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चैत्र नवरात्रि के आज तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा का आह्वान, जानिए पूजा विधि?

चैत्र नवरात्रि के पावन त्योहार का आज (21 मार्च) तीसरा दिन है. आज का दिन आदि शक्ति मां चंद्रघंटा के स्वरूप को समर्पित है. माता को शक्ति, साहस और वीरता का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि माता की आराधना से डर और भय का नाश होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. इस दिन पूजा के दौरान चालीसा का पाठ करने का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा के फलस्वरूप शुभ प्रभाव पड़ता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं…

 

 

नईदिल्ली (ए)। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हो चुकी है और इसका समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में विधि-विधान से मां के अलग-अलग रूपों की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। बता दें कि आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है और नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के सभी भय और कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप, मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह स्वरूप शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण के समान तेजस्वी और दिव्य आभा से युक्त होता है, जबकि उनका वाहन सिंह है, जो वीरता और निर्भीकता का प्रतीक है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां के दस भुजाएं होती हैं, जिनमें वे कमल, धनुष, बाण, खड्ग, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। उनके कंठ में श्वेत पुष्पों की माला और सिर पर रत्नजड़ित मुकुट सुशोभित होता है, जो उनकी दिव्यता को और भी बढ़ाता है। मां चंद्रघंटा का यह स्वरूप युद्ध मुद्रा में विराजमान रहता है, जो बुराई के विनाश और भक्तों की रक्षा का संकेत देता है।

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। इस दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद मन में श्रद्धा रखते हुए मां चंद्रघंटा और मां दुर्गा के अन्य स्वरूपों का ध्यान करें और पूजा की शुरुआत करें। पूजा के दौरान सबसे पहले मां को फूल, माला, कुमकुम, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद विधि-विधान से उनका पूजन करें और भोग के रूप में केसर की खीर या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें, जो मां को अत्यंत प्रिय मानी जाती है।

इसके बाद घी का दीपक जलाएं, धूप अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करें। साथ ही दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। अंत में मां की आरती अवश्य करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें। माना जाता है कि इस विधि से पूजा करने पर मां चंद्रघंटा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत फलदायी होता है। कहा जाता है कि मां चंद्रघंटा को दूध से बने भोग अर्पित करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है, साथ ही सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं।

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