भिलाई। बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्यसभा सांसद व भाजपा नेत्री डॉ. सरोज पाण्डेय ने कहा कि भारत के तीनों सेनाओं को सशक्त करने के लिए मोदी सरकार द्वारा लाई गई योजना ‘अग्निपथ’ का प्रायोजित विरोध, तोडफोड, ट्रेनों में, भाजपा कार्यालयों में आग लगाना आदि कांग्रेस की उसकी देश विरोधी मंशा को प्रकट करता है। देश भर में जहां भी ‘अग्निपथ के खिलाफ उपद्रव हो रहे हैं, इसके पीछे कांग्रेस और उसके मित्र दल ही हैं, यह अनिक साक्ष्य्यों के साथ साबित हआ है। हाल ही में कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने सीधे तौर पर बस्तर में यह आह्वान किया कि जैसा तोडफोड बिहार में हो रहा है, जिस तरह वहां गाड़िया जलायी जा रही है, वैसे ही छत्तीसगढ़ में भी होना चाहिए। इससे पहले कांग्रेस नेता आसिफ मेमन ने एक फेसबूक पोस्ट कर प्रदेश भाजपा कार्यालय को जलाने का आह्वान भी किया था। आपको यह भी याद होगा कि कुछ समय पहले कांग्रेस मुखिया राहल गांधी ने विदेशों में जा कर यह कहा था कि कैरोसीन छिडका हआ है, बस माचिस की तीली दिखाने की ज़रूरत है, भाजपा का यह स्पष्ट आरोप है कि देश भर में कांग्रेसियों ने यह तीली दिखा दिया है। चुनावी राजनीति से बुरी तरह पस्त और परास्त कॉंग्रेस अब इस तरह से उपद्रव कर देश पर कब्जा करने की कोशिश फिर से कर रही है। इसके प्रति हम सबको सचेत रहना होगा।
जहां तक सेना का सवाल है, तो कांग्रेस हमेशा से सेना को कमजोर करने की कोशिश में लगी रही है, आप सब जानते हैं कि प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का स्पष्ट मानना था कि देश को सेना की ज़रुरत ही नहीं है. वे तो यह भी कहते थे कि सियाचीन में घास का एक तिनका तक नही उगता। आपको याद होगा कि मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान बनाए सच्चर कमिटी ने बकायदा सेना को पत्र लिख कर यह जानकारी चाही थी कि सेना में कितने मुसलमान काम करते हैं,
उसने धर्म आधारित आांकड़े सेना से लेना चाहां था जिसके जवाब में सेना का साफ़ कहना था कि उसके यहां केवल भारतीय काम करते हैं न कि हिन्दू मुसलमान, एयरस्ट्राइक का सबूत मांगने वाली कांग्रेस के घड़ियाली आसूं को देश के युवा अब बेहतर समझने लगे हैं। ऐसी सेना विरोधी कांग्रेस अग्निपथ के खिलाफ जिस तरह की हरकत कर रही है, उसकी देश भर में
निंदा होनी चाहिए. वह भारत में आग लगा कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना चाहती है। अग्निपथ स्कीम पर सबसे बड़े विरोध का कारण यह बताया जा रहा है कि 4 साल बाद जॉब्स नहीं होगे जबकि तथ्य यह है कि इस वर्ष के कुल 46 हजार लोगो की प्रस्तावित भर्ती में से 11,500 यानी 25 प्रतिशत सेना में ही स्थायी होंगे। शेष 34,500अग्निवीरों के लिए रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, अर्द्ध सैनिक बलों, राज्य पुलिस आदि में अवसर मिलेंगे।
देश में 36 प्रदेश है इन सभी प्रदेशों में अग्निवीरो के पास वास्तव में रोजगार के इतने होंगे कि अग्निवीरों को ही तय करना होगा वे कहां जाना चाहते हैं, उनके पास विकल्पों की कमी नहीं होगी। आपने लगातार इस योजना के बारे में समझा ही है, सो कुछ अधिक कहने की ज़रुरत नहीं है. इस योजना से हमारी तीनों सेनायें अधिक जवान होगी. केवल इस योजना से सेना की औसत आयु 32 वर्ष से घट कर 24 वर्ष हो जायेगी। अमेरिका, चीन, ब्राजील, इजरायल आदि दर्ज़नों ऐसे देश हैं, जहां ऐसी ही व्यस्था कर उन्होंने अपनी सेना को सूद्धृद बनाया है। इस योजना से 4 गुना अधिक लोगों को सेना का हिस्सा होने का अवसर मिलेगा. 21 से 25 वर्ष की उम्र में ही जब युवा आगे के बारे में सोच ही रहे होते हैं, उसी समय देश के अग्नवीरों के पास न केवल भारतीय सेना जैसी विश्वस्तरीय संस्थान में काम करने का वर्षों का अनुभव हो गया होगा, न केवल उस उम्र में ही उनके भीतर देशभक्ति की भावना कुट-कुट कर भर चुकी होगी, अनुशासित जीवन का अभ्यास उन्हें हो चुका होगा बल्कि चार वर्ष के बाद उनके पास अनुभर्वों का और शिक्षा का भी प्रमाण पत्र, साथ में लाखों रूपये भी होंगे जिसके सहारे वे आगे का अपना मार्ग प्रशस्त करेंगे. उन्हैं उचित मानदेय और सुरक्षा के साथ-साथ ऐसी ट्रेनिंग मिलेगी जिसके लिए बच्चों के पैरेंट्स उलटे लाखों खर्च करते हैं।
