दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। मैं एक किसान परिवार से हूं, पिताजी ने अपने मेहनत के बल पर पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए, लेकिन 1996 में उनके आकस्मिक निधन के बाद हमारा जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण हो गया है, तब मैं कक्षा नवमीं में अध्ययनरत था। पिताजी के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए दर-दर भटकते रहे, डीजीपी-एसपी से कई बार गुहार लगाये, तब मुझे भी लगा की मैं भी बड़ा अधिकारी बनू। मेरे मित्र संदीप शर्मा जो वर्तमान में सीआरपीएफ में कमांडेंड है, उनके प्रेरणा से और उनके साथ परीक्षा की तैयारी किया और आज यहां तक पहुंचा हूँ। यह सब बातें दुर्ग जिला में नवपदस्थ जिला कोषालय अधिकारी राघवेन्द्र कुमार ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही।
राघवेन्द्र कुमार की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा चौथी तक मुढ़ीपार (भाटापारा) के शासकीय स्कूल में हुई, कक्षा पांचवी से सातवी तक की शिक्षा बिलाईगढ़ के शासकीय स्कूल में पूर्ण हुई। माध्यमिक शिक्षा और हायरसेकंडरी तक की शिक्षा इन्होंने भाटापारा शासकीय मल्टीपरपस हायरसेकंडरी स्कूल से पूरी की।
वर्ष 2002 में साइंस कॉलेज रायपुर से औद्योगिक सूक्ष्म जीव विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल कर सीजीपीएससी की तैयारियों में जुट गए। इनका चयन रेल्वे गुड्स गार्ड, एसएससी स्नातक परीक्षा में चयन हुआ।
वर्ष 2005 में इनका चयन शिक्षाकर्मी वर्ग दो के पद पर हुआ। इन्हें अर्जुनी (मिर्गी) भाटापारा स्कूल में पोस्टिंग मिली और इन्होंने वहां वर्ष 2007 अपनी सेवाएं दी। अपने दूसरे ही प्रयास में इनका चयन सीजीपीएससी के जिला कोषालय अधिकारी के पद पर हुआ,अपने पहले प्रयास में इन्होंने इंटरव्यू तक सफर तय किया था। वर्ष 2011 के सीजीपीएससी में भी इनका चयन डीएसपी के पद पर हुआ, लेकिन इन्होंने परिवारिक कारण से डीएसपी पद पर ज्वॉइन नही किया।
ट्रेनिंग के पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग धमतरी में हुई जहाँ इन्होंने वर्ष 2009 से वर्ष 2012 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2012 में इनका तबादला रायपुर मंत्रालय में वित्त विभाग के अवर सचिव के पद पर हुआ, जहां इन्होंने 2020 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2020 में इनका तबादला जिला कोषालय अधिकारी, बेमेतरा के पद पर हुआ, जहां इन्होंने जुलाई 2021 तक अपनी सेवाएं दी। जुलाई 2021 में इन्हें मुख्यमंत्री के गृह जिले की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है।
पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले राघवेन्द्र कुमार साहित्य पढऩे और गाना सुनने में विशेष रुचि रखते है तथा अपनी माताजी को अपना आदर्श मानते है। इन्होंने बताया कि इनको माताजी ने हमेशा मोटिवेट किया, उनका रवैया हमेशा सकारात्मक रहा है। इतने कठिन और संघर्षपूर्ण समय के बाद भी वह कभी टूटती नही थी।
अपने कार्य योजना को लेकर राघवेन्द्र कुमार ने बताया कि मैं ट्राइब हूँ और बच्चों को बहुत मोटिवेट करता है। ट्राइब बच्चों को यह लगता है कि हम आगे नही बढ़ पाएंगे जबकि ऐसा नही है अगर कड़ी मेहनत और लगातार प्रयास करने पर हमें सफलता जरूर मिलती है। मैं सभी बच्चों को यही सलाह दूंगा की लक्ष्य निर्धारित करके शत प्रतिशत मेहनत ईमानदारी से करेंगे तो सफलता आवश्य मिलेगी। मैं स्वयं कई बच्चों को अपने घर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए गाइडेंस देता हूं उनको परीक्षा के लिए तैयार करता हूँ। ईमानदारी के साथ सेवा करना तथा जरूरतमंदों को कभी निराश ना करना ही मेरा उद्देश्य है।














