चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर रामनवमी का त्योहार मनाया जाता है, जो इस बार 26 मार्च गुरुवार को पड़ रही है। इस पर संयोग यह बन रहा है की इसी दिन अष्टमी और नवमी तिथि भी लग रही है। वहीं, रामनवमी पर चंद्रमा और गुरु की युति बनने से गजकेसरी का उत्तम संयोग बनेगा…
नईदिल्ली (ए)। आज चैत्र नवरात्रि आठवां दिन है। अष्टमी का दिन मां दुर्गा के 8वें स्वरूप मां महागौरी की पूजा के लिए समर्पित होता है। मां का रंग शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल की तरह सफेद होने की वजह से महागौरी कहा जाता है। अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा करने से सभी कष्ट और पाप धुल जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अष्टमी के दिन माता की पूजा के बाद कन्या पूजन का विधान है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराकर उपहार और दक्षिणा देने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मां महागौरी का वर्ण अत्यंत श्वेत है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। मां के वस्त्र और आभूषण भी श्वेत है। मां की चार भुजाएं हैं। एका हाथ में मां ने त्रिशूल धारण किया है, दूसरे हाथ में डमरू, तीसरा हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा हाथ वर मुद्रा में है। मां वृषभ पर सवार रहती हैं।
नवरात्रि के दिनों में नवदुर्गा को अलग-अलग वस्तुओं का भोग लगाया जाता है। मां महागौरी को नारियल से बनी मिठाइयां अत्यंत प्रिय हैं। अष्टमी की पूजा के बाद मां को नारियल से बनी चीजों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा मां को सूजी का हलवा और काले चने का प्रसाद भी अर्पित किया जाता है।
मां महागोरी पूजा विधि
- अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें।
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद पूजा स्थल को गंगा जल छिड़ककर शुद्ध करें।
- मां महागौरी को सफेद रंग का वस्त्र अर्पण करें।
- अब मां को सफेद पुष्प चढ़ाएं और कुमकुम से तिलक करें।
- मां को नारियल से बनी वस्तुओं का भोग लगाएं।
- इसके बाद ॐ देवी महागौर्यै नमः” का जाप करें।
- अंत में मां की आरती उतारे और मां से प्रार्थना करें।
मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
हिंदू पंचांग के अनुसार आज 26 मार्च को अष्टमी और नवमी दोनों का संयोग बन रहा है। इस दिन सुबह 11:48 बजे तक अष्टमी लग रही है, जिसके बाद से नवमी तिथि प्रारंभ है। ऐसे में यह दिन हवन और कन्या पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। ऐसे में नीचे दिए गए शुभ मुहूर्त में आप हवन और कन्या पूजन (कंजक) कर सकते हैं।
सनातन धर्म में राम नवमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि त्रेता युग में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। यह दिन धर्म, सत्य और मर्यादा के प्रतीक श्रीराम के अवतरण का प्रतीक है। इस दिन अयोध्या सहित पूरे भारत में विशेष उत्सव, झांकी और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। श्रीराम को भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है, जिन्होंने धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लिया था।
राम नवमी पर इस तरह करें पूजा- अर्चना
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है।
- रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है।
- दोपहर में (मध्याह्न काल) भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
- झूले में बाल राम की पूजा कर आरती की जाती है।
- भोग में फल, पंचामृत और मिठाई चढ़ाई जाती है।
















