9:19 AM – 10:53 AM
कुलिक – 12:27 PM – 2:01 PM
दुर्मुहूर्त – 08:42 AM – 09:32 AM, 11:18 PM – 12:04 AM
वर्ज्यम् – 01:08 AM – 02:56 AM

शुभ योग-

विष्कुम्भ – Apr 12 02:27 PM – Apr 13 03:16 PM
प्रीति – Apr 13 03:16 PM – Apr 14 04:15 PM

नवरात्र में प्रथम दिवस मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। मां शैलपुत्री सौभाग्य की देवी हैं। उनकी पूजा से सभी सुख प्राप्त होते हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। माता शैलपुत्री का जन्म शैल या पत्थर से हुआ, इसलिए इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है। मां को वृषारूढ़ा, उमा नाम से भी जाना जाता है। उपनिषदों में मां को हेमवती भी कहा गया है। मां शैलपुत्री की विधिवत आराधना से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और घर में खुशहाली, संपन्नता आती है। मां शैलपुत्री की उपासना से मूलाधार चक्र जागृत होता है जो अत्यंत शुभ होता है। बैल पर सवार मां शैलपुत्री का रूप अद्भुत है। मां की छवि आनंदमयी है। मां की सौम्य छवि भगवान शिव को प्रसन्नता प्रदान करती है। माता दाहिनी हाथ में सदैव त्रिशूल धारण करती हैं। उनके बाएं हाथ में कमल का फूल है जो शांति तथा ज्ञान का प्रतीक है। माता शैलपुत्री की विधिवत उपासना से चन्द्रमा से जुड़े सभी प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मां को सफेद मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद बांटें और मां की सच्चे मन से उपासना करें। मां को गाय का घी या उससे बने पदार्थों का भोग लगाएं। मां की आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त किए जा सकते हैं।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। साभार:हिंदुस्तान

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