जिस एकता और अखंडता के लिए जाना जाता था
मेरा भारत उस पर आज मेरा भी गुरुर टूट रहा है, अब सरहद पर जंग की जरूरत ही क्या, जब घर में ही लड़ कर मेरा हिंदुस्तान फुट रहा है।
दोस्तों,
हमारे देश में अनेकों बीमारियां हैं जिसके चलते हम उसी बीमारी में उलझ कर रह जाते हैं कुछ लोग शिक्षित होकर भी अनपढ़ गवार जैसे सोच रखते है कुछ ऐसे ही लोग हमारे देश को बर्बाद करने में लगे हुए है, सबसे बड़ी बीमारी पैदा की गई जातिवाद की, दूसरी धर्मवाद की, तीसरी क्षेत्रवाद की, चौथी अमीरी और गरीबी की , जरा सोचिए कौन-कौन सी बीमारी को हम दूर करेंगे यह हम सभी लोग को सोचना पड़ेगा, हमारे देश के लोग सभी धर्मों को आदर करते हैं, बड़े विद्वानों ने कहा है (मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना) हमारे देश के चारों तरफ दुश्मन ही दुश्मन है, हम उनसे लड़े कि हम अपने अंदर की दुश्मनों से, एक बीमारी को दूर करने जाते हैं तो दूसरी बीमारी हावी हो जाती है, इसी कड़ी में कुछ लोग क्षेत्रवाद की बात कर रहे हैं, वे लोग बात कर रहे हैं जो हिंदू समाज के चौथे वर्ण में आते हैं जिनको शुद्र कहा जाता है मैं आप सभी लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं मुस्लिम समाज कभी क्षेत्रवाद का बात नहीं करता यहाँ तक कि वह बाहर के मुसलमानों को भी अपना भाई समझता है , नाही सिख समाज, ना ईसाई समाज ना ब्राह्मण क्षत्रिय ना बैश्य समाज, वैसे क्षेत्रवादी बात करने वालों में चौथे वर्ण का आदमी हमेशा तैयार रहता है, बाबा साहब अम्बेडकर ने चौथे वर्ण को ऊपर उठाने के लिए वोट का अधिकार दिया ताकि चौथे वर्ण को ऊपर उठाया जा सके लेकिन कुछ ऐसे हमारे समाज में नेता पैदा हो चुके हैं जो वोट का फायदा ना लेते हुए एक दूसरे से द्वेष फैलाने में अपना विकाश समझते है, अभी कुछ लोगों ने 15 अगस्त झंडारोहण के दिन छठ पूजा को लेकर दरी तालाब पर गलत वक्तव्य दिया जिसका हम घोर विरोध करते हैं उन्हें समझना चाहिए, यही एक ऐसा समाज है जो डूबते हुए सुर्य को पूजा पहले करता है उसके बाद अपने भविष्य की कामना उगते हुए सूर्य से करता है, जिस तालाब पर छठ पूजा होता है वहां कोई जाति धर्म मजहब आड़े नहीं आता, छठ पूजा एकता का प्रतीक है लोगों को जोड़ने का काम छठ मैया करती हैं यहां कोई पुजारी की आवश्यकता नहीं पड़ता ताकि हम दान दक्षिणा देकर पूजा करवाएं, हर व्यक्ति ब्राह्मण के रूप में पहुंचता है जिस तालाब पर छठ पूजा होता है उस तालाब में बहुत बड़ी शक्ति आ जाती है, लोगों के मन्नतें पूरी होने लगती है, सबसे बड़ी बात है छठ पूजा के चलते बेहतर तरीके से तालाबों की सफाई भी प्रत्येक साल हो जाती है, जिस व्यक्ति ने छठ पूजा को लेकर विरोध किया है की तरिया में छठ पूजा नही करने देंगे तो मैं उसके वक्तव्य को घोर निंदा करता हूं, इसको ध्यान होना चाहिए की छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल जी ने बखूबी छठ पूजा की महिमा को समझते हुए भोजपुरी परिषद के निवेदन पर शासकीय अवकाश घोषित की है जिनका सम्मान समारोह दिनांक 8 फरवरी 2020 को लगभग 50,000 लोगों की उपस्थिति में भोजपुरिया परिवार भिलाई में ऐतिहासिक सम्मान किया। अभी भूपेश बघेल जी ने रामपथ गमन यात्रा की शुरुआत करने वाले हैं छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है जिनका जन्म अयोध्या में हुआ माता कौशल्या का जन्म स्थली छत्तीसगढ़ है भगवान राम का ननिहाल होने के नाते सभी यूपी बिहार के लोग अपने ननिहाल में है उसी के चलते यहां भांजे का लोग पैर छूते हैं छत्तीसगढ़ में इतनी बड़ी परंपरा होने के बावजूद इस व्यक्ति को शर्मिंदगी महसूस नहीं हुई, अपनी राजनीति सिद्ध करने के उद्देश्य से सेना के नाम से संगठन बनाकर क्षेत्रवादी भाषण देना, लगता है कि किसी दूसरे धर्म के लोगों द्वारा इसे पैसा देकर हिंदू समाज को तोड़ने का कार्य करवाया जा रहा है इस व्यक्ति के ऊपर छत्तीसगढ़ के सभी लोगों को ध्यान देने की आवश्यकता है, देश में धर्मवाद चरम सीमा पर चल रही है हम भूल गए हैं कि सबका मालिक एक है हम अपने अपने धर्मों के प्रति लड़कर देश को कमजोर कर रहे हैं जहां तक बाहरी और भीतरी का सवाल है तो मैं उसके बारे में बता देना चाहता हूं कि अगर गांव से ही शहर बस्ता तो हर गांव शहर होता, जब देश के कोने कोने से व्यक्ति जिस जगह पर पहुँच जाते हैं उसी का नाम शहर है और वही से विकास का कार्य चालू होता है ,अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू क्षेत्रवाद देखते तो सबसे पहले उत्तर भारत में ही भिलाई स्टील प्लांट को बैठा देते उन्होंने पूरा भारत को रोजी रोटी देने के लिए बहुत बड़े-बड़े कार्य किए चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र हो, व्यापार का क्षेत्र हो, वे चाहते थे कि हमारा देश के सभी लोगों को रोजगार मिले, मैं उम्मीद करता हूं कि कम से कम छत्तीसगढ़ में जो भाईचारा है उसे खत्म न किया जाए और हम सभी लोग मिलकर छत्तीसगढ़ के विकास में अपनी अहम भूमिका अदा करें, छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी दोनों सगी बहनों का उपाधि भाषा के मेल को देखते हुए यहां के बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों ने दी है अगर राज्य के बटवारे में छत्तीसगढ़ बना है तो इसका मतलब यह नहीं कि हम जनसंख्या के बलबूते पर किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचावे तथा ध्यान रहे यह देश हमारा है हम देश के किसी भी कोने में रह सकते हैं यह हमारे ऊपर ही लागू नहीं होता सब के ऊपर लागू होता है कोई भी व्यक्ति कहीं भी रह सकता है तुम भी।
धन्यवाद
शुभचिंतक
प्रभुनाथ बैठा : प्रांतीय अध्यक्ष, छग भोजपुरी परिषद, भिलाई (छग)









