जब भी किसी पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लगता है तो वह ज्योतिष के नजरिए से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. पूर्णिमा तिथि पर राहु-चंद्रमा का योग चंद्र ग्रहण की स्थिति को पैदा करता है. जैसा कि सूर्य सिद्धांत में भी वर्णित है. जब भी ऐसी ग्रहों की स्थिति का निर्माण होता है तो प्राकृतिक आपदाओं की प्रबल संभावनाएं रहती हैं…
नईदिल्ली (ए)। रविवार 7 सितंबर को भाद्रपद पूर्णमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित होगा. चंद्र ग्रहण रात 09.58 बजे से शुरू होगा और देर रात 01.26 बजे इसका समापन होगा. इस दौरान रात 11 बजकर 42 मिनट पर चंद्र ग्रहण अपने पीक पर होगा. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, एक पूर्ण चंद्र ग्रहण का असर उसके घटित होने से तीन महीने पहले और तीन महीने बाद तक रहता है. यानी कुल मिलाकर चंद्र ग्रहण का प्रभाव करीब 6 महीने तक बना रहता है. आइए जानेत हैं कि इस चंद्र ग्रहण का सभी राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।
चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले यानी 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से लग जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में भोजन खाना, सोना और पूजा-पाठ वर्जित माना जाता है. लेकिन, ग्रहण के दौरान भगवान के मंत्र का जाप करना बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है।
भारतीय समयानुसार, 7 सितंबर को साल का आखिरी चंद्रग्रहण रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू हो जाएगा, जिसका समापन 8 सितंबर की अर्धरात्रि 1 बजकर 26 मिनट पर होगा. ज्योतिषियों की मानें तो, 7 सितंबर को दिखने वाला चंद्र ग्रहण एकदम लाल दिखेगा, जिसे ब्लड मून के नाम से भी जाना जाता है।
चंद्र ग्रहण का पहला स्पर्श रात 8 बजकर 59 मिनट पर होगा और इस ग्रहण के अंतिम स्पर्श रात 2 बजकर 24 मिनट पर होगा. यानी भारत में संपूर्ण ग्रहण काल की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट की रहेगी. अगर चंद्र ग्रहण के सबसे महत्वपूर्ण और पीक टाइमिंग की बात की जाए तो ये रात 11 बजकर 42 मिनट पर अपने चरम पर होगा।
चंद्र ग्रहण के कारण जल सैलाब का सबसे अधिक प्रकोप रहता है, क्योंकि चंद्रमा जल का कारक होता है. ऐसे में बाढ़, भारी वर्षा या जल सैलाब का खतरा अधिक देखने को मिलता है. पहाड़ों में विशेष रूप से इसका प्रकोप देखने को मिलेगा, क्योंकि चंद्रमा वनस्पतियों का भी स्वामी है. इसलिए, पहाड़ी क्षेत्रों में इस प्रकार की आपदाएं ज्यादा घटित होती नजर आएंगी।
सूतक काल में क्या न करें?
भोजन और पकाना वर्जित है
- सूतक लगने के बाद नया खाना नहीं बनाया जाता।
- पहले से बना भोजन भी ढककर रखना चाहिए।
- मंदिरों और घरों में भगवान को भी इस दौरान भोग नहीं लगाया जाता।
शुभ कार्य न करें
- इस समय शादी, नामकरण, पूजा-पाठ, हवन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- कोई नया काम शुरू करना भी अशुभ माना जाता है।
यात्रा से बचें
- परंपरा के अनुसार, ग्रहण के समय यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता।
- अगर जरूरी हो तो भगवान का नाम लेकर यात्रा शुरू की जा सकती है।
धार्मिक कार्य रोके जाते हैं
- मंदिरों के द्वार बंद कर दिए जाते हैं।
- पूजा-पाठ और मूर्तियों को छूना वर्जित होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां
- परंपरा के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बाहर नहीं निकलना चाहिए।
- कैंची, चाकू या नुकीली चीज़ों का इस्तेमाल करने से मना किया जाता है।
गर्भवती महिलाएं मानसिक शांति और शिशु की रक्षा हेतु निम्न मंत्रों का जाप कर सकती हैं-
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ दुर्गायै नमः
- ॐ चन्द्राय नमः
- इन मंत्रों के जाप से मानसिक स्थिरता, शांति और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है।
सूतक काल में क्या करें?
- मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करना बहुत शुभ माना जाता है।
- भगवान का ध्यान करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
- ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करना और घर की सफाई करना जरूरी है।
- भोजन में तुलसी पत्र डालने की परंपरा है, जिससे वह सुरक्षित रहता है।
पूर्ण चंद्रग्रहण को सुरक्षित रूप से कैसे देखें
- चंद्र ग्रहण को सीधे आंखों से देखना बिल्कुल सुरक्षित है.
- किसी स्पेशल चश्मे या उपकरण के भी आप चंद्र ग्रहण देख सकते हैं.
- बेहतर अनुभव के लिए खुले आसमान और बिना प्रदूषण वाले क्षेत्र में देखें.
- दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर चांद के रंग और डिटेल्स और भी साफ दिखाई देंगे.
कहां कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण
साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा. भारत के अलावा चंद्र ग्रहण को एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, फिजी और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। सारनाथ एक्सप्रेस इसकी पुष्टि नहीं करता है।
















