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आज नवरात्रि के 8वें दिन इस मंत्र से करें मां महागौरी को प्रसन्न, जानिए पूजा विधि, और प्रिय भोग?

नवरात्रि की अष्टमी तिथि मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप को समर्पित है. मां महागौरी शांति और सौम्यता की प्रतीक मानी जाती हैं. मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों के जीवन से सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मकता व खुशहाली का आगमन होता है. आइए जानते हैं इस वर्ष अष्टमी कब है और इस दिन माता की पूजा कैसे करें…

 

नईदिल्ली (ए)। नवरात्रि, जिसे देश के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है, इस साल 22 सितंबर 2025 से शुरू हुई है और 2 अक्टूबर 2025 को विजयदशमी के साथ समाप्त होगी. वैसे तो नवरात्रि का हर एक दिन बेहद खास और महत्वपूर्ण होता है, लेकिन अष्टमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन माता के महागौरी स्वरूप की आराधना की जाती है. कई घरों में इस दिन हवन और कन्या पूजन किया जाता है, साथ ही अनेक व्रती इस दिन अपना व्रत खोलते हैं।

मां दुर्गा का ये स्वरूप एकदम श्वेत हैं। ऐसा कहा जाता है कि देवी को वर्षों कठोर तपस्या करने के बाद गौर वर्ण की प्राप्ति हुई थी। देवी ने सफेद रंग के वस्त्र धारण किए हुए हैं। माता की सवारी वृषभ यानी बैल है। मां की चार भुजाएं हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार माता महागौरी के अवतरित होने के समय देवी की आयु 8 वर्ष थी।

पंचांग के अनुसार, इस बार अष्टमी तिथि 29 सितंबर 2025, सोमवार को दोपहर 4 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 30 सितंबर, मंगलवार को शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा. इस प्रकार इस वर्ष महाअष्टमी 30 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।

अष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें. मां महागौरी का गंगाजल से अभिषेक कर उन्हें पूजा स्थल पर स्थापित करें. माता को लाल चंदन, अक्षत, लाल फूल और लाल चुनरी अर्पित करें. इसके बाद भोग स्वरूप फल, खील और मिठाइयां चढ़ाएं. दीपक और धूपबत्ती जलाकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें. फिर हवन करें और पान के पत्ते पर कपूर रखकर आरती करें. अंत में यदि पूजा में कोई कमी रह गई हो तो माता से क्षमा याचना करें।

मां महागौरी का प्रिय भोग
नवरात्रि के नौ दिनों में मां के अलग-अलग स्वरूप को अलग-अलग भोग लगाया जाता है। नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल से बनी मिठाइयों का बोग लगाया जाता है। उन्हें नारियल बर्फी या लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही हलवा और काले चने का भोग लगाना भी अतयंत शुभ माना जाता है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन करके भोजन और उपहार देने की परंपरा भी है।

  • अष्टमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ और सफेद रंग के वस्त्र धारण करें।
  • मां महागौरी की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद मां को सफेद रंग के वस्त्र पहनाएं।
  • इसके बाद मां को सफेद फूल अर्पित करें। इसके साथ ही कुमकुम से तिलक करें।
  • इन सब के बाद मां महागौरी के मंत्रों के जप करें।
  • मां को नारियर से बनी मिठाई, हलवे और काले चने का भोग लगाएं।
  • इसके पश्चात अंत में मां महागौरी की आरती उतारें।

मां प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जप करें
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभू‍तेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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