BREAKING

छत्तीसगढ़फीचर्डसाक्षात्कार

क्राईम और साइबर क्राईम पर मेरा मैक्सिमम फोकस रहा है, इसको डिटेक्ट करना मेरी प्राथमिकता रहती है : अभिषेक  माहेश्वरी

रायपुर (सारनाथ एक्सप्रेस)। मैं एक बिज़नेस फैमिली  बैक्ग्राउंड  से हूं, जब मैंने दसवीं का एग्जाम पास किया तब से मैं अपने पापा के साथ दुकान में बैठने लगा था। दुकान पर जब कोई गवर्मेंट ऑफिसर आ जाता था तब परिवार के लोग उनका बहुत ही रेस्पेक्ट करते थे, गवर्मेंट ऑफिसर के पॉवर और पर्सनालिटी को देखा तब मुझे लगा कि इस फील्ड में जाना चाहिए, गवन्र्मेंट जॉब में रहकर ही मैं समाज लिए कुछ कर पाऊँगा। मैंने अपने पापा से कहा कि मुझे बिजनेस नही करना है, मुझे दो-तीन साल के लिए फ्री कर दे मैं कॉम्पटीशन एग्जाम की तैयारी करूंगा। मैं अपने परिवार का पहला व्यक्ति हूं जो गवर्मेंट जॉब में हूँ। यह सब बातें रायपुर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (क्राइम) और सहायक पुलिस महानिरीक्षक (गुप्तवार्ता) अभिषेक माहेश्वरी ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
अभिषेक माहेश्वरी की प्रारंभिक और हाई स्कूल तक कि शिक्षा चैतन्य विद्या पीठ डोंगरगांव (राजनांदगांव) में हुई। इन्होंने कक्षा ग्यारहवीं शासकीय विद्यालय, डोंगरगांव तथा हायरसेकंडरी की शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, डोंगरगांव से पूरी की।
वर्ष 2008 में इन्होंने शासकीय भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय, डोंगरगांव से कामर्स विषय मे स्नातक की डिग्री हासिल किया। स्नातक के साथ-साथ इन्होंने चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) की कोचिंग भिलाई में किया। इन्होंने सीए फांउडेशन की परीक्षा उत्तीर्ण किया तथा सीए इंटर कर रहे थे इसी दौरान इन्होंने वर्ष 2008 के सीजीपीएससी तथा वर्ष 2009 में स्टॉफ सेलेक्शन कमीशन (एसएससी) द्वारा आयोजित कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की प्रतियोगी परीक्षा में भाग लिया और वर्ष 2010 में जारी रिजल्ट में इनका चयन सहायक ऑडिट ऑफिसर के पद पर हुआ। इसके बाद इन्होंने चार्टेड एकाउंटेंट करना छोड़ दिया। वर्ष 2010 से 2013 तक इन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र के इस्पात भवन में सहायक ऑडिट ऑफिसर के पद पर पदस्थ रहे तथा भिलाई स्टील प्लांट, एफएसएनएल तथा एनएचपीसीएल की ऑडिट का काम किया।
वर्ष 2008 के सीजीपीएससी में इन्होंने प्री एग्जाम क्लीयर किया लेकिन न्यायालय द्वारा स्टे लगाने के कारण मेंस की परीक्षा 2012 में हुई जिसमें इनका चयन उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के लिए हुआ। सीजीपीएससी में चयन होने के बाद इन्होंने सहायक ऑडिट ऑफिसर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
सितंबर 2013 में डीएसपी ट्रेनिंग के लिए यह पुलिस एकेडमी, चंदखुरी गये तथा अ_ारह माह की ट्रेनिंग के बाद इन्हें अप्रैल 2015 में प्रशिक्षु डीएसपी बालोद के पद पर भेजा गया, जहां यह वर्ष 2016 तक पदस्थ रहे। ट्रेनिंग के दौरान इन्होंने इन्वेस्टीगेशन के पेपर में टॉप किया तथा पासिंग आउट होने पर पुलिस एकेडमी द्वारा इन्हें मैडल देकर सम्मानित किया गया।
बालोद पोस्टिंग के दौरान एसडीओपी गुण्डरदेही, डीएसपी क्राइम के चार्ज में रहे। रेग्युलर पोस्टिंग में इनकी पहली पोस्टिंग एसडीओपी अंबागढ़ चौकी के पद पर जुलाई 2016 में हुई, जहां इन्होंने मार्च 2018 तक अपनी सेवाएं दी। मार्च 2018 में इन्हें रायपुर क्राइम डीएसपी कि जिम्मेदारी दी गई। दिसम्बर 2018 में क्राइम ब्रांच भंग होने पर इन्होंने कुछ समय राजधानी में सीएसपी सिविल लाइंस, सीएसपी गंज की जि़म्मेदारी सम्भाली। मई 2019 से जून 2020 तक सीएसपी उरला के पद पर एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। सीएसपी उरला रहते हुए वे डीएसपी साइबर चार्ज में भी रहे। जून 2020 में सरकार ने इन्हें प्रमोट कर एएसपी (क्राइम) और एआईजी (इंटेलिजेंस) की दोहरी जिम्मेदारी दी है जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है। क्राइम और साइबर पर विशेष काम करने और इनकी काबलियत का असर यह रहा कि यह जहां भी पदस्थ रहे वहाँ क्राइम के क्षेत्र में अच्छा काम किया।
बुक्स पढऩे, हॉलीवुड मूवी देखने, वेबसिरिज देखने मे विशेष रुचि रखने वाले अभिषेक महेश्वरी अपने माता-पिता को अपना आदर्श मानते है। इन्होंने बताया कि सेल टैक्स के असिस्टेंट कमिश्नर विकास गोस्वामी से मैंने कॉम्पटीटिव एग्जाम की तैयारी हेतु प्रारंभ में मार्गदर्शन लिया था और तैयारी प्रारंभ किया और अपने पहले ही प्रयास में सफल रहा जबकि मैंने कभी इसकी कोचिंग नही की। अपने कोचिंग कर रहे दोस्तों से बुक्स और इग्ज़ाम के रीसेंट ट्रेंड के बारे में जानकारी प्राप्त किया और मैं वैसे ही तैयारी करता गया।
तीन साल सेंट्रल गवर्मेंट और सात साल स्टेट गवर्मेंट में जॉब करते हो गया है। करीब 500 से ज्यादा क्राइम के केस को सॉल्व करने में सफलता मिली है। व्यवसायी प्रवीण सोमानी अपहरण कांड केस अब तक सबसे बड़ा चैलेंजिंग केस रहा। इसमें मैं स्वयं पांच दिन बिहार और तीन दिन उत्तरप्रदेश में रहा। प्रवीण सोमानी का परिवार मेरे पूर्व परिचित के है जिसके कारण उनके परिजन मुझसे लगातार संपर्क में रहे। हर छोटी-छोटी चीजो को पूछते, उस दौरान उनको मैने बहुत हिम्मत बंधाया और केस को सॉल्व करने में बहुत मेहनत किया। एआईजी इंटेलिजेंस की नयी जिम्मेदारी मुझे मिली है जो कि मेरे लिए नया काम है। यहां मुझे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। मेरा मैक्सिमम फोकस क्राइम और साइबर क्राइम की घटनाओं पर रहा है, उसको डिटेक्ट करना मेरी प्राथमिकता रहती है। प्रशिक्षण लेकर सायबर फील्ड पर और आगे बढऩा है।

Related Posts