क्योंकि इस योजना से देश के प्रति प्रतिबद्ध युवाओं की एक फौज देश भर में खड़ी हो जायेगी, जाहिर है ऐसा होना कांग्रेस की राजनीति को कभी भी रास नहीं आता, इसलिए अब ‘अग्निपथ’ का विरोध काग्रेस के लिए अस्त्व का सवाल बन गया है. चीन से युद्ध की सी स्थिति में अपने ही देश को सररेंडर घोषित कर देने वाली कांग्रस जैसी विपक्ष से आप इससे अधिक उम्मीद भी नहीं कर सकते हैं, हालांकि देश के युवाओं को अब कांग्रेस की परवाह भी नहीं है. देश भर से जिस तरह लाखों युवाओं ने तैयारियां शुरू कर दिया है, जिस तरह हज़़ारों-हज़़ार युवाओं ने रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है, उससे यह बेहतर पता चलता है कि देश को अस्थिर करने, राष्ट्र की बहुमूल्य संपत्तियों को जलाने के जिम्मेदार कांग्रेस जैसे दर्लों के मंसूबे चकनाचूर हो गए हैं। जहां तक छत्तीसगढ़ कांग्रेस का सवाल है, तो सीएम भुपेश बघेल का यह कहना कि हथियार चलाना सीख लेने के बाद ‘अ्निवीर’ अराजक हो जायेंगे,भारत की महान सैन्य परम्परा का अपमान है। आज भी हर राज्य में हज़ारों सेवानिवृत्त सैनिक हैं, वे सभी क्या अराजक हो गए हैं? छत्तीसगढ़ के एक गांव किरीत ही सौ से अधिक सेवा निवृत्त सैनिक रहते हैं, क्या वह या वैसे सभी गांव अराजक हो गए? पुलिस सेवा से निवृत्त होकर लाखों लोग समाज में आते हैं, वे सभी अराजकता पैदा नहीं करते बल्क समाज की थाती बन जाते हैं। भुपेश बघेल जैसे अराजक व्यक्ति का डर ही यही है कि अगर देशभिक्तों की फौज खड़ी हो गयी तो कांग्रेस का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। उनकी अराजक और विभेदकारी राजनीति की विरासत का खात्मा हो जाएगा।
जिस भूपेश सरकार ने वादे के बावजूद अभी तक युवाओं को रोजगार और बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया, जिसने युवाओं से किये अपने सभी वादों से बेशर्मी से मुकरते हुए विश्वासघात का उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिसने बेरोजगार युवाओं को आत्महत्या को मजबूर किया है। भाजपा शासन के समय देश भर में विकास और अवसर के लिए जाना जाता था छत्तीसगढ़, ऐसे प्रदेश में कांग्रेस की शत-प्रतिशत रोजगार वाली डींगें हांके के बाद भी नतीज़ा यह है कि 100-50 चपरासी के पद के लिए भी हजारों उच्च शिक्षित युवा उमड़ पड़ते हैं, ऐसी कांग्रेस दूवारा अग्निवीर जैसी योजना के खिलाफ गाना बजाना शोभा नहीं दैता है। छत्तीसगढ़ के युवाओं को 2500 रुपया प्रति माह देने का वादा कर अभी तक के 43 माह के कुशासन में कांग्रेस प्रति युवा सवा लाख रूपये की ठगी कर चुकी है. सभी अनियमित, संविदा कर्मचारियों को, बिजली विभाग के कर्मचारियों को दस दिन में नियमित करने का वादा करने वाले भूपेश बघेल अब उन पर लाठियां बरसा रहे, 5 लाख युवाओं को रोजगार देने के इनके खुद का झूठ का खुूद ही सदन में इन्हं पर्दाफ़ाश करना पड़ा जब इन्होने मात्र कुछ हज़ार नौकरी देने की बात स्वीकार की थी।
12 हज़ार मनरेगा कर्मचारी सामुहिक इस्तीफा देने पर विवश हो रहे हैं, युवाओं और देश के साथ विरोध की अपनी सस्ती और हल्की राजनीति से कांग्रेस बाज़ आये। वह इतने बड़े जनादेश के बाद भी छत्तीसगढ़ में कुछ नहीं कर पा रही है, ऐसे में अपना बचा समय किसी तरह काट कर वह दफा हो जाए। युवाओं और देश के साथ दुश्मनी की कांग्रस की कुनीति अब उसे काफी आारी पड़ने वाली है. अग्निपथ पर चल पड़े राष्ट्रभक्त अग्निवीरों के खिलाफ कांग्रेस का देश भर में आगजनी के मंसूबे पर भाजपा उससे यही सवाल करती है कि आग लेकर हाथ में पगले जलाता है किसे, जब न ये बस्ती रहेगी, तु कहां रह पायेगा!
पत्रकार वार्ता के दौरान मार्कण्डेय तिवारी, संतोष सिंह, अर्जुन सचदेव, सुभाष शर्मा, अवधेश चौहान, प्रमोद अग्रवाल, वीरेंद्र साहू, ईश्वर ठाकुर, भूषण अग्रवाल, शरद सिंह, सूरज जयसवाल आदि उपस्थित थे।















