पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि पहले आयुर्वेदिक नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए केवल 20 सीटें थीं और सिर्फ एक सरकारी संस्थान को यह कोर्स संचालित करने की अनुमति थी। उस समय रिक्त पदों की संख्या अधिक होने के कारण अधिकतर प्रशिक्षुओं को समायोजित कर लिया गया होगा…
नईदिल्ली (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कॉलेज में दाखिला मिल जाना अपने आप में सरकारी नौकरी पाने का अधिकार सुनिश्चित नहीं करता। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि विज्ञापन या नीति में नियुक्ति की कोई स्पष्ट गारंटी या आश्वासन नहीं है तो केवल दाखिले के आधार पर नौकरी की मांग नहीं की जा सकती। यह टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत ने आयुर्वेदिक स्टाफ नर्स के पद पर नियुक्ति की मांग करने वाले अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 जनवरी 2025 के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी कॉलेज से प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वैध अपेक्षा का सिद्धांत लागू नहीं होता क्योंकि समय के साथ सरकारी नीति और योजना में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।
पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि पहले आयुर्वेदिक नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए केवल 20 सीटें थीं और सिर्फ एक सरकारी संस्थान को यह कोर्स संचालित करने की अनुमति थी। उस समय रिक्त पदों की संख्या अधिक होने के कारण अधिकतर प्रशिक्षुओं को समायोजित कर लिया गया होगा। हालांकि, बाद में स्थिति बदल गई और सरकार ने 15 निजी कॉलेजों को भी यही प्रशिक्षण देने की अनुमति दे दी। ऐसे में पहले की प्रथा के आधार पर भविष्य में नियुक्ति की उम्मीद करना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।
अदालत ने कहा कि भेदभाव तभी माना जाएगा जब समान स्थिति वाले लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाए। यहां राज्य सरकार यह साबित करने में सफल रही कि 2010-11 सत्र के बाद प्रवेश लेने वाले किसी भी अभ्यर्थी की पुरानी व्यवस्था के तहत नियुक्ति नहीं की गई।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आयुर्वेदिक स्टाफ नर्स की नियुक्ति से संबंधित उत्तर प्रदेश आयुष (आयुर्वेद) नर्सिंग सेवा नियम वर्ष 2021 में बनाए गए। इसके साथ ही चयन प्रक्रिया में भी बदलाव हुआ। पहले चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाता था, जबकि अब यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से होती है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया और साफ किया कि सरकारी कॉलेज में दाखिला मात्र से नौकरी का अधिकार स्वत: उत्पन्न नहीं होता।
















