अक्टूबर में ड्रग नियंत्रक ने देशभर में 34 सैंपल लिए थे, इनमें हिमाचल में बनीं 14 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। झाड़माजरी की डॉक्सीन कंपनी की टॉन्सिल की दवा सेपकेम, सोलन के चिरोस फार्मा की जीवाणू संक्रमण की दवा सेफोप्रोक्स, भटोली कलां की टास मेड कंपनी की मिर्गी की दवा डिवालप्रोक्स के तीन सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए हैं। इस लिस्ट में कई और नाम शामिल हैं…
नईदिल्ली (ए)। देश में 90 दवाइयां मानकों पर सही नहीं पाई गई हैं। इनमें से 38 दवाएं हिमाचल में बनीं हैं। राज्य ड्रग नियंत्रक और केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन की ओर से दवाओं के सैंपल लिए गए थे। उधर, राज्य ड्रग नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि दवाएं मानकों पर सही न पाए जाने पर कंपनियों को नाेटिस जारी कर लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, दवाओं का स्टॉक भी वापस मंगवाया गया है।















