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गौठानों में गोबर से 2.74 लाख लीटर प्राकृतिक पेंट उत्पादित, विक्रय से 4.34 करोड़ रुपए का हुआ आय

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप राज्य में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए स्थापित गौठान तेजी से ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित होने लगे हैं। गौठानों में विविध आयमूलक गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ नवाचार के रूप में गोबर से प्राकृतिक पेंट का उत्पादन तेजी से होने लगा है। वर्तमान में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए 51 यूनिटें स्थापित की जा चुकी है, जिसमें से 47 यूनिटों में गोबर से प्राकृतिक पेंट उत्पादन का काम शुरू हो गया है।

क्रियाशील यूनिटों के माध्यम से अब तक 2,74,313 लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 2,10,843 लीटर प्राकृतिक पेंट के विक्रय से 4 करोड़ 34 लाख 79 हजार रूपए की आय हुई है। राज्य में फिलहाल 64 प्राकृतिक पेंट की इकाईयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 51 यूनिट स्थापित हो चुकी है, जबकि 47 इकाईयों में पेंट उत्पादन किया जा रहा है। निर्माणाधीन 13 पेंट यूनिटों की स्थापना का कार्य अंतिम चरण में है।

गौठानों में 8.57 लाख रुपये का गौमूत्र क्रय गौमूत्र से बन रहा है जैविक कीटनाशक एवं जीवामृत गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में गोबर खरीदी के साथ-साथ 4 रूपए लीटर की दर से गोमूत्र की खरीदी की जा रही है। गौठानों में अब तक 8 लाख 57 हजार 88 रूपए में 2 लाख 14 हजार 272 लीटर गौमूत्र क्रय किया जा चुका है।

जिससे महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 91,630 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और 34,590 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत का उत्पादन किया जा चुका है, जिसका विक्रय किया जा रहा है। इससे राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। राज्य के किसानों द्वारा अब तक 88,227 लीटर जैविक कीटनाशक ब्रम्हास्त्र और 32,765 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत क्रय कर खेती में उपयोग किया गया है।

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