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धर्मांतरण कानून के तहत FIR सिर्फ पीड़ित या परिजन ही करा सकते हैं, बाहरी व्यक्ति नहीं: सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने जांच में “गंभीर खामियों,” “विभिन्न एफआईआर में एक जैसे गवाहों के बयान,” और “सद्भावना की भारी कमी” को देखने के बाद आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह फैसला उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन के आरोपों से संबंधित छह एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर आया है…

 

 

नईदिल्ली (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत दर्ज की गई पांच प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के असंशोधित प्रावधानों के तहत, गैरकानूनी धर्मांतरण के कथित अपराध के लिए एफआईआर केवल पीड़ित व्यक्ति, उनके माता-पिता, भाई-बहन या खून, शादी या गोद लेने से संबंधित रिश्तेदार ही दर्ज करा सकते हैं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने पाया कि तीसरे पक्ष द्वारा दर्ज की गई एफआईआर कानूनी रूप से अमान्य थीं और एक ही घटना के संबंध में में बाद में दर्ज की गईं लगभग समान एफआईआर कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग थीं।

अदालत ने जांच में “गंभीर खामियों,” “विभिन्न एफआईआर में एक जैसे गवाहों के बयान,” और “सद्भावना की भारी कमी” को देखने के बाद आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह फैसला उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन के आरोपों से संबंधित छह एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर आया है।

1. एफआईआर संख्या 224/2022: 15 अप्रैल, 2022 को फतेहपुर के कोतवाली थाने में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष हिमांशु दीक्षित द्वारा दर्ज कराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 अप्रैल, 2022 को फतेहपुर के हरिहरगंज स्थित इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया में “धोखे और धोखाधड़ी” के माध्यम से लगभग 90 हिंदुओं का सामूहिक धर्मांतरण किया जा रहा था।

2. एफआईआर संख्या 47/2023: 20 जनवरी, 2023 को दर्ज हुई, जिसमें 25 दिसंबर, 2021 की एक घटना का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता सर्वेद्र विक्रम सिंह ने दावा किया कि उन्हें नकदी, नौकरी और शादी का लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित किया गया, लेकिन बाद में वह हिंदू धर्म में लौट आए।

3. एफआईआर संख्या 54/2023, 55/2023, और 60/2023: 23 और 24 जनवरी, 2023 को दर्ज की गईं। ये तीन अलग-अलग व्यक्तियों-वीरेंद्र कुमार, संजय सिंह और सत्यपाल द्वारा दायर की गई थीं, जिन्होंने 14 अप्रैल, 2022 की कथित सामूहिक धर्मांतरण की घटना का शिकार होने का दावा किया। अदालत ने पाया कि ये एफआईआर “एक-दूसरे की लगभग नकल” थीं।

4. एफआईआर संख्या 538/2023: 11 दिसंबर, 2023 को प्रयागराज में दर्ज हुई, जिसमें हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और गैरकानूनी धर्मांतरण गतिविधियों के आरोप लगाए गए।

याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द करने की उनकी याचिकाओं को खारिज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

 

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