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भाद्रपद मास की संकष्टी चतुर्थी (चौथ) आज, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा ?

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को अलग-अलग क्षेत्रों में भादवा चौथ, भादो चौथ, बहुला चतुर्थी, बोल चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है और मान्यता है कि इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं…

 

नईदिल्ली (ए)। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी, जिसे भादवा चौथ या हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने का एक अवसर है. इस व्रत को करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. 2025 में यह व्रत 12 अगस्त को मनाया जाएगा, जिसमें गोधूलि व चंद्रोदय पूजा का विशेष महत्व है. परंपराओं के अनुसार, इस दिन की पूजा-विधि और सही मुहूर्त का पालन करने से व्रती को आध्यात्मिक लाभ के साथ पारिवारिक सुख-समृद्धि भी प्राप्त होती है।

इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है. इस दिन पूजा करने के साथ व्रत रखने से जीवन के हर एक दुख दूर हो जाते है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस व्रत की कथा सुनने या पढ़ने से लोगों के मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं।

भादवा चौथ 2025 की तिथि और समय

व्रत की शुरुआत 12 अगस्त 2025, सुबह 8:40 बजे

व्रत की समाप्ति 13 अगस्त 2025, सुबह 6:35 बजे

शुभ पूजा मुहूर्त 12 अगस्त, शाम 6:50 से 7:16 बजे तक

चंद्रोदय समय रात 8:59 बजे

भादवा चौथ की पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर घर और मंदिर की साफ-सफाई करें.

दाहिने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.

लाल वस्त्र बिछाकर उस पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें.

भगवान का जल और पंचामृत से अभिषेक करें, उन्हें फूल, फल, मिठाई और दुर्वा चढ़ाएं.

घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप करें.

व्रत कथा सुनें और आरती के बाद भोग लगाएं.

रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें.

भगवान गणेश को दुर्वा घास अर्पित करें-

भगवान गणेश को दूर्वा घास काफी पसंद होती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को दूर्वा घास अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा घास अर्पित करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

भगवान गणेश को भोग लगाएं

भगवान गणेश को संकष्टी चतुर्थी के दिन भोग अवश्य लगाएं। आप भगवान गणेश को मोदक का भोग लगा सकते हैं। गणेश जी को मोदक अतिप्रिय होते हैं। धार्मिक शास्त्रों में मोदक को ब्रह्म के समान बताया गया है।

सिंदूर का तिलक लगाएं

भगवान गणेश को संकष्टी चतुर्थी के दिन सिंदूर का तिलक अवश्य लगाएं। ऐसा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश को तिलक लगाने के बाद अपने माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं।

भगवान गणेश की पूजा में घी का इस्तेमाल करें

भगवान गणेश को घी काफी पसंद है। संकष्ट चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा में घी को जरूर शामिल करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घी को पुष्टिवर्धक और रोगनाशक कहा जाता है। जो व्यक्ति भगवान गणेश की पूजा घी से करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

भादवा चौथ व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है. महिलाएं विशेष रूप से संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं. कुछ स्थानों पर गाय और बछड़े की भी पूजा की जाती है।

भादवा चौथ की पौराणिक कथा

प्राचीन समय में नल नामक राजा अपनी सुंदर रानी दमयंती के साथ सुखपूर्वक रहते थे. लेकिन एक श्राप के कारण राजा नल का राजपाट छिन गया, महल लूट लिया गया और वे पत्नी से भी अलग हो गए. दुखी रानी दमयंती वन में भटकते हुए महर्षि शरभंग से मिलीं. महर्षि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने की सलाह दी और कहा कि भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से पति-पत्नी का पुनर्मिलन होगा. दमयंती ने पूरे श्रद्धा भाव से व्रत किया, जिसके फलस्वरूप न केवल उन्हें पति नल वापस मिले, बल्कि पुत्र रत्न की प्राप्ति भी हुई. तब से यह व्रत सभी कष्टों को दूर करने वाला और विघ्नहर्ता गणेश जी की विशेष कृपा पाने का सर्वोत्तम उपाय माना जाने लगा।

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