जिले के शेंदुरसनी ग्राम पंचायत से अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। बता दें कि गांव की आबादी कुल 1300 ही है लेकिन जन्म और मृत्यु से जुड़े करीब 27,000 प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। वहीं इस खुलासे के बाद सरकार ने इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है…
जलगांव (ए)। महाराष्ट्र में जन्म और मृत्यु के डिजिटल पंजीकरण को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐसे गांव में भारी गड़बड़ी सामने आने के बाद विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है, जहां आबादी सिर्फ 1300 है लेकिन जन्म और मृत्यु से जुड़े करीब 27,000 प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।
अधिकारियों के अनुसार शेंदुरसनी ग्राम पंचायत की कुल आबादी लगभग 1300 है, जबकि सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के जरिए यहां जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड की संख्या 27 हजार से ज्यादा पाई गई। यह आंकड़ा गांव की जनसंख्या से बिल्कुल मेल नहीं खाता और इससे डिजिटल सिस्टम के दुरुपयोग, छेड़छाड़ या धोखाधड़ी की आशंका गहराती है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सिर्फ तीन महीनों में गांव से 27,398 ‘देर से जन्म पंजीकरण’ किए गए, जो अपने आप में बेहद संदिग्ध है।
इस मामले में यवतमाल शहर के पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल जांच की जिम्मेदारी उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के पास थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग ने अब जांच एसआईटी को सौंप दी है। यह टीम महाराष्ट्र साइबर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) की निगरानी में काम करेगी। एसआईटी में स्वास्थ्य सेवाओं के उप निदेशक और जिला स्वास्थ्य अधिकारी को भी शामिल किया गया है।
बता दें कि, एसआईटी इस हफ्ते गांव का दौरा करेगी। वहां जमीन स्तर पर जांच होगी, ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली को परखा जाएगा और यह देखा जाएगा कि सिस्टम की किन कमियों का फायदा उठाया गया। इसके अलावा आईपी लॉग्स की तकनीकी जांच, जिन लोगों के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बने, उनसे पूछताछ पूरे नेटवर्क और तरीकों की पहचान होगी।
जांच का मकसद सिर्फ दोषियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश और सुधारात्मक कदम तय करना भी है। सरकार का कहना है कि डिजिटल पंजीकरण प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना और जनता का भरोसा कायम रखना उसकी प्राथमिकता है।
















