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लोक आस्था का महापर्व छठ आज नहाय-खाय के साथ प्रारंभ, जानिए क्यों चढ़ाया जाता है ठेकुआ का प्रसाद?

महिलाएं अपनी संतान की रक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए यह 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती है। यह व्रत निसंतान दंपत्तियों के लिए भी बहुत लाभदायक माना जाता है। मान्यता है कि छठी मैया (षष्ठी देवी) की आराधना से उन्हें पुत्र या पुत्री रत्न की प्राप्ति होती है और उनकी सूनी गोद भर जाती है…

 

पटना (ए)। चार दिवसीय अनुष्ठान लोक आस्था महापर्व छठ आज शनिवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। आज छठ व्रती नियम-धर्म से सात्विक भोजन बनाकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण करेंगी। हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तक मनाया जाने वाला यह पर्व महिलाओं द्वारा मुख्य रूप से अपनी संतान की लंबी आयु, परिवार के सुख-समृद्धि और मनोवांछित संतान की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

छठी मइया को ध्यान कर छठ पूजा का संकल्प नहाय-खाय पर ही लेने का विधान है। इस दिन छठी मइया और आदित्य देव के लिए गीत गाकर उनका आह्वान किए जाने की परंपरा है। जिसे हर साल व्रतियों द्वारा पूरी भक्ति और विश्वास के साथ निभाया जाता है।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, छठ पूजा में छठी मैया को ठेकुआ का प्रसाद इसलिए चढ़ाया जाता है, क्योंकि ये प्रसाद उनको अतिप्रिय है। ये सनातन धर्म की पारंपरिक प्रसाद है। इस प्रसाद को शुभता, समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए चढ़ाया जाता है। ठेकुआ के प्रसाद के बिना छठ की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है।

बता दें, ठेकुआ छठी मैया के साथ-साथ भगवान सूर्य को भी बहुत प्रिय है। मान्यता है कि छठ पूजा के दौरान ठेकुआ चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। ठेकुआ चढ़ाने से छठी मैया बहुत प्रसन्न होती हैं और अपना आशीर्वाद भक्तों पर सदैव बनाए रखती है। ठेकुआ गेहूं, गुड़, और घी आदि से मिलकर बना होता है। ये चीजें सूर्य की तरह ही तेज और उर्जावान मानी जाती हैं, जिन्हें छठ पूजा में पूजा जाता है।

शास्त्रों में ये भी बताया गया है ठेकुआ का भोग लगाने से व्रती के घर में सुख और समृद्धि आती है और कोई कमी नहीं होती है। ठेकुआ नियमों और साफ-सफाई के साथ मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। ये छठ पूजा की पवित्रता और भक्ति को दर्शाता है।

26 अक्टूबर, रविवार को खरना है। इस दिन छठ व्रती पूरी निष्ठा से छठी मैया को खीर का प्रसाद बनाकर भोग लगाती हैं। लोहंडा का यह प्रसाद घर-परिवार और पास-पड़ोस में जनमानस को ग्रहण कराने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि खरना का प्रसाद ग्रहण करने से जीवन के सारे दूख दूर होते हैं। छठी मइया व्रती की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

27 अक्टूबर, सोमवार को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को संध्याकालीन अर्घ्य अर्पण किया जाएगा। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रती अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतति वृद्धि की कामना आदित्य देव से करते हैं।

28 अक्टूबर, मंगलवार को उदीयमान सूर्य को प्रात:कालीन अर्घ्य दिया जाना है। इस दिन दीनानाथ के उगते स्वरूप का दर्शन कर छठ व्रती खुशहाली की कामना करती हैं। परिवार के लोग भी छठ व्रती को सामने से दूध-जल का अर्घ्य अपर्ण कर अपनी निष्ठा प्रकट करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठी मैया को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। वे सृष्टि की रचना करने वाली देवी प्रकृति का छठा अंश हैं। यह भी मान्यता है कि ये सूर्य देव की बहन हैं, इसलिए छठ पर्व पर सूर्य के साथ छठी मैया की भी पूजा की जाती है।

छठ पूजा में प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव की उपासना की जाती है। सूर्य को आरोग्य, ऊर्जा और जीवन का दाता भी माना गया है।सूर्य को आरोग्य का देवता कहा जाता है। छठ व्रत रखने से व्रतियों और उनके परिवार को उत्तम स्वास्थ्य, तेज और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, सुबह और शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य की ऊर्जा शरीर को लाभ पहुंचाती है और रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

सूर्य देव को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए भी यह व्रत रखती है।

निर्जला व्रत- 36 घंटे तक यह व्रत लगभग 36 घंटों तक चलता है, जिसमें व्रती (व्रत रखने वाला) को न तो कुछ खाना होता है और न ही पानी पीना होता है। इतने लंबे समय तक बिना पानी के रहना शारीरिक सहनशक्ति की एक कठिन परीक्षा है।

छठ पर्व की शुरुआत से लेकर समापन तक शुद्धता और पवित्रता के बहुत कड़े नियम होते हैं, जिनका चार दिनों तक सख्ती से पालन करना होता है। इसमें व्रती को अपने हाथ से ही सारा काम करने की निष्ठा रखनी पड़ती है।

कार्तिक मास की ठंडी ऋतु में व्रती को नदी, तालाब या घाट पर ठंडे जल में घंटों खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देना होता है, जो शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

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