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किताब खरीदते समय एसपी साहब की गाड़ी गुजरने के लिए वहां की पुलिस द्वारा भगाने की घटना ने मुझे बहुत प्रेरित किया : आईपीएस सदानन्द कुमार

रायपुर (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरे पिताजी किसान थे, मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि अच्छी नही थी। जब मैं चार साल का था तभी मेरे पिताजी का निधन हो गया था। मेरी माताजी पढ़ी-लिखी नही थी लेकिन उनका झुकाव हमेशा पढ़ाई-लिखाई के लिए था। हम पांच भाई और एक बहन है। मैं चौथे नम्बर का हूँ। मेरे दादाजी अमीर थे लेकिन परिस्थितियों के अनुसार सब जमीन नीलाम हो गई। तकलीफ  के दिनों को बहुत झेलना पड़ा। हमारे पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा मेरी माताजी यशोदा देवी और बड़े भैया ने मेहनत मजदूरी करके उठाया। यह सब बातें 16वीं बटालियन, नारायणपुर में कमांडेंड के पद पर पदस्थ आईपीएस सदानन्द कुमार ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
आईपीएस सदानन्द कुमार का पैतृक गांव जोड़ाडीह, मकवा, जिला मुंगेर (बिहार) है। इनकी कक्षा पांचवी तक की शिक्षा ग्राम जोडाडीह के शासकीय स्कूल में हुई। कक्षा छठवीं और सातवीं की शिक्षा इन्होंने मकवा गांव के माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त किया। कक्षा आठवी से दसवी तक की शिक्षा इन्होंने महावीर चौधरी विश्वविद्यालय, शांतिनगर, मुंगेर से प्राप्त किया। हायरसेकंडरी की शिक्षा इन्होंने आट्र्स में मोरारका कॉलेज, सुल्तानगंज से प्राप्त की।
वर्ष 2001 में संस्कृत में स्नातक की डिग्री ऑनर्स के साथ पूरी की।
वर्ष 2004 में तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर से संस्कृत में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
आईपीएस सदानन्द कुमार हाईस्कूल में टॉपर रहे, हायर सेकंडरी में कॉलेज टॉपर रहे। स्नातक (संस्कृत) में यह यूनिवर्सिटी टॉपर रहे जिसके लिए इन्हें गोल्ड मेडल से पुरस्कृत किया गया। स्नातकोत्तर में भी यह यूनिवर्सिटी टॉपर रहे जिसके लिए इन्हें गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2005 में इन्होंने लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नईदिल्ली से बीएड की डिग्री बतौर टॉपर हासिल किया।
वर्ष 2007 में इन्होंने नेट जीआरएफ़ (संस्कृत) की परीक्षा भी पास किया।
वर्ष 2007 में यह वापस बिहार आये और इनका चयन बिहार सरकार में हाईस्कूल टीचर के लिए हुआ।  जहाँ इन्होंने एक माह तक अपनी सेवाएं दी और फिर वापस दिल्ली आ गए।
दिसम्बर 2007 में इनका चयन दिल्ली अधीनस्थ सेवा बोर्ड में ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (संस्कृत) के पद पर हुआ, जहाँ इन्होंने वर्ष 2010 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2010 में इनका चयन बिहार राज्य लोक सेवा आयोग में सब डिवीजन मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पद पर हुआ, यह  राज्य प्रशासनिक सेवा में टॉपर रहे। वर्ष 2010 यूपीएससी में  इनका चयन आईपीएस के लिए हुआ तथा इन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला।
मसूरी और हैदराबाद में ट्रेनिंग के पश्चात वर्ष जनवरी 2012 में बतौर प्रशिक्षु इन्हें बिलासपुर में पोस्टिंग मिली जहां इन्होंने जुलाई 2012 तक अपनी सेवाएं दी।
सितंबर 2012 से सितंबर 2013 तक यह एसडीओपी जांजगीर-चांपा के पद पर रहे।
सितंबर 2013 से अप्रैल 2014 तक यह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग ग्रामीण के पद पर अपनी सेवाएं दी।
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर अप्रैल 2014 में इन्हें पुलिस अधीक्षक बलौदाबाजार की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद इन्होंने पुलिस अधीक्षक एसटीएफ बघेरा (दुर्ग) के पद पर अपनी सेवाएं दी। फरवरी 2015 में इन्हें पुलिस अधीक्षक बलरामपुर की जिम्मेदारी दी गई जहां इन्होंने जुलाई 2017 तक अपनी सेवाएं दी। जुलाई 2017 से दिसंबर 2017 तक पुलिस एकेडमी, चंदखुरी में अपनी सेवाएं दी। जनवरी 2018 से जून 2019 तक पुलिस अधीक्षक, बलरामपुर (सरगुजा) के पद पर अपनी सेवाएं दी।
