
भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस)। वर्ष 2020 में किसी ने भी इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाया होगा कि भारत सहित पूरा विश्व कोरोना जैसे अदृश्य वैश्विक महामारी का सामना करेगा। ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए हम न तैयार थे न ही हमारे पास कुछ भी साधन उपलब्ध थे। छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना रोकथाम के लिए पुलिस विभाग को जिम्मेदारी सौंपी। लॉकडाउन लगाया गया। महामारी के प्रारंभिक चरण में जब मास्क मेडिकल स्टोर में एवं बाजार में उपलब्ध नहीं था ऐसे समय में प्रवासी मजदूरों का लाकडाउन के कारण विभिन्न राज्यों से दुर्ग जिले से आना हो रहा था। इन आर्थिक रुप से कमजोर मजदूरों को संक्रमण से बचाने के लिए दुर्ग रेंज आईजी, एसपी द्वारा दुर्ग रक्षित निरीक्षक नीलेश द्विवेदी को मास्क तैयार करने के लिए निर्देशित किया गया। रक्षित निरीक्षक ने टीम तैयार कर रक्षित केन्द्र में मास्क सिलवाना प्रारंभ किया और विभिन्न थानों के माध्यम से निशुल्क मास्क उपलब्ध कराया जो कि मानवीय संवेदना के आधार पर दुर्ग पुलिस की एक अलग छवि समाज में बनी। जिसकी चर्चा चारों तरफ हुई।

लाकडाउन के दौरान दुर्ग पुलिस के जवान लगातार लोगों को जागरुक करने और समझाईश देने में निरंतर चौक-चौराहों, पीकेट्स पेट्रोलिंग आदि की ड्यूटी पर तैनात रहे। अधिकारी-कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट करवाया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार कोरोना पाजिटीव आए पुलिस कर्मचारी-अधिकारियों से सतत् संपर्क कर उनके अच्छे उपचार की व्यवस्था में सहयोग किया गया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमण से संक्रमित हुए ईलाज करवाए ठीक हुई और पुन: अपनी ड्यूटी निभाई।

एक तरफ जहां पूरी दुनिया वैश्विक महामारी का रुप ले चुके कोरोना महामारी से थर्रा रही थी वहीं दुर्ग जिले की पुलिस अपनी जान जोखिम में डालते हुए सड़कों, गलियों और बाजारों में निकलकर लोगों की हिफाजत में लगी रही। कानून और शांति व्यवस्था के अलावा वे सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों के तहत पुलिस लाईन में पदस्थ फेस मास्क तैयार किए। जिले में 2064 पुलिस जवान हैं। इस महामारी से बचने आला अधिकारियों के निर्देश पर सभी मैदान में डटे रहे। जिले के 1800 से ज्यादा पुलिसकर्मी 16 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहे। ऐसे में अधिकारियों ने उनके परिवार की सुरक्षा मुहैया करने के उद्देश्य से नई पहल की शुरुआत की। पुलिसकर्मियों के 570 घरों में खाद्य सामाग्री की होम डिलिवरी की व्यवस्था की गई।

जिन पुलिसकर्मियों की दिन-रात ड्यूटी कोरोना में लगी थी। उनके परिजनों को फल, सब्जी दवा, राशन दूध व अन्य अति आवश्यक सामाग्री उपलब्ध कराने के लिए वाहन सहित दो कर्मचारियों को उपलब्ध कराया गया। जिससे कि उन्हें किसी भी प्रकार का दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। कई थानेदारों ने गीत के माध्यम से लोगों को जागरुक किया और उनका मनोरंजन कर मनोबल बढ़ाया।

