दशहरा, हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है. इसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है, जो नवरात्रि के आखिरी मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार इस साल दशहरा 5 अक्टूबर दिन बुधवार को है. इस दिन कई शहरों में रावण, मेघनाथ का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया जाता है. वहीं इस साल दशहरा पर तीन विशेष योग बन रहे हैं।
दशहरा पर नीलकंठ देखना शुभ
मान्यता है कि नीलकंड पक्षी महादेव का प्रतिनिधित्व करता है. पौराणिक कथा के अनुसार जिस समय भगवान राम दशानन का वध करने जा रहे थे. तब उन्हें नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे. उसी के बाद उन्हें लंकेश का वध करने में सफलता प्राप्त हुई। कहा जाता है कि नीलकंठ पक्षी के दर्शन ने व्यक्ति का भाग्य चमक उठता है. उसे हर कार्य में सफलता मिलने लगती है।
दशहरा पूजा विधि
शास्त्रों में दशहरा की पूजा दोपहर के समय करने का विधान है. आपको बता दें कि इस दिन ईशान कोण में 8 कमल की पंखुड़ियों से अष्टदल चक्र बनाएं. इसके बाद अष्टदल के बीच में अपराजिताय नमः मंत्र का जप करना चाहिए. वहीं इसके बाद मां भगवती के साथ श्री राम का चित्र या मूर्ति स्थापित करिए. अब माता को रोली, अक्षत, फूल आदि पूजा की सामग्री अर्पित करें और भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें. साथ ही भोग सभी परिजनों में बांट दें।
दशहरा 2022: अबूझ मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दशहरा तिथि एक अबूझ मुहूर्त माना जाता है. मतलब इसमें बिना कोई मुहूर्त देखे, सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं. कोई कारोबार, प्रापर्टी या वाहन खरीद सकते हैं. लेकिन फिर भी विशेष मुहूर्त यह हैं…
विजय मुहूर्त: बुधवार, 5 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट से लेकर 2 बजकर 53 मिनट तक
अमृत काल: बुधवार, 5 अक्टूबर सुबह 11 बजकर 32 से लेकर दोपहर 1 बजकर 3 मिनट तक
दुर्मुहूर्त: बुधवार, 5 अक्टूबर सुबह 11 बजकर 52 मिनट से लेकर 12 बजकर 39 मिनट तक।
दशहरा 2022: पूजन शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार दशमी तिथि 4 अक्टूबर 2022 की दोपहर 2 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर 5 अक्टूबर 2022 को दोपहर 12 बजे समाप्त होगी. इस दौरान दशहरा पूजन के 2 शुभ मुहूर्त हैं. दशहरा पूजन का विजय मुहूर्त दोपहर 02:07 बजे से 02:54 बजे तक केवल 47 मिनट का रहेगा. वहीं बंगाल विजयादशमी की अपराह्न पूजा का समय दोपहर 01:20 बजे से 03:41 बजे तक करीब 2 घंटे 21 मिनट का रहेगा।
जानिए दशहरा तिथि
वैदिक पंचांग के मुताबिक, दशमी तिथि 04 अक्टूबर 2022 को दोपहर 02 बजकर 21 मिनट से शुरु हो रही है, जो कि 05 अक्टूबर 2022 को दोपहर 12 बजे समाप्त हो जाएगी. इसलिए उदयातिथि को आधार मानकर दशहरा 5 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।
बन रहे हैं 3 विशेष योग
इस साल पंचांग के अनुसार दशहरा या विजयादशमी पर तीन शुभ योग बन रहे हैं. दशहरा के दिन रवि, सुकर्मा और धृति योग बनने से इस दिन का महत्व दोगुना हो रहा है. इन योगों का ज्योतिष में विशेष महत्व है. इन योगों में किए गए उपाय सिद्ध हो जाते हैं।
दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने से पैसों और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है. मान्यता है कि यदि दशहरे के दिन किसी भी समय नीलकंठ दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं, जो काम करने जा रहे हैं, उसमें सफलता मिलती है. दशहरे का त्योहार 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान राम ने दस सिर वाले रावण का वध किया था।

नीलकंठ का दिखना क्यों शुभ है?
जब श्रीराम रावण का वध करने जा रहे थे. उसी दौरान उन्हें नीलकंठ के दर्शन हुए थे. इसके बाद श्रीराम को रावण पर विजय मिली थी. यही वजह है कि नीलकंठ का दिखना शुभ माना गया है।
इस दिन सभी अपने शस्त्रों का पूजन करते है. सबसे पहले शस्त्रों के ऊपर जल छिड़क कर पवित्र किया जाता है फिर महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाकर हार पुष्पों से श्रृंगार कर धूप-दीप कर मीठा भोग लगाया जाता है। शाम को रावण के पुतले का दहन कर विजया दशमी का पर्व मनाया जाता है।
नीलकंठ पक्षी दिखने पर करें इस मंत्र का उच्चारण
अगर दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी दिख जाएं तो मंत्र
कृत्वा नीराजनं राजा बालवृद्धयं यता बलम्।
शोभनम खंजनं पश्येज्जलगोगोष्ठसंनिघौ।।
नीलग्रीव शुभग्रीव सर्वकामफलप्रद।
पृथ्वियामवतीर्णोसि खच्चरीट नमोस्तुते।।
का जाप करें।
धरती पर भगवान शिव का प्रतिनिधि है नीलकंठ पक्षी
जनश्रुति और धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शंकर ही नीलकण्ठ है. इस पक्षी को पृथ्वी पर भगवान शिव का प्रतिनिधि और स्वरूप दोनों माना गया है. नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का ही रुप है. भगवान शिव नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर धरती पर विचरण करते हैं।
पेड़ों या तारों पर दिख जाता है नीलकंठ पक्षी
नीलकंठ को अक्सर प्रमुख पेड़ों या तारों पर देखा जाता है. यह पक्षी मुख्य रूप से प्रजनन के मौसम में नर की हवाई कलाबाजी के लिए जाना जाता है. यह अक्सर सड़क के किनारे पेड़ों और तारों में बैठे हुए देखे जाते है और आमतौर पर खुले घास के मैदान और झाड़ियों के जंगलों में देखे जाते है. इन पक्षियों की सबसे बड़ी आबादी भारत में पाई जाती है।
साभार: प्रभात खबर
