जून 2019 से अगस्त 2020 तक पुलिस अधीक्षक ईओडब्लू के पद पर रहे तथा अगस्त 2020 से अब तक 16वीं बटालियन, नारायणपुर के कमांडेंड के पद पर पदस्थ है।
पुलिस अधीक्षक बलरामपुर रहते हुए इन्होंने वहां के बच्चों को एजुकेशन के क्षेत्र में बेहतर कार्य किये। वहां की संस्था स्वामी विवेकनंद स्टडी सर्कल में ग्रुप बनकर पढ़ाते थे, जिसमे 150-200 बच्चे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते थे। वहां का एक स्टूडेंट प्रशांत कुशवाहा 2017 बैच का सीजीपीएससी टॉपर रहा। एक बालिका कक्षा दसवीं में पूरे छत्तीसगढ़ में 10वीं रैंक लाई थी जो कि बहुत ही गरीब परिवार से थी,उसे संस्था और इनके द्वारा व्यक्तिगत सहयोग प्रदान किया गया जो कि आज इंजीनियरिंग कर रही है।
बलरामपुर (सरगुजा)  की तत्कालीन कलेक्टर रितु सेन ने वहां के जिला ग्रंथालय में प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी  करने वाले बच्चों के लिए ‘प्रेरणाÓ अभियान चलाया जिसमे इन्हें भी शामिल किया गया। इन्होंने भी उसमें जाकर बच्चों को पढ़ाया और मोटिवेट किया, जिसका परिणाम यह रहा कि वहाँ के 15 बच्चे सीजीपीएससी में चयनित हुए और नेट जीआरएफ़ सहित कई प्रतियोगी परीक्षा में सफल रहे।
साहित्य पढऩे, योगा करने, लोगो की मदद करने, जो बच्चे एग्जाम की तैयारी कर रहे है उनको किसी ना किसी रूप में मदद करना, उनको गाईड करने में विशेष रुचि रखने वाले आईपीएस सदानन्द कुमार ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थित ठीक नही थी, जैसे-तैसे माताजी और बड़े भैया ने पढ़ाया लिखाया, हमारे पास सिर्फ  ज्ञान था, यही मकशद था कि पढ़ लिखकर नौकरी करना है। पिताजी थे तो माताजी को अक्सर बोलते थे कि पांचों को अलग-अलग फील्ड में भेजना है। उनके सपनों को साकार करना था तो सभी भाइयों ने अलग अलग फील्ड में जाना तय किया। सबसे बड़े भैया गोविंद प्रसाद सिंह बिहार पुलिस में है, दूसरे नम्बर के भैया कैलाश बिहारी दिल्ली में संस्कृत के लेक्चरर है और कोचिंग भी चलाते है। तीसरे नम्बर के भैया अभय कुमार, भागलपुर जिला न्यायालय में वकील है और बिहार सरकार के द्वारा काउंसलर के रूप में पंचायती राज सिस्टम के तहत नियुक्ति हुए है। चौथा नम्बर का मैं हूं और सबसे छोटा भाई डॉ. पंचकिशोर, बेटनरी साइंस से पीएचडी कर सीनियर साइंटिस्ट के पद पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ  बेटनरी साइंस, इज्जतनगर (बरेली) में पदस्थ हैं।
शुरुआती दिनों में बहुत ही आर्थिक तंगी थी जिसके कारण मजदूरी करना पड़ा, ट्यूशन पढ़ाया सब काम किया। पुलिस में आने की प्रेरणा एक घटना से हुई थी, हुआ यू की जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था तब एक बार 3-4 दोस्तो के साथ भागलपुर गया था किताब खरीदने। भागलपुर के घंटा घर चौक पर किताब खरीद रहा था, तभी चौक से एसपी साहब की गाड़ी गुजरने वाली थी, वहां के पुलिसवालों ने सबको वहां से भगाना शुरू किया की भागो यहां से, तभी मन मे आया कि आखिर यह इतना बड़ा आदमी कौन है, जिसके लिए पूरा रास्ता खाली कराया जा रहा है। बड़े भैया से आकर इस बारे में बात किया तब उन्होंने इसके बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यूपीएससी के जरिये इस पद पर पहुचते है इसके लिए बहुत पढ़ाई करना पड़ता है। तभी मैंने सोचा लिया कि एक बार इसकी परीक्षा दी जाए। बड़े भैया के मार्गदर्शन में और दिशा-निर्देशों पर तैयारी शुरू किया, दिल्ली गया। वहां पहुंचा तो पैसे नही नही थे, तब वहां की संस्कृत कोचिंग दी स्टडी, पाननी क्लासेस में पढ़ाया, फिर खुद पढा। भागलपुर की घटना ने मुझे बहुत प्रेरित किया। काम करने का उद्देश्य यही रहा है कि किसी का अहित ना हो, लोगो का ज्यादा से ज्यादा भला हो सके, सरकार की योजनाओं और प्राथिमकताओ को पूरी करें। पीडि़त को उचित न्याय मिले इसके लिए हमेशा तत्पर रहे। सबको उचित न्याय मिलना चाहिए।

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