इस दौरान दुर्ग पुलिस ने अपने 6 जाबांज पुलिस कर्मियों को कोरोना संक्रमण के कारण खो दिया। जिनकी याद में पुलिस लाईन में कोरोना वारियर्स पार्क बनाया जिसका उद्घाटन दुर्ग रेंज आईजी, दुर्ग एसपी तथा कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले पुलिस कर्मियों के परिजनों ने किया।
कर्तव्य के निष्पादन के दौरान दुर्ग जिले में पदस्थ उप निरीक्षक स्व. इंदूराम साहू, सहायक उप निरीक्षक स्व. प्रकाश दास, प्र.आ. क्र. 824 स्व. फूलचंद भूआर्य, प्रधान आरक्षक क्र. 1018 स्व. शिवबोधन यादव, प्र.आ. स्व. भगवान दास पटेल, आरक्षक स्व. नरेश भाई सोनी कोरोना संक्रमण से ज्यादा संक्रमित होने से दिंवगत हो गए जो कि दुर्ग पुलिस के लिए अपूर्णीय क्षति है। इन पुलिस कर्मियों के परिजनों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस पर दुर्ग पुलिस ने इनके बलिदान को याद करते हुए वारियर्स पार्क पुलिस लाईन दुर्ग में बनाया। इनके परिजनों द्वारा इस पार्क में वृक्षारोपण कर श्रद्धांजलि दी गई। इनके हाथों द्वारा जीवनदायिनी आक्सीजन देने वाले नीम पेड़ का वृक्षारोपण करवाया गया।
लॉकडाउन के दौरान दुर्ग पुलिस के जवानों और अधिकारियों के लिए पुलिस बैंक सबसे बड़ा सहारा बना। आपातकाल स्थिति में महज तीन घंटे में 20 दिनों के अंदर बैंक से 3 लाख तक की अधिकतम राशि जवानों को बैंक से मिली। कोरोना काल के पिछले डेढ़ वर्षों में बैंक से 420 पुलिसकर्मियों ने 8.80 करोड़ का लोन लिया। इसमें एसपी, एएसपी, टीआई लेबल के अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिसकर्मियों ने यह लोन पर्सनल लोन की श्रेणी में लिया जिसमें स्वास्थ्य सुविधा, शादी, बच्चों की पढ़ाई और घरों की जरुरत के लिए लिया। कोरोनाकाल में यह बैंक दुर्ग पुलिस के लिए वरदान साबित हुआ।
ऐसे पुलिसकर्मी जो कोरोना ड्यूटी में संलग्न होने के कारण अन्य जिलों में पदस्थ होने से अपना परिवार से मिलने नहीं आ पाए तथा कर्तव्य की वेदी में शहीद हुए पुलिस जवानों के परिवार से मिलने तथा उनके मन में एक परिवार के रुप में रक्षा का भाव का संदेश पहुंचाने दुर्ग पुलिस के आला अधिकारी रक्षाबंधन के पर्व पर पहुंचे। दुर्ग पुलिस द्वारा रक्षित केन्द्र एवं न्यू पुलिस लाईन में पुलिस अस्पताल संचालित कर विशेषज्ञ एवं फिजियोथेरेपिस्ट की लगातार सेवाएं ली जा रही हैं। समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन कराकर पुलिस एवं उनके परिजनों को इसका लाभ प्रदान कर रही है।
दुर्ग पुलिस द्वारा पुलिस परिवार के बच्चों के लिए शिक्षा एवं कोचिंग हेतु वरिष्ठ अधिकारी, विषय-विशेषज्ञों, प्रोफेसर तथा पुलिस परिवार की बच्चों की उपस्थिति में कैरियर गाईडेंस कार्यक्रम उड़ान का आयोजन एक अभिनव पहल है।
दुर्ग पुलिस द्वारा अधिकारी/कर्मचारियों के आवास आबंटन तथा आवासीय समस्या का निराकरण, पुलिस परिवार के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक जिम की स्थापना, रक्षित केन्द्र दुर्ग के बौद्धिक एवं मानसिक विकास हेतु मनोरंजन गृह एवं वाचनालय की स्थापना, पुलिस परिवार के महिला सदस्यों द्वारा रोजगार मूलक कल्याणकारी कार्य जैसे कई सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं जिससे दुर्ग पुलिस की एक सकारात्मक छवि उभरकर समाज के सामने आई है।

टीकारण की अहमियत को देखते हुए दुर्ग पुलिस ने कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों के परिजनों के टीकारण हेतु भिलाई कंट्रोल रुम में कोविड हेल्ड डेस्क की व्यवस्था की गई। जिसके माध्यम से पुलिस कर्मियों के परिजनों को शत प्रतिशत टीकाकरण हेतु सुविधाएं उपलब्ध कराना, कोविड हेल्ड डेस्क में 3 डीएसपी, 2 टीआई और 15 जवान लगातार 24 घंटे कार्यरत रहे। जिससे कि आपातकालीन चिकित्सा सुविधा समय में उपलब्ध कराई जा सके।














