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दुर्ग-भिलाई

गर्मी में तिलहन फसल से किसानों के घर में आयी खुशियों की बयार, इस बार 5 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया सरसों..


दुर्ग। धमधा ब्लाक का गांव मेड़ेसरा आधुनिक खेती का प्रतीक बन गया है। यहां रबी फसल में मेड़ों पर अरहर नजर आ रही है और सरसों के फूलों से खेत लहलहा रहे हैं। कृषि वैविध्य यहां की विशेषता है। धनिया बोया गया है और कतार रूप में बोया गया है जिससे इसका उत्पादन अधिक होगा। दूर तक उड़द और तिलहन की फसलों को देख और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग होने की वजह से पूरा गांव आधुनिक खेती का प्रतीक बन गया है। किसान और कृषि कार्य का संबंध मुनाफे या घाटे के सौदे के संशय के साथ भविष्य की गर्त में छुपा होता है। किसान के हाथ केवल मेहनत ही होती है। समय में सही और अच्छी फसल हो जाए, तो ठीक है, नहीं तो मेहनत के साथ लगाए गए सारे उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। किसान बेबस अपनी किस्मत को कोसने के सिवाय कुछ कर भी नही सकता। कृषि कार्य के लिए समय-प्रबंधन के साथ ही सही समय पर जोताई, बोआई, खाद-बीज के साथ साथ प्रतिकूल मौसम में इससे रक्षा करना भी एक तरह से चुनौती और जिम्मेदारी भरा सफरनामा होता है। किसान का जीवन भविष्य के गर्त में कैद रहता है, अच्छी फसल होने पर मेहनत का ईनाम मिल जाता है, नहीं तो उम्मीदों पर पानी फिर जाने से बेबसी की मार स्वीकार कर जीवन की बाग-डोर को खींचने को मजबूर होना पड़ता है। किसान और कृषि के क्षेत्र में आज की परिस्थिति में बदलाव की बड़ी जरूरत व आवश्यकता है। इसके बिना आज के समय में कृषि को फायदे का जरिया नही बनाया जा सकता। परम्परागत तरीके से कृषि का कार्य कर रहे किसान अब आधुनिक तकनीक की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।
फसल वैविध्य और आधुनिक तरीके से कर रहे खेती-
धमधा के ग्राम पंचायत मेडे़सरा के किसानो ने परम्परागत कृषि को छोड़कर उन्नत तकनीक अपना कर कृषि को विकास और फायदे का व्यवसाय बनाने में कामयाबी हासिल की है। यह गांव इस वर्ष क्षेत्र के अन्य गांवों के किसानों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। खरीफ की तरह ही रबी में भी हरियाली और वैविध्य नजर आ रहा है। आज नजर उठाकर देखने पर चारों तरफ दलहन- तिलहन फसल के साथ ही धनिया और उड़द की फसल झलक रही है। यहां सभी प्रकार की फसलों की खेती उन्न्त और नई तकनीक के जरिये की जा रही है। तिलहनी फसलो को पहली बार विशेष महत्व दिया गया है। कृषि विस्तार अधिकारी हंसा साहू ने बताया कि 121 हेक्टेयर क्षेत्र में चना की खेती और लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी अरहर लगाया गया है। पहली बार 5 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती की गई है। साथ ही बड़े क्षेत्र में धनिया की खेती की गई है। कई किसानों ने उडद लगाया है। रबी क्राप में कतार बोनी की गई है। मेड़ेसरा के किसान काफी आधुनिक हैं। यहां धान फसल में ट्रांसप्लांटर मशीन से रोपाई की गई है। जिससे समय और लागत दोनो की बचत के साथ ही इस पद्वति से उत्पादन भी ज्यादा होता है। कृषि विभाग की अधिकारियों के सलाहनुसार समय-प्रबंधन कर सिंचाई, खाद-दवाई का उपयोग किया जा रहा है। विभाग द्वारा उन्न्त बीज प्रदाय किया गया है किसान फसल अवशेष को ना जलाकर इसें सड़ाकर खाद के रूप में उपयोग कर रहे हैं।
शासन की किसान हितैषी योजनाओं और नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना से किसानो के अरमान हो रहे साकार-
किसानों का कहना है कि वे वर्षो से खेती- किसानी का काम करते आ रहे हैं। इस बार गांव में रबी सीजन की हरियाली भी खरीफ से कम नहीं है। किसानों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना का सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। हमारे गांव का नाला गर्मी लगते ही सूख जाता था, इस साला नाला बंधान होने से नाले में प्रर्याप्त मात्रा में पानी का ठहराव संभव हो सका है, जिससे फसल लेना आसान हुआ है।रबी सीजन में दलहन-तिलहन की फसल होने से किसान इसे अपने आय के लिए कारगार मान रहे है।

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