भिलाई। दिनांक 30.01.2026 को न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, दुर्ग ने हर्षोल्लास के साथ अपना द्वितीय स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर क्षे.न्या.वि.प्र., दुर्ग में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
उक्त कार्यशाला का शुभारंभ विजय अग्रवाल पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला दुर्ग के द्वारा डॉ. पंकज ताम्रकार प्रभारी अधिकारी क्षे.न्या.वि.प्र., दुर्ग की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नवीन कानूनों के अनुपालन में भौतिक साक्ष्यों के संग्रहण, पैकिंग, सीलींग एवं अग्रेषण के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान कर क्षे.न्या.वि.प्र., दुर्ग एवं जिला दुर्ग के पुलिस अधिकारियों के मध्य अपराध अनुसंधान में आपसी सहयोग एवं क्रियान्वयन किया जाना था।
कार्यशाला में दुर्ग जिले के विभिन्न थानों के विवेचक स्तर के पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति रही। क्षे.न्या.वि.प्र., दुर्ग के द्वितीय स्थापना दिवस पर एस. सी. द्विवेदी संचालक राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर, अभिषेक शांडिल्य पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज एवं बी.एस. राजपूत डिप्टी डायरेक्टर अभियोजन, दुर्ग उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि आईजी अभिषेक शांडिल्य के द्वारा प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों एवं तकनिकी कर्मचारियों के द्वारा किये जा रहे कार्यों एवं न्युनतम पेंडेंसी की सराहना की गयी एवं क्षे.न्या.वि.प्र., दुर्ग में पुलिस के द्वारा रासायनिक परीक्षण हेतु भेजे जाने वाले प्रदर्शों के त्वरित परीक्षण कर संबंधित पुलिस अधीक्षक को प्रतिवेदन से अपराध अपराधिक प्रकरणों के निराकरण में प्राप्त होने वाले सहायता की भी विशेष तौर पर सराहना की गयी।
वर्तमान में अपराध की प्रकृति एवं अपराधियों के द्वारा अपराध में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है जिस हेतु क्षे.न्या.वि.प्र. दुर्ग में डी.एन.ए. एवं सायबर शाखा खोले जाने हेतु विस्तृत चर्चा की गयी एवं उक्त हेतु रूपरेखा तैयार किया गया। क्षे.न्या.वि.प्र., दुर्ग के प्रभावी रूप से संचालन एवं दुर्ग रेंज के पुलिस अधिकारियों को अपराध अनुसंधान एवं निराकरण में मिल रहे उत्कृष्ट सहयोग को देखते हुये पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज के द्वारा हर सम्भव सहयोग प्रदान करने हेतु आश्वासन दिया गया।
















