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अब छत्तीसगढ़ पुलिस को दूसरे राज्यो ने नही खरीदना पड़ता है पुलिस डॉग्स, ब्रीडिंग सेंटर 7वीं वाहिनी भिलाई में जन्मे 32 डॉग्स, हो रहे ट्रेंड

 

भिलाई। छत्तीसगढ़ पुलिस में शामिल डॉग्स को अब दूसरे राज्यो से खरीदी पूरी तरह बंद कर दी गई है। सातवीं वाहिनी छसबल भिलाई में तीन वर्ष पूर्व खुले राज्य के पहले ब्रीडिंग सेंटर के कारण सम्भव हो पाया है। पिछले दो साल में यहां 32 डॉग्स का जन्म हुआ है। बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के डॉग्स के बच्चों को ट्रेंड कर उन्हें पुलिस बल में शामिल किया जा रहा है। पिछले डेढ़ साल में इन डॉग्स की मदद से पुलिस ने चोरी और हत्या के 100 मामले और 66 बम के सुराग तलाशने में सफलता पाई है। वर्ष 2005 से अब तक इन डॉग्स की मदद से 907 केस सुलझाये है।

डॉग्स को मिल रहा इंसानों जैसे सुविधा

ब्रीडिंग सेंटर में नवजात डॉग्स को इंसान के बच्चों जैसा परवरिश की जा रही है, टाइम टू टाइम उनका विशेष ख्याल रखा जा रहा है। भीषण गर्मी होने के कारण प्रत्येक डॉग्स के रूम में कूलर की व्यवस्था की गई, जिससे कि उन्हें गर्मी से निजात मिल सके। प्लाटून कमांडर और श्वान दल के प्रभारी सुरेश सिंह इनका विशेष ध्यान रखते है।

कमांडेंड का मिल रहा भरपूर प्यार

सातवी वाहिनी के कमांडेंड आईपीएस विजय अग्रवाल का भरपूर प्यार इन नन्हे और बड़े डॉग्स को मिल रहा है। कमांडेंड को भी इनका साथ अच्छा लगता है, कमांडेंड जब भी फ्री रहते है इन डॉग्स के साथ समय व्यतीत करने से नही चूकते यही कारण है कि कमांडेंड के ट्रेनिंग सेंटर पहुंचते ही डॉग्स उछल कूद करते हुए इनसे लिपट जाते है और कमांडेंड भी उन्हें गोद में लेकर बच्चों की तरह दुलारते है।

शांत और हरियाली युक्त वातावरण का है माहौल

जहां पर डॉग्स को रखने और ट्रेनिंग देने की व्यवस्था है वहां का वातावरण बिलकुल शांत और हरियाली युक्त है। डॉग्स जहाँ खेलते है वहां पूरा चेकर टाइल्स लगाया गया है ताकि वह मिट्टी ना खाएं।

राज्य सरकार को हो रहा आर्थिक लाभ

बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के एक डॉग्स की कीमत 80 हजार से 01 लाख रुपये तक होगी है, 32 डॉग्स की कीमत करीब 32 लाख हुई, इस ब्रीडिंग सेंटर के खुलने से राज्य सरकार को 32 लाख रुपये की आर्थिक बचत हुई है और भविष्य में भी होती रहेंगी।

सातवीं बटालियन के कमांडेंड आईपीएस विजय अग्रवाल ने सारनाथ एक्सप्रेस को बताया की ओडिशा सहित अन्य राज्यो की सीमाओं के मार्गो से नशीली पदार्थो की तस्करी पकड़ने के लिए पहले चरण में दो डॉग्स को ट्रेंड किया जा रहा है, जिसमे उन्हें अलग अलग प्रकार के नशीली पदार्थो को पकड़ने की ट्रेनिंग दी जाएगी, उनके बाद दूसरा बैच तैयार किया जाएगा।

श्री अग्रवाल ने बताया कि भिलाई में राज्य का पहला ब्रीडिंग सेंटर खोलने के बाद वर्ष 2019 में बेल्जियम शेफर्ड के तीन डॉग्स से 22 बच्चे जन्मे, अप्रैल 2021 में 10 बच्चे हुए वही 3 डॉग्स डोनेट में मिले है। वर्ष 2019 वाले डॉग्स को ट्रेंड कर अलग अलग जिलों और टारगेट पर तैनात किया गया है।

श्री अग्रवाल ने बताया कि आज प्रदेश में पुलिस दल के पास 88 डॉग्स है जिसमे 40 बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के है। बीजापुर में 8 डॉग्स तैनात है, जिसमे 6 बम ट्रैकर और 2 खोजबीन वाले है। कांकेर में 6, सुकमा में 5, राजनांदगांव में 5, रायपुर में 5, बिलासपुर में 5, एसटीएफ बघेरा दुर्ग में 4, कोंडागांव में 4 की पोस्टिंग है लेकिन जरूरत के हिसाब से यह पोस्टिंग कम ज्यादा की जाती है। बेल्जियम शेफर्ड एक बार मे 12 किलोमीटर जा और आ सकते है जबकि लेब्राडोर को कुछ देर आराम की जरूरत पड़ती है। इन डॉग्स में 12 साल तक इसी तरह की काबलियत और एनर्जी रहती है। इसके बाद इन्हें रिटायर्ड कर दिया जाता है। देेेखे वीडियो

https://youtu.be/_hkI6Kpedlg

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