लखनऊ (ए)। उत्तर प्रदेश के साढ़े पांच लाख गरीबों का अपने घर का सपना बुधवार को पूरा हो गया। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के इन लाभार्थियों के गृह प्रवेश कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने लाभार्थियों को घर की चाबी सौंपी। सीएम 5 कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास से इस कार्यक्रम से जुड़े।
इन दोनों योजनाओं के तहत बनाए गए 5.51 लाख आवासों की कुल लागत 6637.72 करोड़ रुपये है। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए लाभार्थियों से संवाद भी किया। उन्होंने अपना घर बनने पर लाभार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
लाभार्थियों से संवाद के दौरान सीएम योगी ने कहा कि जब अच्छी सरकार आती है तो सभी को सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के मिलता है। देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले भी कई प्रधानमंत्री बने लेकिन तब गरीबों को मुफ्त आवास की सुविधा नहीं मिल पाती थी। घरों में शौचालय की व्यवस्था नहीं थी। इसके कारण बीमारियां फैलती थीं।
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की सूचनाएं रोज आती थीं। लेकिन आज इन योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ‘हर गरीब का घर हो अपना’, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है। यह उत्तर प्रदेश में साकार होता दिख रहा है। प्रदेश में चार वर्ष के दौरान ही 41 लाख 73 हजार से अधिक लाभार्थियों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपना आवास मिला है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के पहले की सरकारों के एजेंडे में गरीब नहीं होता था। देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद गरीब, गांव, किसान, महिलाओं और नौजवानों को बिना किसी भेदभाव के सरकार की योजनाओं से जोड़ा गया।
जो विकास पहले जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाई-भतीजावाद खा जाता था, आज हर गरीब को उसका लाभ मिल रहा है। गरीबों के लिए आवास योजना इसी विकास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह बहुत की खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की 70 फीसद लाभार्थी महिलाएं हैं।
आठ साल तक नोएडा प्राधिकरण में तैनात अधिकारियों की होगी जांच, बनी स्पेशल टीम
सुपरटेक एमरॉल्ड मामले में अब नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। 2004 से 2012 तक तैनात रहकर नियमों को नहीं मानने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बिल्डर के खिलाफ भी प्राधिकरण कार्रवाई करेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के निर्देश दिए। शासन स्तर पर विशेष जांच समिति गठित की। उक्त प्रकरण की गहन जांच कराकर दोषी अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई कर आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
बिल्डर को जमीन का आवंटन करने से लेकर उसके नक्शे पास कराने तक का काम नोएडा प्राधिकरण के ग्रुप हाउसिंग व नियेाजन विभाग करते हैं। इस मामले में भी नियोजन विभाग में रिवाइज्ड नक्शे को अनुमति देने से लेकर कई बिंदुओं पर बिल्डर का साथ दिया। आरडब्ल्यूए वालों की नोएडा प्राधिकरण ने सुनवाई नहीं की। अब सुपरेटक एमरॉल्ड के संबंधित दोनों टावर गिराने का आदेश मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया। इन दोनों टावर के बनने के लिए बिल्डर के साथ-साथ नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने इनको बनाने की अनुमति दी। ऐसे में इनके खिलाफ भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
अधिकारिक सूत्रों की मानें तो मंगलवार को कोर्ट का आदेश आते ही उस समय तैनात रहे संबंधित अधिकारियों की सूची नोएडा प्राधिकरण में बननी शुरू हो गई है। इनकी विभागीय जांच के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश सरकार को संबंधित अधिकारियों को सूची भेज कार्रवाई की जाएगी।
आरडब्ल्यूए को संधोशित नक्शा देने से मना किया
नोएडा प्राधिकरण बिल्डरों पर किस तरह से मेहरबान रहा, इस मामले में साफ-साफ नजर आता है। बिल्डर ने जब दोनों टावरों से संबंधित संशोधित नक्शा प्राधिकरण से मंजूर कराया तो आरडब्ल्यूए वालों ने इसको प्राधिकरण से मांगा। खास बात यह है कि तत्कालीन प्राधिकरण अधिकारियों ने आरडब्ल्यूए को इससे देने से मना करते हुए पहले बिल्डर से पूछने की बात कही। ऐसे में साफ-साफ है कि प्राधिकरण किस तरह से बिल्डरों के हित में काम कर रहा था।
एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू
सुपरटेक प्रकरण में नियोजन विभाग में तैनात रहे एक अधिकारी की भी संदिग्ध भूमिका सामने आई है। नियोजन विभाग में तैनात रहे मुकेश गोयल से कोर्ट में चल रहे इस मामले में संबंधित अपडेट आला अधिकारियों को नहीं दिए। ऐसे में इनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, जल्द कार्रवाई हो सकती है।
रितु माहेश्वरी, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि दोनों एसीईओ की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जो भी इस प्रकरण में दोषी होंगे, उनके खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। बिल्डर के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अक्षरश: पालन प्राधिकरण करेगा।















