छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में हाईकोर्ट ने जनवरी में चैतन्य बघेल को जमानत दी थी। चैतन्य बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। बता दें कि ईडी ने विशेष अदालत में अंतिम अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिसमें 59 नए लोगों को आरोपी बनाया गया। इससे कुल आरोपियों की संख्या 81 हो गई…
नईदिल्ली (ए)। छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट एक हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने कथित शराब घोटाला मामले मे चैतन्य बघेल को दी गई जमानत को चुनौती दी है। चैतन्य, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के बेटे हैं। शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। इस मामले की अगली सुनवाई अब अगले हफ्ते करेगी, जब अदालत तय करेगी कि चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी जाए या खारिज की जाए।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की बेंच के सामने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी पेश हुए। उन्होंने बेंच को बताया कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद मामले का एक भी अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इससे जुड़े धनशोधन मामले में चैतन्य बघेल की जमानत को अलग से चुनौती दी है। बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई एक हफ्ते बाद की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया की एक अलग याचिका पर भी सुनवाई की। सौम्या चौरसिया को कथित शराब घोटाले के मामले में ईडी ने पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किया था।
सौम्या चौरसिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही अन्य मामलों में उन्हें जमानत दे चुका है। अब उन्होंने फिर से नई प्राथमिकी दर्ज की और दिसंबर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यह छठी बार है जब उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इस पर बेंच ने सौम्या चौरसिया से कहा कि वह जमानत के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख करें।
जांच के अनुसार, यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। ईडी का अनुमान है कि इस अवैध धंधे से करीब तीन हजार करोड़ रुपए की गैरकानूनी कमाई हुई, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ईडी के अनुसार, इस घोटाले की जांच में एक संगठित सिंडिकेट का पता चला, जिसमें नौकरशाह, राजनीतिक नेता और निजी कारोबारी शामिल थे। सिंडिकेट ने शराब की नीति को कमजोर करके अवैध तरीकों से पैसा कमाया।
















