ज्योतिष शास्त्र कहता है कि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति हर दिन अलग असर डालती है. कुछ दिन ऐसे भी होते हैं जिन्हें हर साल विशेष महत्व के कारण मनाया जाता है. इन्हीं में से एक है विश्वकर्मा पूजा. यह पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. खासकर कारीगरों, मजदूरों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है…
नईदिल्ली (ए)। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल सूर्य देव जिस दिन कन्या राशि में प्रवेश करते हैं वह दिन विश्वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है. 2025 में यह पर्व 17 सितंबर, बुधवार को मनाया जाएगा. इसी दिन कन्या संक्रांति भी है, जो शुभ कर्मों और स्नान-दान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस खास दिन को देशभर में बड़े ही श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. खासकर कारखानों, वर्कशॉप, फैक्ट्रियों, दुकानों और ऑफिसों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है. मशीनों को सजाया जाता है और पूरे वातावरण में भक्ति की भावना फैल जाती है।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला अभियंता माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, उन्होंने कई पौराणिक नगरों, महलों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था. उनके बनाए हुए प्रसिद्ध निर्माणों में द्वारका, इंद्रपुरी, पुष्पक विमान और शिवजी का त्रिशूल शामिल है. उन्हें कला, शिल्प, यंत्र और विज्ञान का स्वामी भी कहा जाता है।
जो लोग मशीनों, निर्माण और तकनीकी कार्यों से जुड़े होते हैं, वे इस दिन अपने औजारों और यंत्रों की पूजा करते हैं. माना जाता है कि इससे व्यापार में उन्नति होती है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
विश्वकर्मा पूजा 2025 की तिथि और समय
-पर्व की तिथि: 17 सितंबर 2025 (बुधवार)
-संक्रांति का समय: सुबह 01:55 बजे
इस समय के आसपास पूजा करना शुभ माना जाता है, खासकर सूर्योदय के समय.
पूजा करने का सही तरीका
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
2. अपने औजार, वाहन, मशीन या कार्यस्थल को साफ करें.
3. पूजा की जगह पर कलश, फूल, माला, चंदन, धूप, अक्षत, सुपारी और पीली सरसों रखें.
4. भगवान श्री हरि का स्मरण कर पहले उन्हें फूल अर्पित करें.
5. फिर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा के सामने बैठकर पूजा आरंभ करें.
6. नीचे दिया गया मंत्र पढ़ते हुए ध्यान लगाएं:
“ऊं आधार शक्तपे नमः, ऊं कूमयि नमः, ऊं अनंतम नमः, ऊं पृथिव्यै नमः, ऊं श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः.”
7. मंत्र जाप के बाद अक्षत और फूल भगवान को अर्पित करें.
8. पीली सरसों की चार छोटी पोटलियां बनाकर चारों दिशाओं में बांधें.
9. पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें.
10. अगले दिन प्रतिमा का विसर्जन करें.
क्या मिलेगा इस पूजा से?
जो भी व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से पूजा करता है, उसके जीवन में तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं. माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से कारोबार में वृद्धि होती है, मशीनें बिना रुकावट चलती हैं और कार्यस्थल पर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
जब देवताओं को वृत्रासुर ने पराजित कर दिया था उस समय देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विश्वकर्मा ने ही महर्षि दधीचि की अस्थियों से देवताओं के लिए अस्त्र शस्त्र का निर्माण किया था। देवराज इंद्र का वज्र भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था। जिससे देवताओं ने वृत्रासुर का वध करके वापस स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।
















