चंद्र ग्रहण 2025 के दौरान देशभर में ‘ब्लड मून’ देखा गया। ग्रहण के दौरान चांद पर पृथ्वी की छाया 3 घंटे से अधिक समय तक रही। अलग-अलग शहरों में लोग इस खगोलीय घटना के साक्षी बने। रक्तिम चंद्रमा की छवि को लोगों ने अपने कैमरे में भी कैद किया…
नईदिल्ली (ए)। खगोलीय घटनाओं को वैज्ञानिक नजरिए से देखने-समझने का अभ्यास करने वाले लोगों के लिए चंद्र ग्रहण धर्म से इतर भी गूढ़ अर्थ रखता है। आज साल 2025 के अंतिम चंद्र ग्रहण के दौरान देशभर में ‘ब्लड मून’ देखा गया। लगभग तीन साढ़े घंटे से अधिक समय तक चांद पर धरती की छाया पड़ती रही। चंद्रग्रहण की पूरी अवधि में पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच रही और चांद पर सूर्य का प्रकाश सीधे नहीं पड़ा। देशभर से इस खगोलीय घटना की तस्वीरें सामने आई हैं। दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और चेन्नई जैसे शहरों से चांद और ‘ब्लड मून’ की अलग-अलग छवियां सामने आईं।
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण नई दिल्ली, मुम्बई, अहमदाबाद, जयपुर, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ समेत भारत के कई शहरों में देखा गया। अब इसके बाद सूर्य ग्रहण लगेगा। बता दें साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को पितृ पक्ष के आखिरी दिन लगेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण के प्रभाव से नकारात्मकता बहुत अधिक बढ़ जाती है इसलिए ग्रहण के बाद आपको कुछ उपाय जरूर करने चाहिए। जानिए चंद्र ग्रहण के बाद क्या करना चाहिए।
ग्रहण की समाप्ति पर क्या करें?
- चंद्रग्रहण के बाद आपको अपने घर में गंगाजल का छिड़काव अवश्य करना चाहिए। अगर गंगाजल न हो तो गोमूत्र का प्रयोग भी आप कर सकते हैं।
- ग्रहण खत्म होने के बाद आपको स्नान अवश्य करना चाहिए।
- घर के पूजा स्थल को भी ग्रहण के बाद शुद्ध अवश्य करें, यहां आप गंगाजल का छिड़काव कर सकते हैं।
- धार्मिक मतानुसार, ग्रहण के बाद किया गया दान आपके पितरों और ईश्वर को प्रसन्न करता है। इसलिए ग्रहण के बाद दान जरूर करें।
खबरों के मुताबिक दुनिया के लगभग 77 फीसदी हिस्से में चंद्रग्रहण देखा गया। भारत समेत ब्रिटेन, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये जैसे देशों में भी चंद्रग्रहण देखा गया। लाखों खगोल विज्ञान प्रेमियों ने चांद पर पड़ती धरती की छाया को देखा और सौरमंडल की अनोखी घटना के साक्षी बने।
भारत में करीब साढ़े तीन घंटे बाद चांद धरती की छाया से मुक्त हुआ। वहीं थाईलैंड, चीन, हांगकांग, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लोगों ने टेलिस्कोप और अन्य वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से चांद को कई मिनटों तक निहारते रहे।
वैज्ञानिकों के मुताबिक एशिया और ऑस्ट्रेलिया से देखने वालों के लिए यह सबसे अच्छा अनुभव रहा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि चंद्र ग्रहण चंद्रमा के पेरिगी पर पहुंचने से ठीक 2.7 दिन पहले होने के कारण खास रहा। इस कारण चांद अपने सामान्य आकार से थोड़ा बड़ा दिखाई दिया। पेरिगी कक्षा की उस बिंदु को कहते हैं जहां पहुंचने के बाद चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब आ जाता है।
खगोल विज्ञान के जानकारों के मुताबिक यूरोप और अफ्रीका में चंद्रोदय के समय चंद्र ग्रहण देखा गया। इस दौरान क्षितिज का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए ये अवसर बेहद खास साबित हुआ।
















