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इस शुभ मुहूर्त में करें भाई दूज का तिलक: जानिए भाई दूज की पूजन विधि और कथा?

हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल यह पर्व आज यानि 23 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. सनातन धर्म में भाई दूज के पर्व का विशेष महत्व बताया गया है और धर्म ग्रंथों में भी इसका उल्लेख किया गया है. जिसके अनुसार इस पर्व की शुरुआत यमराज और उनकी बहन यमुना से हुई है…

 

 

नईदिल्ली (ए)। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने गए थे और यमुना जी ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया था. जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान मांगने को कहा. यमुना जी ने भाई यमराज से वरदान मांगा कि जो भी भाई इस दिन बहन के घर जाकर भोजन करे और बहन से तिलक कराए, उसकी हर मनोकामना पूरी करना. साथ ही यमुना जी ने यह भी वरदान मांगा कि जो भी भाई बहन इस दिन ब्रज क्षेत्र की यमुना नदी के विश्राम घाट पर स्नान करेंगे उन्हें यम का भय नहीं सताएगा. इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।

भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को तिलक करती हैं और नारियल देकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं. यदि तिलक शुभ मुहूर्त में किया जाएगा तो अधिक फलदायी होता है. पंचांग के अनुसार भाई दूज के दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 13 मिनट से लेकर 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. यानि तिलक करने के लिए करीब 2 घंटे 15 मिनट का समय मिलेगा।

भाई दूज के सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान गणेश व यम देव का विधि-विधान से पूजन करें. साथ ही भाई दूज की कथा पढ़ें व सुनें. इसके बाद भाई पूर्व या उत्तर दिशा मुख करके बैठ जाएं और सिर पर रुमाल रख लें. फिर बहन रोली और अक्षत से भाई का तिलक करें और हाथ में कलावा बांधें. इसके बाद मिठाई खिलाएं और दीप जलाकर भाई की आरती करें. भाई भी बहन के पैर छूकर आशीर्वाद लें।

भाई दूज की तिथि
हिंदू पंचांग के मुताबिक, कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर रात 8 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होगी और 23 अक्टूबर रात 10 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदिया तिथि के अनुसार, 23 अक्टूबर को भाई दूज का पर्व मनाना शुभ माना गया है।

भाई को तिलक करने के 4 शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 तक

श्रेष्ठ मुहूर्त: दोपहर 1:13 बजे से दोपहर 3:28 बजे

विजय मुहूर्त: दोपहर 1:58 बजे से दोपहर 2:43 बजे तक

गोधूली मुहूर्त: शाम 05.43 बजे से शाम 06.09 बजे तक

भाई दूज की पूजन विधि
भाई दूज के दिन सुबह जल्दी उठकर भाई पहले चंद्रमा का दर्शन करें और फिर यमुना के जल या शुद्ध जल से स्नान करें. साफ वस्त्र धारण करने के बाद भाई अपनी बहन के घर जाए और उससे भाग्योदय का तिलक कराए।

तिलक के लिए बहन एक थाली तैयार करें जिसमें दीपक, अक्षत, रोली, फूल, सुपारी, नारियल, कलावा, सिक्का और मिठाई रखी जाती है. तिलक करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. फिर चौकी उत्तर-पूर्व दिशा में रखकर भाई को उस पर बैठाया जाता है. बहन पहले कलावा बांधती है, फिर माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करती है, फूलमाला पहनाती है और मिठाई खिलाती है. इसके बाद भाई को नारियल देकर उसके मंगल, सौभाग्य और दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है. भाई भी अपनी बहन को स्नेहपूर्वक उपहार देकर आशीर्वाद देता है।

भाई दूज की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन यमराज अपनी बहन देवी यमुना के घर मिलने गए थे. यमुना ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन परोसा. अपनी बहन के प्रेम और आदर से प्रसन्न होकर यमराज ने आशीर्वाद दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और उसे दीर्घायु प्राप्त होगी. तभी से इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।

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