BREAKING

खास खबरछत्तीसगढ़फीचर्ड

तेजतर्रार IPS जितेंद्र शुक्ला बने NSG में ग्रुप कमांडर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सरकार को भेजा पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी जितेंद्र शुक्ला को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) में ग्रुप कमांडर के पद पर नियुक्त किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर जानकारी दी है। उन्हें तत्काल कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि 2013 बैच के अधिकारी जितेंद्र शुक्ला को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत एनएसजी में एसपी स्तर के पद पर नियुक्त किया गया है।

जितेंद्र शुक्ला ने 2 सितंबर 2013 को आईपीएस सेवा ज्वाइन की। प्रशिक्षण के दौरान वे बिलासपुर में रहे और कोटा थाना प्रभारी के रूप में काम किया। इसके बाद वे अंबिकापुर में सीएसपी, सुकमा में एडिशनल एसपी रहे। उन्होंने सुकमा, महासमुंद, कोरबा, राजनांदगांव और दुर्ग जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके है।

पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला का जन्म इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ। उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर, इलाहाबाद में पूरी की। हाईस्कूल और हायर सेकंडरी तक कि शिक्षा गवर्मेंट इंटर कॉलेज से पूरी की। वर्ष 2003 में इन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से आर्ट्स (जियोग्राफी) में स्नातक किया और यही से वर्ष 2005 में इन्होंने आर्ट्स में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया।

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2006 में इन्होंने पहली यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन इनका चयन नही हो पाया। वर्ष 2009 में उन्होंने पुनः यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन इनका चयन नही हुआ लेकिन इसी वर्ष यूपी पीएससी में इनका चयन ट्रेजरी ऑफिसर के पद पर हुआ, जहां इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी।

वर्ष 2010 के यूपीएससी में यह इंटरव्यू तक पहुंचे। इतने कोशिशो के बाद भी उन्होंने हार नही मानी और तैयारी में जुटे रहे। वर्ष 2012 में उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ। ट्रेनिंग के बाद इन्हें डिस्ट्रिक ट्रेनिंग बिलासपुर में करने के बाद पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग सितंबर 2015 में अम्बिकापुर सीएसपी के पद पर हुई जहां उन्होंने मई 2016 तक अपनी सेवाएं दी। मई 2016 में इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन) सुकमा की जिम्मेदारी दी गई जहां उन्होंने जनवरी 2018 तक अपनी सेवाएं दी।

जनवरी 2018 में इन्हें पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर की अहम जिम्मेदारी दी गई जहां दिसम्बर 2018 तक अपनी सेवाएं दी। जनवरी 2019 में इन्हें पुलिस अधीक्षक, सुकमा की जिम्मेदारी दी गई जहां यह मार्च 2019 तक पदस्थ रहे। मार्च 2019 से अगस्त 2019 तक इन्हें पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरिक्षक, भर्ती चयन एवं लेखा कल्याण के पद पर पदस्त किया गया।

अगस्त 2019 से मार्च 2020 तक यह पुलिस अधीक्षक महासमुंद के पद पर रहे। मार्च 2020 से अगस्त 2020 तक पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव रहे। इसके बाद उन्हे सत्रहवीं बटालियन कवर्धा के कमांडेंट और फिर सोलहवीं बटालियन नारायणपुर के कमांडेंड की जिम्मेदारी दी गई। अक्टूबर 2023 के विधानसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग ने इन्हे पुलिस अधीक्षक कोरबा की जिम्मेदारी सौंपी। इनके नेतृत्व में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव सम्पन्न हुआ। इसके बाद राज्य सरकार ने इन्हे फरवरी 2024 में पुलिस अधीक्षक दुर्ग की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी, जहां उन्होंने अप्रैल 2025 तक अपनी सेवाएं दी। वर्तमान में वे पांचवीं बटालियन, जगदलपुर के कमांडेंट है। अब केंद्र सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति पर बुलाया है, जिसका आदेश भी जारी हो चुका है।

नक्सली क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान सराहनीय कार्य किये। एएसपी सुकमा रहते हुए वर्ष 2016 को सबसे सफल वर्ष माना जाता है, उस वर्ष पुलिस को बहुत की कम क्षति हुई थी। एसपी नारायणपुर रहते हुए चार नक्सली मारे गए और हथियार बरामद हुए।

एसपी राजनांदगांव रहते हुए दो एनकाउंटर हुए, जिसमे चार नक्सली मारे गए, घायल नक्सली पकड़ाए, 8 लाख का ईनामी नक्सली मारा गया और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे। पुलिस मुख्यालय में एआईजी एकाउंट वेलफेयर के पद पर रहते हुए उन्होंने पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए पुलिस पब्लिक स्कूल, रायपुर की शुरुआत जून 2019 में हुई जिसमें उनकी अहम भूमिका रही। पुलिस पब्लिक स्कूल को सीबीएससी मान्यता मिली और उस स्कूल में करीब 600 बच्चे अध्ययनरत है। पुलिस पब्लिक स्कूल में 50% पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित है और 50% ओपन रखा गया। पुलिस पब्लिक स्कूल के वे सेक्रेटरी भी है।

 

 

 

जानिए क्या है NSG?

  • NSG का गठन 1986 में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड एक्ट के तहत किया गया।
  • NSG विशेष रूप से आतंकवाद-विरोधी किसी भी अभियान को रोकने के लिए तैयार बनाया गया है। इनका इस्तेमाल तभी किया जाता है जब बेहद गंभीर आतंकवादी हमला हो।
  • देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी NSG के पास ही होती है। इसके अलावा भी कुछ चुनिंदा वीवीआई की सुरक्षा का जिम्मा एनएसजी के पास होता है।
  • 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद देश में ऐसे किसी फोर्स की जरूरत महसूस की गई।
  • NSG खुद को जीरो एरर फोर्स करता है। यानी इसमें गलती होने की कोई गुंजाइश नहीं होती है।

Related Posts