भिलाई। शिवसेना प्रदेश कार्यसमिति की आपत बैठक में गत दिनों बस्तर में हुए घटना पर सार्वजनिक बयान के माध्यम से प्रदेश सरकार से अपील की है कि विगत दिनों बस्तर के सीआरपीएफ केम्प का विरोध कर रहे ग्रमीणों का सरकार जांच कमेठी गठित कर स्वयं संज्ञान ले वास्तविकता क्या है? क्या वाक़ई ग्रामीण उदोलित हुए थे यह उन्हें उकसाया गया था? आखिर कौंन है वो लोग जो लगातार बस्तर को अशांत कर भोले-भाले ग्रमीणों को टारगेट करवा रहें है।
सरकार को इस ओर गम्भीरता से ध्यान देना चाहिये ओर ग्रामीणों को केम्प के विषय मे सही जानकारी देनी चाहिए। उनके सुरक्षा व रक्षा का जिम्मेदारी लेना चाहिये ताकि इस विषय पर नक्सलियों को लाभ न मिलें। ग्रामीणों पर हुये कार्यवाही से नक्सलवाद को बढ़वा मिलेगा। जिस पर छत्तीसगढ़ शिवसेना संज्ञान की अपील करती है।
जिन ग्रामीणों को नक्सल बता कर कार्यवाही की गई, उसपर जांच कमेठी गठित कर उन पीड़ितों के साथ न्याय हो, कही सरकार की छवि ख़राब करने की कोई बड़ी साज़िश तो नहीं। इस ओर भी ध्यान देना होगा। विगत दिनों 23 जवानों के शहीद होना व एक जवान को कुशल वापसी भी किरकिरी की वजह हो सकती है।
शिवसेना यह मांग करती है कि बस्तरवासियों के साथ अन्याय न हो और निर्दोषों पर कार्यवाही न हो।
उपरोक्त निर्णय प्रदेश कार्यालय में प्रदेश प्रमुख धनंजय सिंह परिहार के उपस्थिति में लिया गया। जंहा पार्टी प्रमुख ने उपरोक्त संदर्भ पर प्रदेश सरकार से संज्ञान की अपील करने का पक्ष रख ध्यान देने आग्रह किया है। उक्त बातें प्रेस के माध्यम से संयुक्त बयान में शिवसेना प्रवक्ता विक्की शर्मा, प्रदेश कार्यकारणी अध्यक्ष मधुकर पांडये, प्रदेश महासचिव रेशम जांगड़े, सुनील कुमार झा व राकेश श्रीवास्तव ने कही।











