सरकार ने रविवार तक 12 जिलों में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करते हुए कहा था कि जनता को भड़काने और जान-माल को नुकसान पहुंचाने के इरादे से अफवाहें फैलाने के लिए आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है…
नईदिल्ली (ए)। ‘अग्निपथ’ योजना के विरोध की आग कई राज्यों में फैल गई है। एक ओर जहां प्रदर्शनकारी लगातार हिंसक होते जा रहे हैं। वहीं, पुलिस ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। खबर है कि प्रदर्शनों के बीच अब तक एक हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें अधिकांश गिरफ्तारियां बिहार में हुई हैं। वहीं, सैकड़ों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा व्हाट्सऐप और कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी पुलिस की जांच में शामिल है।
बिहार हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित माने जा रहे बिहार में 148 FIR दर्ज की गई हैं। वहीं, 805 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राज्य के अतिरिक्त मुख्य गृह सचिव चैतन्य प्रसाद का कहना है कि आंदोलन के नाम पर सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मसौढ़ी में चार कोचिंग संस्थानों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज हुई है। खबर है कि इस जिले से 191 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
तेलंगाना अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे) संदीप शांडिल्य ने कहा, ‘बाहरी असमाजिक तत्व शामिल नहीं हुए थे और हमले सेना में नौकरी की इच्छा रखने वालों की तरफ से किए गए थे, जिन्हें कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों ने गुमराह किया था।’ सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर हुई आगजनी में कुल 46 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उत्तर प्रदेश हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में पुलिस ने 387 गिरफ्तारियां की हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेश (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि पुलिस ने रविवार तक पुलिस ने 34 FIR दर्ज की हैं।
गुजरात पुलिस ने जानकारी दी कि अग्निपथ योजना के खिलाफ बगैर इजाजत जुटने के चलते 14 लोगों को हिरासत में लिया गया है। शहर के मेघानीनगर इलाके में करीब 100 लोग जुटे थे।
उत्तराखंड शुक्रवार को नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग पर कथित हिंसक विरोध प्रदर्शन के चलते 300 से 400 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस नेकहा कि युवा प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे। उन्होंने बताया कि वे पुलिस और आने जाने वालों के साथ गलत बर्ताव और हाथापाई कर रहे थे। साथ ही पुलिस ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना और अग्निवीरों को लेकर फर्जी खबरें फैलाने के लिए 35 वॉट्सऐप ग्रुप पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, अफवाह फैलाने और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के आरोप में कम से कम दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गृह मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी।
गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र ने व्हाट्सएप फैक्ट-चेकिंग के लिए 8799711259 नंबर भी जारी किया है। बिहार जैसे राज्यों में विरोध प्रदर्शनों को जुटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विशेषकर व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने की खबरों के बीच यह कार्रवाई हुई है, कई ट्रेनों में आग लगाने की घटना देखऩे को मिली है।
कोचिंग सेंटरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में 17 जून को, बिहार सरकार ने रविवार तक 12 जिलों में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करते हुए कहा था कि जनता को भड़काने और जान-माल को नुकसान पहुंचाने के इरादे से अफवाहें फैलाने के लिए आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। पटना में जिला प्रशासन ने यह भी कहा कि गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के मोबाइल फोन से मिली जानकारी कोचिंग सेंटरों की भूमिका की ओर इशारा करती है।
तेलंगाना में कोचिंग संस्थान का मालिक गिरफ्तार वहीं, तेलंगाना पुलिस ने आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले के नरसरावपेट शहर में एक कोचिंग संस्थान के मालिक को कथित तौर पर अग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए युवाओं को उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। हिरासत में लिए गए कोचिंग संस्थान के मालिक अवुला सुब्बा राव पर हकीमपेट आर्मी सोल्जर्स नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का आरोप है, जिसमें सेना के सैकड़ों उम्मीदवार जुड़े थे। इस ग्रुप में, उसने कथित तौर पर सभी सदस्यों को मैसेज भेजकर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कहा था।
वापस नहीं होगी योजना विरोध के बीच, केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि चार साल के कार्यकाल के लिए सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना को वापस नहीं लिया जाएगा। तोड़फोड़ और आगजनी के मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हिंसक विरोध प्रदर्शन करने वालों को भर्ती नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों को एक लिखित शपथ देनी होगी कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया।















