रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में इन दिनों 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले की गूंज सुनाई दे रही है। अब इस घोटाले की जांच की कमान औपचारिक रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने इस बाबत गृह विभाग के माध्यम से गोपनीय आदेश जारी कर दिए हैं। इस फैसले के साथ ही सियासी गलियारों में खलबली मच गई है।
इस बड़े घटनाक्रम का सबसे पहले खुलासा किया है The Hitavada के सीनियर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट एवं न्यूज़ एडिटर मुकेश एस सिंह (@truth_finder04) ने। उन्होंने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर यह जानकारी दी कि सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (DSPE Act) की धारा-6 के तहत CBI को जांच की विधिवत स्वीकृति दे दी
मिली जानकारी के मुताबिक, यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषित ‘जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन’ नीति के तहत उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि चाहे कोई भी कितना बड़ा रसूखदार क्यों न हो, अब बख्शा नहीं जाएगा।
570 करोड़ की अवैध वसूली का खेल: जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के नाम पर 570 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। हर टन कोयले पर 25 रुपये की दर से यह वसूली की जाती थी।
इस घोटाले का मास्टरमाइंड रायपुर के व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को माना जा रहा है। ईडी के अनुसार, सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों, ट्रांसपोर्टरों और दलालों की मदद से यह पूरा तंत्र खड़ा किया था। सूर्यकांत तिवारी इस वक्त न्यायिक हिरासत में है और उसकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज हो चुकी हैं।
गृह विभाग और PHQ के निर्देश, CBI को मिली खुली छूट: The Hitavada के पास मौजूद गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक, गृह विभाग की फाइल (क्रमांक F No. 4-10/Home-C/) और पुलिस मुख्यालय के सीआईडी लीगल सेक्शन ने सभी रेंज आईजी और जिलों के एसपी को विशेष निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि CBI को जांच में सहयोग करें और सभी दस्तावेजों की तुरंत आपूर्ति करें।
एक वरिष्ठ अफसर ने The Hitavada के रिपोर्टर से बातचीत में बताया कि सरकार ने इस निर्णय पर अंतिम मुहर लगा दी है। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह जानकारी दी।
इस मामले में पहले ही कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। 14 अगस्त 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। ईडी ने याचिका में आरोप लगाया था कि उन्होंने पीएमएलए की धारा 66 के तहत राज्य सरकार को घोटाले से जुड़े दस्तावेज सौंपे थे, मगर कार्रवाई नहीं हुई।
ईडी ने यह भी कहा था कि राज्य के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और ACB/EOW में अधिकांश अधिकारी राज्य सरकार के अधीन हैं, जिससे निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े होते हैं।
इस घोटाले में गिरफ्तार तीन वरिष्ठ अधिकारियों को मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दी थी।
जिन्हें जमानत मिली, वे हैं:-
• आईएएस समीर विश्नोई
• आईएएस रानू साहू
• तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि ये अफसर छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे और अपनी उपस्थिति अन्य राज्यों के पुलिस थानों में दर्ज कराएंगे।
सियासी रसूख भी जांच के घेरे में: अगस्त 2023 में ईडी ने दूसरी अनुपूरक चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कांग्रेस के दो विधायकों देवेंद्र यादव और चंद्रदेव राय के नाम सामने आए थे। आरोप है कि कोयला और आयरन ट्रांसपोर्ट से वसूली गई राशि को बेनामी खातों और शेल कंपनियों के जरिये राजनीतिक खर्चों में लगाया गया।
जुलाई 2025 में ACB/EOW ने 29 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें खान और आबकारी विभाग के अफसरों की संलिप्तता का भी जिक्र किया गया। सूर्यकांत तिवारी ने एसीबी पर सवाल उठाए थे। जिस पर अदालत ने जेल के सुपरिटेंडेंट कक्ष और मुख्य गेट की CCTV फुटेज संरक्षित करने का आदेश दिया था।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा था कि यदि ऐसी जबरदस्ती नहीं रुकी तो वे इसे सुप्रीम कोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाएंगे।
कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ 2023 में ईडी ने लुकआउट नोटिस जारी किया था। 2022-23 की ईडी रेड के बाद से वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
अब गिनती शुरू, बड़े चेहरों पर कार्रवाई तय: The Hitavada के सीनियर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट मुकेश एस सिंह की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, CBI को मिली अनुमति के बाद अब छत्तीसगढ़ में छापों और गिरफ्तारियों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। अगले कुछ दिनों में प्रदेश के बड़े अफसर, नेता और व्यापारी CBI के रडार पर आ सकते हैं। यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में बड़े भूचाल के तौर पर देखा जा रहा है।
















