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खुद पर विश्वास के साथ तैयारी करते रहो तो जरूर कामयाबी मिलेगी, चाहे वो परीक्षा हो या जिंदगी : जितेन्द्र यादव

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। गावं की मूलभूत सुविधाएं का क्रियान्वयन जिला प्रशासन के हाथों में होता है, जो मैं बचपन से देखता आ रहा हूं और वही से मोटिवेशन मिला कि अगर जिला प्रशासन के प्रयास से ही विकास की डोर आखरी व्यक्ति तक पहुंचाई जा सकती है तब मैंने निश्चित किया की था कि मैं भी आईएएस बनूंगा और देश की सेवा करूंगा। अपनी योग्यता और क्षमता को समाज और देश की उन्नति में लगाऊंगा। यह सब बातें दुर्ग जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर पदस्थ युवा आईएएस जितेन्द्र यादव ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने आईएएस बनने तक के सफर को हमसे साझा किया।आईएएस जितेन्द्र यादव मूलत: हरियाणा के है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा करनावास, जिला रेवाड़ी (हरियाणा) के शासकीय स्कूल में पूरी हुई। हायरसेकंडरी की शिक्षा इन्होंने महेंद्रगढ़ होस्टल, शिक्षा निकेतन से किया। एनआईटी कुरुक्षेत्र से वर्ष 2013 में इन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकॉम्युनिकेशन में स्नातक किया। स्तानक की शिक्षा पूर्ण करते ही इन्हें दूरसंचार कम्पनी आइडिया में बतौर असिस्टेंट मैनेजर के पद पर वर्ष 2013-14 में जॉब किया लेकिन यूपीएससी की तैयारियों के लिए इन्होंने जॉब छोड़ दिया और तैयारियो में जुट गए। वर्ष 2015 के यूपीएससी में इन्होंने भाग लिया और इंटरव्यू तक पहुंचे। वर्ष 2016 में इनका चयन स्टॉफ  सलेक्शन कमीशन के जरिये केन्द्रीय सचिवालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पद पर हुआ इसके साथ ही इसी वर्ष इनका चयन आईपीएस के लिए हुआ। आईपीएस में इन्हें हिमाचल प्रदेश कैडर मिला और इन्होंने आईपीएस की ट्रेनिंग शुरू कर दी। ट्रेनिंग कंपलीट होते ही वर्ष 2018 के यूपीएससी में इनका चयन आईएएस के लिए हुआ। आईएएस की ट्रेनिंग के बाद मई 2020 से यह दुर्ग जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर पदस्थ है। आईएएस जितेन्द्र यादव के पिता एयरफोर्स से रिटार्यड है, इनकी माता एक गृहणी है तथा इनकी एक बड़ी बहन है। आईएएस जितेन्द्र यादव स्कूल के दिनों में खो-खो, क्रिकेट खेलो में जिलास्तरीय स्तर पर अनेकों प्राइज जीत चुके है। अपने फिटनेस को लेकर यह विशेष ध्यान रखते है।क्रिकेट खेलने, रनिंग और किताब पढऩे में विशेष रुचि रखने वाले आईएएस जितेन्द्र यादव अपनी माता को अपना आदर्श मानते है। इन्होंने बताया कि इनकी माता के विचार इन्हें मोटीवेट करती है, मैं जब भी परेशान होता हु तब उनकी तरफ  देखता हूं। यूपीएससी की तैयारी करने वाले युवाओं से आईएएस जितेन्द्र यादव ने कहा है कि जैसे मेरे जानने वालों में कोई भी यूपीएससी की तैयारी करने वाला नही था, तो पता लगाना मुश्किल होता है कि कैसे तैयारी करना है और क्या पढऩा है। इस परेशानी की समस्या आज सॉल्व हो गई है, अब ऑनलाइन हम अपने गांव में भी पढ़ कर तैयारी कर सकते है। कोचिंग के लिए दिल्ली जाने की जरूरत नही है, इंटरनेट के माध्यम से भी बहुत कुछ तैयारी की जा सकती है। ऐसा जरूरी नही है कि आप अपने पहले ही प्रयास में सफल हो जाये लेकिन अगर आप खुद पर विश्वास के साथ तैयारी करते रहो तो जरूर कामयाबी मिलेगी, चाहे वो परीक्षा हो या जिंदगी। आईएएस जितेन्द्र यादव ने कहा कि दुर्ग जिले में रहकर कलेक्टर डॉ भूरे सर के साथ बहुत कुछ सीखने का मौका मिल रहा है, जो मुझे भविष्य में बहुत काम आएंगे। मैं   अपने प्रशिक्षण में ज्यादा से ज्यादा सीखने की कोशिश कर रहा  हु ताकि आगे मुझे जो भी जिम्मेदारियां दी जाएगी उसे मैं अच्छे से निभा सकू।

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