भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने हमले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यहूदियों के त्योहार के दिन इजराइल दोहरे हमले की चपेट में है. हमास के चरमपंथी हमला कर रहे हैं…
नईदिल्ली (ए)। इजराइल और हमास के बीच संघर्ष के बाद भारत ने एडवाइजरी जारी की है. भारत ने इजराइल में रह रहे भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने की गुजारिश की है. इसके साथ ही भारत सरकार ने इजराइल की स्थानीय अधिकरियों के सुरक्षा प्रोटोकॉल को मानने की सलाह दी है। सरकार ने भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि गैर-जरूरी गतिविधियों से परहेज करें और सुरक्षित जगहों पर रहें।
India issues advisory for its nationals in Israel amid Hamas terrorists' attack on Israel pic.twitter.com/OqBYlCa6cH
— ANI (@ANI) October 7, 2023
जानिए संघर्ष की वजह? साल 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों में बांट दिया. इसका एक हिस्सा यहूदियों को दिया गया जबकि दूसरा हिस्सा अरब समुदाय के लोगों को दिया, जिसमें अधिकतर लोग इस्लाम को मानते हैं. 14 मई 1948 को यहूदियों ने अपने हिस्से को एक अलग देश घोषित कर दिया, जिसका नाम इजराइल रखा गया. इस फैसले से अरबी समुदाय खुश नहीं था, लिहाजा युद्ध की घोषणा हुई और लाखों फिलिस्तीनी बेघर हो गए।
युद्ध के बाद पूरा इलाका (इजराइल और फिलिस्तीन) को तीन हिस्सों में बांट दिया गया. फिलिस्तीन को वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी का इलाका मिला. गाजा पट्टी इजराइल और मिस्र के बीच में है. ये पट्टी एक छोटा सा फिलिस्तीनी इलाका है. यह मिस्र और इजरायल के मध्य भूमध्यसागरीय तट पर स्थित है. फिलिस्तीन अरबी और बहुसंख्यक मुस्लिम बहुल इलाका है. ये सभी लोग प्रथम अरब- इजरायल युद्ध के शरणार्थी और उनके वंशज है।
सितंबर 2005 में इजराइल ने गाजा पट्टी से अपनी सेना वापस बुला ली थी. 2007 में इजराइल ने इस इलाके पर कई प्रतिबंध लगा दिए. फिलिस्तीन का कहना है कि वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना हो. गाजा इलाके पर फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास का कब्जा है, जबकि वेस्ट बैंक पर इजराइल ने कब्जा किया हुआ है. इजराइल ने येरूशलम शहर पर भी युद्ध में कब्जा कर लिया और शहर के पश्चिमी हिस्से तक अपना विस्तार कर लिया।
फिलिस्तीन येरूशलम को राजधानी बनाना चाहता है, इसके अलावा अरबी समुदाय के लोग येरूशलम को पवित्र स्थान मानते हैं क्योंकि यहां अल-अक्सा मस्जिद है. यहूदियों में भी इस शहर को पवित्र माना जाता हैं. इस मुद्दे पर पिछले 25 साल से शांति का वार्ताएं चल रही हैं लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकल सका है















