दुर्ग। रविवार को छुट्टी के दिन राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए दुर्ग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर के कार्यकाल को बढ़ा दिया। डॉ. ठाकुर 30 अप्रैल को रिटायर्ड हुए थे। जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण और डॉ. ठाकुर के अनुभवों को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। जब दुर्ग जिला 2018 में डेंगू की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था उस वक्त सरकार ने इन्हें दुर्ग की जिम्मेदारी सौंपी थी और इन्होंने बेहतर काम करते हुए दुर्ग को डेंगू से निजात दिलाई में अहम भूमिका निभाई थी।
डॉ जीएस ठाकुर की प्रारंभिक शिक्षा कांकेर जिले के चारामा ब्लाक के पूरी गावँ के शासकीय स्कूल में हुई थी। हाईस्कूल व हायरसेकंडरी (उस वक्त ग्यारहवीं) की शिक्षा के लिए इन्हें अपने गावँ से करीब 20 किलोमीटर दूर का सफर तय कर चारामा शासकीय स्कूल आना पड़ता था। हायरसेकंडरी की परीक्षा पूरी करने के बाद कॉलेज के एडमिशन में देरी होने के कारण इन्होंने सिंचाई विभाग में टाइमकीपर की नौकरी के लिए एग्जाम फाइट किया और सलेक्ट हुए। दो वर्षों तक नौकरी करने के साथ ही स्नातक की पढ़ाई की। वर्ष 1974 में बायोलॉजी से स्नातक करने के बाद वर्ष 1975 के पीएमटी की परीक्षा दिए। वर्ष 1975 में मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए सेलेक्ट हुए। वर्ष 1975 में वन विभाग में एसओडी के लिए भी इनका चयन हुआ था पर इन्होंने वहा नौकरी जॉइन नही की। वर्ष 1975 से 1980 तक एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने वर्ष 1981 में रायपुर मेडिकल कालेज से इंटर्नशीप की। वर्ष 1982 में असिस्टेंट सर्जन के लिए सलेक्ट हुए तथा इसी वर्ष इनकी पहली पोस्टिंग जयबेल ब्लाक बकावन (बस्तर) में हुई। अक्टूबर 1982 में इनका स्थानांतरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमोडा (कांकेर) के लिए हो गया। ब्लॉक मेडिकल आफिसर अमोडा (कांकेर) के पद पर इन्होंने वर्ष 1982 से 1988 तक अपनी सेवाएं दी। जहाँ इन्हें पुरुष नशबंदी के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री (मप्र शासन) मोतीलाल वोरा के द्वारा गोल्ड मैडल देकर सम्मानित किया गया था। काम के साथ साथ इन्होंने पढ़ाई जारी रखी और वर्ष 1988 ने एमडी की डिग्री हासिल की। वर्ष 1988 में इनका स्थानांतरण एमडी (रेडियोलॉजी) के पद पर गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के लिए हुए जहां इन्होंने दो वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। जनवरी 1990 इनका स्थानांतरण जिला चिकित्सालय धमतरी में सीनियर मेडिकल आफिसर (एक्सरे विभाग) के लिए हुए जहां इन्होंने नवम्बर 1990 तक अपनी सेवाएं दी। नवम्बर 1990 में इनका स्थानांतरण जिला चिकित्सालय दुर्ग में एक्सरे विभाग में रेडियोलॉजिस्ट इंचार्ज के पद पर हुआ जहां इन्होंने अप्रैल 2001 तक अपनी सेवाएं दी। अप्रैल 2001 में इनका स्थानांतरण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला कांकेर के लिए हुआ जहां इन्होंने जुलाई 2004 तक अपनी सेवाएं दी। जुलाई 2004 में इनका स्थानांतरण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला दंतेवाड़ा के लिए हुआ जहाँ इन्होंने अगस्त 2008 तक अपनी सेवाए दी। अगस्त 2008 में इनका स्थानांतरण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला कोरिया के लिए हुआ जहां इन्होंने फरवरी 2012 तक अपनी सेवाएं दी। फरवरी 2012 में इनका स्थानांतरण संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं सरगुजा संभाग के पद पर हुआ जहां इन्होंने जनवरी 2018 तक अपनी सेवाएं दी। जनवरी 2018 में इनका स्थानांतरण संयुक्त संचालक रायपुर, दुर्ग संभाग के पद पर हुआ जहाँ इन्होंने अगस्त 2018 तक अपनी सेवाएं दी। दुर्ग जिले में वर्ष 2018 में डेंगू का जब प्रकोप हुआ और कई जिंदगी खत्म हो गई ऐसे विषम परिस्थिति में सरकार ने इन्हें अगस्त 2018 में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला दुर्ग के पद पर पदस्थ किया। डेंगू का डंक झेल रहे दुर्ग जिला को इन्होंने अपने कार्यकुशलता एवं मेहनत से नियंत्रण करने में बड़ी भूमिका निभाई। मार्च 2020 में जब वैश्विक महामारी कोरोना का कहर बरपा रहा था उस वक्त भी इन्होंने अपनी कार्यकुशलता से कोरोना को हराने में दिनरात मेहनती की और अब 2021 में पुनः कोरोना की दूसरी लहर ने स्थिति को भयानक कर दिया है ऐसे में राज्य सरकार ने इनके कार्यकुशलता और अनुभवों को देखते हुए इनको रिटायर्ड ना करे इनके कार्यकाल को बढ़ा दिया है।
डॉ ठाकुर इतने उम्रदराज होते हुए भी लगातार ड्यूटी करते रहे, यह खुद भी कोरोना पॉजिटिव हुए आराम किये और फिर ड्यूटी कर रहे है। गत दिनों दुर्ग कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे भी इनके कार्यो की सराहना की थी। देखे आदेश👇















