टीबी संबंधी अज्ञानता को देखते हुए जागरूकता के स्तर को बढ़ाने में मीडिया की भूमिका अति महत्वपूर्ण है…
भिलाई। गुरुवार को भिलाई के होटल सेंट्रल पार्क में रीच एनजीओ द्वारा जिला टीबी (क्षय रोग) सेल के साथ साझेदारी में आयोजित “टीबी पर पत्रकारिता” विषय पर एक मीडिया राउण्ड टेबल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारत और छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में टीबी की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए किया गया था। राउंड टेबल कार्यक्रम में पत्रकारों को जानकारी देते हुए दुर्ग जिला टीवी अधिकारी डॉक्टर अनिल शुक्ला ने बताया कि टीबी को समाप्त करने के लिए, हमें इस बीमारी को सिर्फ बीमारी के रूप में देखना होगा। सरकार के द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बावजूद टीबी के बारे में अभी भी बहुत भ्रांतियां हैं। इन्हें हटाने के लिए टीबी पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी जरुरी है।
इस संबंध में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पुनः जिला क्षय अधिकारी ने कहा कि जन सामान्य में टीबी संबंधी अज्ञानता को देखते हुए जागरूकता के स्तर को बढ़ाने में मीडिया की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। यह आवश्यक है कि टीबी के लक्षण, निदान, उपचार और टीबी मरीजों से होने वाले भेद-भाव को रोकने की आवश्यकता के बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मीडिया ने एचआईवी/एड्स और पोलियो संबंधी राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफल बनाने में मदद की है और अब टीबी के प्रति समान प्रतिबद्धता के साथ, राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2017-25) के अंतर्गत 2025 तक टीबी को समाप्त करने के लक्ष्य के प्राप्ति की परिकल्पना कर पाना सम्भव होगा। राउंड टेबल कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारों को टीबी पर ताजा जानकारी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और भारत में टीबी की परिस्थिति के आंकड़ों और नवाचारों के बारे में जानकारी प्रदान करना था।
फिडियस केरकेट्टा, स्टेट ऑपरेशंस लीड रीच, ALLIES प्रोजेक्ट, इस राउंड टेबल कार्यक्रम में मीडिया की भूमिका विषय पर अपनी बात रखते हुए बताया कि टीबी जैसे स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर ज़िम्मेदार और नीतिकारक पत्रकारिता बेहद ज़रूरी है ताकि पढ़ने वालों को सही जानकारी मिले। टीबी पर रिपोर्टिंग ज़िम्मेदार तरीके से करने से रूढ़िवादी सोच (स्टीरियोटाइप) का अंत करने और लोगों तक सही और वास्तववादी सन्देश पहुँचाने में मदद होती है। इस दस्तावेज़ में कई ज़रूरी पहलू बताये गए हैं जो टीबी पर रिपोर्टिंग करते समय ध्यान में रखने चाहिए।

उन्होंने कहा कि टीबी एक जटिल बीमारी है। इस रोग के पहलुओं पर रिपोर्टिंग करते वक़्त केवल पॉजिटिव केसों के आंकड़ों पर या टीबी से जुड़ी मृत्युओं के साथ-साथ सामाजिक, चिकित्सकीय, निजी या विज्ञान सम्बंधित, आर्थिक, शैक्षिक, राजनैतिक और बाकी सभी पहलुओं पर छानबीन करने की कोशिश कीजिये। यह ज़रूरी नहीं कि टीबी पर हर कहानी हमेशा दुखद हो। कुछ आशावादी केस स्टडीज़ या सरकारी या गैर-सरकारी (एन.जी.ओ) संस्थाओं द्वारा किये गए प्रयासों पर प्रकाश डालना भी अच्छा होता है। डॉक्टर सानू नायक ने भी अपने क्षय रोग पर अपने अनुभव साझा किए। चर्चा के दौरान दीपक सिंह- दुर्ग जिला हेड, पीपीएम कोर्डिनेटर विमल वर्मा, टीवी चैंपियन संजना प्रजापति, हिमानी वर्मा और पत्रकार मौजूद थे।

जानिए टीबी के बारे मे बुनियादी विज्ञान
1. क्षय रोग या टीबी क्या है?
टीबी एक संक्रामक रोग है जो ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ नामक जीवाणु से होता हैं। टीबी ज्यादातर फेफड़ों को प्रभावित करता है (जो कि पल्मनरी टीबी का कारण बनता है) और कई बार हड्डियों और जोड़ों, गुर्दे, मस्तिष्क, जननांगों, मूत्र पथ, रीढ़, लसीका तंत्र, आंतों आदि सहित अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। टीबी जब फेफड़ों के अलावा किसी अन्य अंग को प्रभावित करता है, तो इसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं।
2. टीबी किस प्रकार फैलती है?
टीबी हवा से फैलता है। जब पल्मनरी टीबी से प्रभावित कोई व्यक्ति खांसता, थूकता, या छींकता है, तो मुख से सूक्ष्म बूँदें टीबी के कीटाणु के साथ हवा में निष्कासित हो जाते हैं।
जब भी कोई व्यक्ति इन बूंदों को श्वास के माध्यम से अंदर लेता है, उनमें सक्रिय टीबी संक्रमण विकसित हो सकता है।
3. टीबी से कौन प्रभावित हो सकता है?
चूंकि टीबी एक हवा से फैलने वाली बीमारी है, इसलिए जो कोई भी टीबी बैक्टीरिया को सांस से अंदर लेता है, वह टीबी से संक्रमित हो सकता है। यह किसी भी आयु, वर्ग या आर्थिक तबके के लोगों को प्रभावित कर सकता है।
4. सांस के द्वारा लिए गए बैक्टीरिया दूसरे अंगों में कैसे फैलते हैं और एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का कारण बनते हैं?
जब कोई टीबी के बैक्टीरिया को सांस से अंदर लेता है, तो यह फेफड़ों में जमा हो जाता है और पल्मोनरी टीबी का कारण बन सकता है। यह रक्त प्रवाह और लसीका प्रणाली के माध्यम से अन्य अंगों में भी फैल सकता है और शरीर के जिस भी हिस्से में बसता है, उसमें संक्रमण फैला सकता है।
5. टीबी रोग और टीबी संक्रमण में क्या अंतर है?
अक्सर हमारी जानकारी के बगैर भी टीबी के जीवाणु हमारे अंदर आ जाते हैं। इसे टीबी संक्रमण कहते हैं। जिनके अंदर टीबी के जीवाणु होते हैं, वो सभी लोग बीमार नहीं होते है।
ज्यादातर लोगों में अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता इस जीवाणु को नियंत्रण में रखती है। जिन व्यक्तियों के शरीर में टीबी का जीवाणु प्रवेश कर चुका होता है, उनमें से केवल 10% लोगों
को उनके जीवन काल में टीबी होने का खतरा बना रहता है।















