इस मामले पर चिकित्सा बिरादरी की प्रतिक्रिया जानने से पहले जान लेते हैं कि आखिर हिप्पोक्रेटिक और चरक शपथ है क्या?
नईदिल्ली (ए)। भारत के शीर्ष चिकित्सा शिक्षा नियामक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने 14 फरवरी से शुरू होने वाले मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के ग्रेजुएशन समारोह के दौरान ग्रीक मूल की सदियों पुरानी परंपरा, हिप्पोक्रेटिक शपथ (Hippocratic oath) को ‘चरक शपथ’ (Charak Shapath) से बदलने का सुझाव दिया है। इस फैसले पर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा के अनुसार, “मैं चरक शपथ के पक्ष में जाऊंगा और सभी को इसका पालन करना चाहिए। एम्स भी चरक शपथ का पालन करता है।” इस मामले पर चिकित्सा बिरादरी की प्रतिक्रिया जानने से पहले जान लेते हैं कि आखिर हिप्पोक्रेटिक और चरक शपथ है क्या?
क्या है हिप्पोक्रेटिक शपथ? हिप्पोक्रेटिक शपथ ऐतिहासिक रूप से चिकित्सकों द्वारा ली गई नैतिकता की शपथ होती है। यह यूनानी चिकित्सा ग्रंथों में सबसे व्यापक रूप से जानी जाने वाली शपथ है। माना जाता है कि यह शपथ प्राचीन यूनान के एक प्रमुख विद्वान हिपोक्रेटिस या बुकरात द्वारा लिखी गई थी। ऐसा माना जाता है कि इन्होने मानव रोगों पर सबसे प्रथम ग्रन्थ लिखा। इन्हे चिकीत्साशास्त्र का जनक भी कहते हैं। शपथ में डॉक्टरों को खुद से पहले मरीज के बारे में सोचने और कार्य करने के लिए बाध्य करने के बारे में लिखा गया है। केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लगभग सभी मेडिकल कॉलेज में किसी न किसी तरह की शपथ दिलाई जाती है जिनमें हिप्पोक्रेटिक शपथ प्रमुख है।
हिप्पोक्रेटिक शपथ इस प्रकार शुरू होती है- “मैं अपोलो वैद्य, अस्क्लीपिअस, ईयईआ, पानाकीआ और सारे देवी-देवताओं की कसम खाता हूँ और उन्हें हाजिर-नाजिर मानकर कहता हूँ कि मैं अपनी योग्यता और परख-शक्ति के अनुसार इस शपथ को पूरा करूँगा।” इस लंबी शपथ के अंत में लिखा है, “अगर मैंने कभी यह शपथ तोड़ी और झूठा साबित हुआ, तो इस दुआ का बिलकुल उल्टा असर मुझ पर हो।”
क्या है चरक शपथ? एम्स के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. अमित मालवीय के मुताबिक चरक शपथ बुनियादी चिकित्सा नैतिकता के संदर्भ में हिप्पोक्रेटिक शपथ के समान ही है। दोनों ही शपथ नए मेडिकल छात्रों को चिकित्सा नैतिकता से परिचित कराने का एक तरीका हैं। हिप्पोक्रेटिक शपथ को एक संक्षिप्त संस्करण के रूप में माना जा सकता है, जबकि चरक शपथ एक विस्तृत संस्करण है। चरक शपथ, प्राचीन भारतीय चिकित्सा के दो मूलभूत संस्कृत ग्रंथों में से एक, चरक संहिता में वर्णित एक प्रतिज्ञा है। नई शपथ महर्षि चरक के सम्मान में है, जिन्हें आयुर्वेद के प्राचीन विज्ञान और चिकित्सा ग्रंथ ‘चरक संहिता’ के लेखक के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक माना जाता है।















