केदारखंड के बाद मानसखंड के विकास को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अक्तूबर को दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री यात्रा की शुरुआत अल्मोड़ा में स्थित जागेश्वर धाम से करेंगे। यह धाम अपने पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है…
नईदिल्ली (ए)। केदारखंड के बाद मानसखंड के विकास को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अक्तूबर को दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री यात्रा की शुरुआत अल्मोड़ा में स्थित जागेश्वर धाम से करेंगे। यह धाम अपने पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। जागेश्वर धाम जटागंगा के तट पर समुद्रतल से लगभग 6200 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिवजी तथा सप्तऋषियों ने यहां तपस्या की थी।
जागेश्वर मंदिरों का निर्माण कत्यूरी राज के कालखंड में हुआ था। जागेश्वर धाम के प्राचीन मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस क्षेत्र में सदियों से आध्यात्म के दर्शन करा रहे हैं। यहां लगभग छोटे-बड़े 224 मंदिर हैं। मंदिरों का निर्माण लकड़ी तथा सीमेंट की जगह पत्थर की बड़ी-बड़ी शिलाओं से किया गया है। दरवाजों की चौखटें देवी देवताओं की प्रतिमाओं से सुशोभित हैं। मंदिरों के निर्माण में तांबे की चादरों और देवदार की लकड़ी का भी इस्तेमाल किया गया है।
कैसे पहुंचें जागेश्वर धाम यहां पहुंचने के लिए काठगोदाम अंतिम रेलवे स्टेशन है। दिल्ली आनंद विहार आईएसबीटी और देहरादून से हल्द्वानी व अल्मोड़ा के लिए बस सेवा भी हैं। दिल्ली और देहरादून से यहां की दूरी लगभग 400 किलोमीटर है। अल्मोड़ा से जागेश्वर धाम के लिए टैक्सी सेवा उपलब्ध है। अल्मोड़ा से जागेश्वर धाम की दूरी 35 किलोमीटर है। इसी तरह पंतनगर एयरपोर्ट तक नजदीकी हवाई सेवा है। पंतनगर से टैक्सी से जागेश्वर धाम 150 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंच सकते हैं।















